आजकल कम उम्र में ही लड़कियां अपनी अव्यवस्थित लाइफस्टाइल व जंकफूड के अत्यधिक सेवन से मोटापे का शिकार हो रही हैं. मोटापा गंभीर रोगों की तरफ इशारा करता है. इस के कारण आप टाइप टू डायबिटीज, उच्च रक्तचाप तथा हृदयरोग जैसी बीमारियों की शिकार हो सकती हैं. जिन लड़कियों की कमर और पेट के चारों ओर चरबी इकट्ठी हो जाती है उन के पेट का आकार सेब जैसा दिखता है. पेट आदि की चरबी कम करने के लिए लड़कियों को अपना खानपान और दिनचर्या बदलनी होगी.

वैसे अब चिकित्सा वैज्ञानिकों ने कार्बनडाईऔक्साइड का मात्र इंजैक्शन लगा कर कमर की चरबी घटाने का तरीका ढूंढ़ निकाला है. यह एक प्राकृतिक गैस है, जो हमारे शरीर में श्वसन प्रक्रिया के दौरान बनती है. यह गैस जल्दी ही हमारे खून में मिल जाती है. फिर निश्वास तथा गुरदों की मदद से शरीर से बाहर भी निकल जाती है.

कोशिकाओं की निष्क्रियता

काबाक्सी थेरैपी से निश्चित मात्रा में कार्बनडाईऔक्साइड गैस एक बारीक सूई से त्वचा की ऊपरी सतह में पहुंचा दी जाती है. यह उस त्वचा में पहुंच कर आसपास के ऊतकों को सक्रिय करती है, जिस से रक्तवाहिकाएं कुछ चौड़ी हो जाती हैं. उन के चौड़ा होने से रक्तप्रवाह आसान हो जाता है और उस के उस भाग में औक्सीजन और पोषक तत्त्वों का प्रवाह भी बढ़ जाता है. कार्बनडाईऔक्साइड गैस मोटापा बढ़ाने वाली कोशिकाओं को भी निष्क्रिय कर देती है.

इस इलाज से लड़कियों की कमर, कूल्हों तथा जांघों में जमी अतिरिक्त चरबी को हटाया जा सकेगा. इटली की 48 महिलाओं को प्रयोग के तौर पर इस गैस के इंजैक्शन लगाए गए. जिस के परिणाम उत्साहजनक रहे. अब अमेरिका की नौर्थवैस्टर्न यूनिवर्सिटी में मोटी महिलाओं पर चिकित्सकीय परीक्षण शुरू हो गए हैं.

उधर ब्रिटेन के चिकित्सा वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लड़कियों के नितंब और जांघें भारी होती हैं, उन का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, क्योंकि यह दिल की बीमारियों से बचाता है. यही नहीं, भारी नितंब और जांघें पाचनक्रिया और शरीर को चुस्तदुरुस्त रखने में भी मदद करती हैं.

सावधानी

औक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के एक दल ने प्रयोग के बाद कहा कि नितंबों और जांघों पर जमा हो चुकी चरबी को हटाना मुश्किल होता है, जबकि कमर के आसपास की चरबी को आसानी से हटाया जा सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब चरबी को तेजी से पिघलाने का काम करने की कोशिश की जाती है तो इस से खास रासायनिक तत्त्व निकलते हैं, जो शरीर में कुछ झनझनाहट पैदा करते हैं. इन रासायनिक तत्त्वों का संबंध दिल से संबंधित बीमारियों, डायबिटीज और इंसुलिन से होता है.

शोधकर्ता टीम के प्रमुख का कहना है कि यह बहुत जरूरी है कि पेट और कमर के आकार को महत्त्व दिया जाए कि कहां और किस तरह से चरबी इकट्ठी हो रही है. नितंबों और जांघों पर  चरबी चढ़ना तो स्वास्थ्य के लिए ठीक है लेकिन पेट के आसपास यानी कमर पर चढ़ी चरबी हानिकारक होती है.