भारत विभिन्न परंपराओं के साथसाथ परिधानों के भी कई प्रकार समेटे हुए है. यह देश अलगअलग भाषा, संस्कृति और खानपान के साथसाथ अलगअलग पहनावे के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है. यह एक ऐसा देश है जहां कदमकदम पर फैशन के अनेक रंग और ढंग बिखरे हुए हैं. यदि सिर्फ परिधानों की बात की जाए तो भारत में हर मौके के लिए अलगअलग आउटफिट निश्चित हैं. लेकिन जब ट्रैंड और स्टाइल का संगम होता है तो आउटफिट की रूपरेखा बदल जाती है. पारंपरिक होते हुए भी उस में फैशनेबल का टैग लग जाता है.

परिधान पुराना अंदाज नया

दरअसल, भारत में अलगअलग समय पर अलगअलग देशों के राजाओं की हुकूमतें रही हैं और हर शासनकाल अपने साथ अलग पहनावा ले कर भारत आया. रजिया सुलतान के पहनावे से प्रभावित रजिया सूट और मुगल वंश की अनारकली के अनारकली सूट अब तक भारत में महिलाओं के फैशन का विस्तार कर रहे हैं. कहने के लिए यों तो ये बहुत ही पुराने परिधान हैं, लेकिन फैशन ने इन्हें चमका दिया है.

इन की रूपरेखा में भी बदलाव किया गया है. अपने नए कलेवर में इस तरह के सूट शादी और छोटेमोटे फैमिली फंक्शनों के लिए उपयुक्त हैं. लेकिन आप किसी की बर्थडे पार्टी या औफिशियल पार्टी में इस तरह के सूट पहन कर जाएंगी तो यह फैशन ब्लंडर ही कहलाएगा.

वैस्टर्न फैशन

इस के साथ ही भारत में आए ब्रिटिश राज ने भी भारतीयों की फैशन सैंस को बढ़ाया है. यही वजह है कि आज भारतीय महिलाओं को वैस्टर्न फैशन में आसानी से लिपटा देखा जा सकता है. विनीता कहती हैं कि अब हर महीने नया फैशन मार्केट में देखने को मिल जाता है. हर नई चीज को एक बार खुद पर जरूर आजमाना चाहिए. लेकिन इस बात की सैंस बहुत जरूरी है कि कौन सा आउटफिट किस अवसर पर पहना जाए.

कई लड़कियां दोपहर के समय हो रही पार्टी में ईवनिंग गाउन पहन कर चली जाती हैं जबकि नाम से ही साफ है ईवनिंग गाउन ईवनिंग पार्टी के लिए होते हैं. ईबे कंपनी द्वारा हाल ही में 1000 महिलाओं पर कराए गए सर्वे के अनुसार लगभग 15% महिलाएं यह गलती करती हैं.

फैशन जो बनाए जवां

फैशन यानी जो आप को अपटुडेट रखे. लेकिन अपटुडेट होने के चक्कर में कई बार महिलाएं इस बात का खयाल नहीं रख पातीं कि उन की उम्र के हिसाब से उन पर क्या जंचेगा. खासतौर पर घरेलू महिलाओं के लिए फैशन का मतलब रंगबिरंगी साड़ी या साधारण सी सलवारकमीज ही होती है. विनीता कहती हैं कि साड़ी तक सीमित महिलाओं को हम यह नहीं कह सकते कि वे फैशनेबल नहीं हैं.

आजकल बाजार में साडि़यों के कई पैटर्न मौजूद हैं. उन्हें ट्राई किया जा सकता है. लेकिन जरूरी है पैटर्न के हिसाब से डै्रपिंग. जी हां, फैशन वर्ल्ड में साडि़यों के साथ बहुत प्रयोग हो रहे हैं. अब साडि़यों में डिजाइनर्स क्रिएटिविटी दिखते हैं. खासतौर पर ड्रैपिंग के अलगअलग तरीकों को ध्यान में रख कर साड़ी को डिजाइन किया जाता है. लेकिन महिलाएं उसी पुराने ढर्रे पर हर साड़ी ड्रैप कर लेती हैं और यहीं वे फैशन की दौड़ से बाहर हो जाती हैं.

आउटफिट्स ही नहीं ऐक्सैसरीज के मामले में भी महिलाएं कई बार गलतियां कर बैठती हैं. सिर्फ आउटफिट अच्छा होने से ही बात नहीं बनती. ऐक्सैसरीज आउटफिट के लुक को इनहैंस करती हैं. इसलिए इन का चुनाव सही और सीमित होना चाहिए. लेकिन बहुत महिलाएं आउटफिट और ऐक्सैसरीज के चुनाव में सही तालमेल नहीं बैठा पाती हैं जैसे जो हेयर ऐक्सैसरीज ट्रैडिशनल आउटफिट के साथ पहननी चाहिए उन इस्तेमाल कैजुअल वियर के साथ करना फैशन मिस्टेक ही है.

बहुत अधिक फंकी लुक वाले फुटवियर पहनने से बचें. ये आप को फैशनेबल लुक से ज्यादा चाइल्डिश लुक देंगे. माना कि ऐनिमल प्रिंट ट्रैंड में हैं, लेकिन ध्यान रखें ये कैजुअल प्रिंट हैं. प्रोफैशनल और ट्रैडिशनल आउटफिट्स में इन का प्रयोग न करें. इनरवियर को आउटवियर पर फ्लौंट करने का फैशन अब पुराना हो चुका है और यह बहुत भद्दा भी लगता है, इसलिए ध्यान रखें कि आप की ब्रा की बैल्ट और पैंटी आउटवियर से ढकी रहे. ज्वैलरी पहनने की शौकीन हैं तो अवसर के अनुसार उस का चयन करें.

बाजार में यों तो कई तरह की ज्वैलरी हैं लेकिन इस का चयन ड्रैस पैटर्न पर निर्भर करता है. आप कितनी भी अच्छी ड्रैस पहन लें, लेकिन मेकअप और हेयरस्टाइल पर ध्यान न दिया जाए तो आप फैशनेबल कम फूहड़ ज्यादा लगेंगी.

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