मार्च का महीना आ गया है और सर्दियों की सुरमई शामें विदा ले चुकी हैं और गर्मियों का मौसम बाहें फैला रहा है. अब गर्म कपड़ो की बजाय हल्के-फुल्के कपड़ो में तितली की तरह उड़ते जाने को हर किसी का मन बेताब है. मगर धूप और गर्म मौसम हमारे सारे उत्साह को खत्म कर देता है, पर यदि ऐसे में मसाज ली जाए तो तन-मन में ताजगी आ जाती है और हमारा पूरा बदन निखर उठता है.

मसाज को लेकर ज्यादातर लोगो का मानना यह है कि मसाज सिर्फ सर्दियों में ही ज्यादा लाभ पहुंचाती है और गर्मियों में तो इसकी कल्पना करना मुश्किल है. झुलसाती गर्मियां और उस पर तेल का चिपचिपापन! सच तो यह है कि यह सिर्फ ऊपरी और गलत तस्वीर है. मसाज थेरैपी, सुंदरता और स्वास्थ्य निखारने का एक ऐसा जरिया है, जो हर मौसम में लाभ पहुंचता है.

गर्मियों में और जरूरी है मसाज

मसाज की जरूरत गर्मियों में और ज्यादा इसलिए भी हो जाती है, क्योकि ऋतु परिवर्तन के समय शरीर में मौजूद विकारो को अगर ठीक न किया जाए तो यह गर्मियों के दौरान कई समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसके अलावा गर्मियों में हमारे शरीर की ऊर्जा शक्ति पसीने और बाहरी वातावरण के ताप से काफी कमजोर हो जाती है. मसाज से इसमे भी राहत मिलती है और ऊर्जा शक्ति बढ़ती है .

मसाज से न सिर्फ शरीर को गहराई तक आराम मिलता है, बल्कि संवेदनाएं भी जागृत होती है. तेज रक्त संचार से शरीर में मौजूद विषाणु पसीने और मूत्र के रूप में बाहर आ जाते हैं. यह शरीर के अतिरिक्त ताप को कम करता है और बाहर से शरीर की मृत त्वचा भी साफ होती है, जिससे शरीर की चमक और नैसर्गिकता बढ़ती है.

मसाज करने से आपकी त्वचा में भी निखार आता है और आप दिन भर खिला खिला महसूस करती हैं.

मसाज का जरूरी है सही तरीका

मसाज थेरैपी से जुड़े फायदे तो बहुत है, मगर यह सार्थक तभी होगा  जब इसे सही तरीके से किया जाए. इसके लिए जरूरी है कुछ सावधानियां –

-गर्मियों मे मसाज करने के लिए सबसे पहले जिस जगह मसाज करनी हो, उस जगह के तापमान पर ध्यान दे. मसाज एयरकंडीशनर कमरे में बिलकुल न कराएं. कमरे का तापमान सामान्य होना चाहिए. मसाज किये जाने वाला पानी न तो काफी ठंडा हो न हो गर्म.

-कमरे में रोशनी बहुत ही हल्की होनी चाहिए, जिससे पूरी तरह से आराम महसूस किया जा सके. धीमें संगीत की स्वरलहरी इस माहौल को प्रभावी बना सकती है.

-सिरहाने पानी के बर्तन में जलता सुगंधित दीया (अरोमा थेरैपी में खासतौर से प्रयोग होता है) मानसिक शांति में बहुत कारगर साबित होता है.

-गर्भावस्था के दौरान भी मसाज न लें .

-मसाज हमेशा हल्के हाथों और सही प्रेशर प्वाइंट्स पर दबाब डालते हुए ही की जानी चाहिए और स्पर्श सहलाने जैसा होना चाहिए. इसलिए विशेषज्ञ से मसाज करना फायदेमंद रहता है.

-मसाज के लिए प्रयोग होने वाला तेल या क्रीम हमेशा व्यक्ति के शरीर की प्रवृत्ति व मौसम के अनुसार ही प्रयोग में लाना चाहिए.

-मसाज के बाद स्टीम बाथ और शावर ली जा सकती है.

-मसाज के बाद कुछ देर आराम जरूर करे और तुरंत ही तेज धूप या तेज हवा में ना निकले. अगर ऐसा करना ही पड़े तो शरीर पर पहले सनस्क्रीन लोशन वगैरह जरूर लगा लें.

-तंबाकू और एल्कोहल (अगर लेते हो तो) का प्रयोग अगले 24 घंटों तक बिलकुल न करें.

-पानी ज्यादा-से-ज्यादा पिए, जिससे मसाज से निकलने वाले विषैले तत्व तेजी से शरीर के बाहर निकल सके.

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