कौस्मैटिक सर्जन के अनुसार स्ट्रैच मार्क्स मुख्य रूप से कोलोजन प्रोटीन समूह में आई खराबी के कारण उत्पन्न होते हैं. ये प्रोटीनयुक्त पदार्थ त्वचा को लचीलापन प्रदान करते हैं और त्वचा को बांधे रखने वाले फाइबर्स को भी नुकसान पहुंचाने से बचाते हैं.

स्ट्रैच मार्क्स होते ही इन का इलाज करा लें वरना इन का कलर ग्रे या व्हाइट हो जाने पर इन से छुटकारा पाना बेहद मुश्किल हो जाता है. टमी पर क्रीम की मसाज से फायदा होता है. अगर इस से फायदा न हो तो तुरंत कौस्मैटिक सर्जन से संपर्क करें. न्यू लुक लेजर क्लीनिक के वाइस प्रैसिडैंट परिचय उपाध्याय स्ट्रैच मार्क्स और इन के उपचार के बारे में जानकारी दे रहे हैं.

स्टै्रच मार्क्स स्कार्स का ही एक प्रकार हैं, जिस में त्वचा की सतह पर पहले गुलाबी रंगत वाली पतली नसों जैसी धारियां बनती हैं, जो बाद में चमकदार सफेद रंग की हो जाती हैं. जब लचीलेपन और खिंचाव के लिए जिम्मेदार त्वचा की मध्य परत पर लगातार खिंचाव पड़ता है, तो यह अनेक स्थानों पर फट जाती है और स्ट्रैच मार्क्स बन जाते हैं.

स्ट्रैच मार्क्स के लक्षण

त्वचा की सतह पर नसों जैसी धारियां हो जाती हैं, जिन का रंग गुलाबी, पर्पल हो सकता है. बाद में इन का रंग धूमिल हो कर चमकीला सफेद हो जाता है. ये मार्क्स पेट, नितंबों, जांघों, ऊपरी बांहों और स्तनों पर आमतौर पर पाए जाते हैं.

स्ट्रैच मार्क्स के कारण

गर्भावस्था या प्रसव के बाद: प्रैगनैंसी के अंतिम दौर में महिलाओं के पेट के आसपास अकसर स्ट्रैच मार्क्स उभरना आम बात है, जो पेट की त्वचा को भद्दा बना देते हैं. ये मार्क्स त्वचा के निरंतर खिंचाव और हारमोन के असंतुलन के कारण भी होते हैं.

वजन कम होने के बाद या वजन बढ़ने के बाद: वजन बढ़ने पर त्वचा मांसपेशियों के मुताबिक नहीं बढ़ती, जिस से त्वचा के अंदरूनी भाग के कोलोजन फाइबर खिंचने लगते हैं. इस के बाद ये पतले लाल या सफेद रंग के उभरे हुए निशान पेट, छाती और जांघों के निचले हिस्सों पर दिखने लगते हैं.

मसल्स की बढ़ोतरी के कारण: जो लोग जिम में जा कर वेटलिफ्टिंग करते हैं उन्हें या फिर खिलाडि़यों को मसल्स में वृद्धि के कारण स्ट्रैच मार्क्स का सामना करना पड़ता है.

शारीरिक विकास के चलते: ऐसे युवाओं में, जिन में कम आयु में ही यौवन का विकास हुआ हो शारीरिक विकास के चलते स्ट्राइप्स हो जाते हैं. ये अचानक बनने और तेजी से बढ़ने वाले स्ट्राइप्स आगे चल कर स्ट्रैच मार्क्स बन जाते हैं.

आनुवंशिक: यदि परिवार में किसी को स्ट्रैच मार्क्स की समस्या रही हो तो भी ये हो जाते हैं.

किसी खास बीमारी की वजह से: कुछ बीमारियों जैसे कुशिंग्स सिंड्रोम, मारफन सिंड्रोम या अन्य आनुवंशिक गड़बडि़यों के कारण भी ये मार्क्स हो सकते हैं.

सर्जिकल तरीके

कार्बोक्स थेरैपी: कार्बोक्स थेरैपी स्ट्रैच मार्क्स की समस्या से छुटकारा पाने का एक सरल उपाय है. इस ट्रीटमैंट के दौरान स्किन में कार्बनडाईऔक्साइड का इंजैक्शन लगाया जाता है जिस से नई कोशिकाएं बनती हैं, जो स्ट्रैच मार्क्स से बचाती हैं. इस में 1 सिटिंग का खर्चा 3 हजार से 4 हजार तक आता है.

कैमिकल पील: स्ट्रैच मार्क्स और चेहरे के दागधब्बों को दूर कर चेहरे पर चमक लाने के लिए कैमिकल पील करवाना भी खासा फायदेमंद है.

रिल्यूम लेजर: यह एक लाइट बेस प्रक्रिया है. यह दागधब्बों से नजात पाने की कारगर विधि है. इस में लेजर बीम को प्रभावित त्वचा पर डाला जाता है और परत दर परत त्वचा को सुधारा जाता है. यह प्रक्रिया पूरी तरह दर्दरहित है.

इस के जरीए शरीर के किसी भी हिस्से पर होने वाले स्ट्रैच मार्क्स को हटाया जा सकता है. जैसे पेट, नितंबों, जांघों, ऊपरी बांहों, स्तनों आदि.

ट्रीटमैंट से जुड़े सवालों के जवाब :

ट्रीटमैंट में कितना समय लगता है?

15 से 30 मिनट.

स्ट्रैच मार्क्स का ट्रीटमैंट किस आधार पर किया जाता है?

स्ट्रैच मार्क्स को दूर करने का कोई भी ट्रीटमैंट इस बात पर निर्भर करता है कि स्ट्रैच मार्क्स के जो गड्ढे पड़े हुए हैं वे लूज हैं या फिर टाइट? उन का कलर क्या है? वे काफी पुराने हो चुके हैं या फिर ताजा हैं? इसी के अनुसार उन का ट्रीटमैंट किया जाता है.

इस ट्रीटमैंट में कितनी सिटिंग्स लेनी पड़ती हैं?

आमतौर पर ट्रीटमैंट में 6 से 20 सिटिंग्स तक ली जाती हैं. वैसे सिटिंग्स की संख्या स्ट्रैच मार्क्स कितने पुराने हैं, इस बात पर भी निर्भर करती है.

सिटिंग्स के बीच कितना अंतराल होना चाहिए?

सिटिंग्स 1-1 हफ्ते के अंतराल में की जाती हैं.

कितना खर्च आता है?

ट्रीटमैंट का खर्च प्रभावित एरिया पर डिपैंड करता है कि वह कितना बड़ा है. फिर भी 15 हजार से 20 हजार तक का खर्च तो आता ही है.

क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

इस ट्रीटमैंट के बाद 24 से 48 घंटों तक सनलाइट में जाने के लिए मना किया जाता है, क्योंकि इस से ट्रीट किए गए एरिया पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. सनलाइट में जाना बहुत ही जरूरी हो तो सनस्क्रीन लोशन लगा कर ही जाएं.

ट्रीटमैंट के 2 दिन तक कोई दूसरा कौस्मैटिक प्रयोग न करें.

यदि आप को डायबिटीज या हृदय रोग है या फिर आप ब्लड थिनर्स की दवा ले रही हैं, तो ट्रीटमैंट लेने से पहले डाक्टर को यह बात बता दें.

यदि आप प्रैगनैंट हैं या फिर मां बने हुए अभी 3 महीने भी नहीं हुए हैं, तो इस ट्रीटमैंट को 3 महीनों के लिए टाल दें. डाक्टर की सलाह के बाद ही यह ट्रीटमैंट लें.

ट्रीटमैंट से पहले डाक्टर आप के थायराइड और हारमोन की जांच भी करते हैं. इन का सही होना भी जरूरी है.

ट्रीटमैंट का रिजल्ट कैसा रहता है?

इस ट्रीटमैंट का रिजल्ट काफी अच्छा रहता है. ट्रीटमैंट की 2 से 4 सिटिंग्स लेने पर ही कुछ मरीजों को सकारात्मक परिणाम दिखने लगता है तो कुछ को और थोड़े समय बाद फायदा दिखने लगता है.

ट्रीटमैंट के साइड इफैक्ट्स क्या हैं?

वैसे तो इस ट्रीटमैंट के साइड इफैक्ट्स नहीं होते हैं, अगर होते भी हैं तो वे इचिंग, स्वैलिंग, रैडनैस के रूप में होते हैं, जो कुछ ही दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं.

घरेलू उपचार

  • कोका बटर में नारियल का तेल मिला कर उसे तब तक ओवन में रखें जब तक कि वह पिघल न जाए. फिर इसे अच्छी तरह से मिला कर ठंडा होने दें. ठंडे मिश्रण को छाती, हाथों, हिप्स, टमी और अन्य प्रभावित हिस्सों में लगा कर मसाज करें.
  • गरम पानी में 2 चम्मच शहद मिला कर बाथ लेने से त्वचा की नमी लौटती है. टमी पर सीधे ही शहद लगा कर नहाने के दौरान मसाज करने से भी लाभ मिलता है.
  • स्ट्रैच मार्क्स प्रिवैंशन लोशन भी प्रयोग किया जा सकता है. लोशन कब और कैसे लगाना है यह डाक्टर से अवश्य पूछ लें.
  • विटामिन ई और जैतून का तेल भी इस समस्या से नजात दिलाता है.
  • किसी भी साफ सफेद कपडे़ को गरम दूध में भिगो कर 15 मिनट टमी पर रखने से भी आराम मिलता है.
  • ऐलोवेरा को पीस कर पेस्ट बना लें. उस पेस्ट को प्रैगनैंसी के दौरान त्वचा पर लगाएं. इस से आप की स्किन पर स्ट्रैच मार्क्स नहीं उभरेंगे.
  • रोजाना संतुलित डाइट लें. इस में आप फू्रट, वैजिटेबल, फिश, लिवर औयल, बींस वगैरह शामिल करें. अगर आप की डाइट में सभी विटामिन व प्रोटीन होंगे तो आप की स्किन फ्रैश रहेगी.
  • पानी अधिक मात्रा में पीएं.
  • कैफिनेटेड पेयपदार्थों का सेवन कम कर दें. इस से त्वचा में नमी का स्तर बना रहता है.
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