फुटबौलर सैय्यद अब्दुल रहीम की जीवनी पर जिस फिल्म की अनाउंसमेंट हाल ही में हुई है, उसका टाइटल अभी तय नहीं है. फिल्म के राइटर साइविन क्वाद्रस ने खास बातचीत में इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि अभी दो-तीन नामों को लेकर चर्चा जारी है. पता किया जा रहा है कि वे टाइटल राइटर्स एसोसिएशन में पहले से रजिस्टर्ड तो नहीं करवा रखे हैं. साइविन ने साथ ही यह भी बताया है कि इसे महज सैय्यद अब्दुल रहीम की बायोपिक नहीं माना जाए. इसके जरिए टीचर और स्टूडेंट के रिश्तों को ट्रिब्यूट भी दिया जाएगा.

हैदराबादी भाषा सीखेंगे अजय देवगन

साइविन ने कहा,‘इस कहानी पर फिल्म बनाने के लिए लोगों को बोर्ड पर लाने का सिलसिला छह महीने पहले शुरू हुआ था. फिल्म के को-प्रोड्यूसर जौय ने हमें उस महान इंसान के बारे में बताया था. जिसके बाद आकाश चावला भी फिल्म को प्रोड्यूस करने बोर्ड पर आए. फिर बोनी कपूर और अब अजय देवगन आए हैं.

फिल्म में अजय देवगन हैदराबाद की एक फुटबौल टीम के कोच सैय्यद अब्दुल रहीम का रोल प्ले करेंगे. इसके लिए वे हैदराबादी लहजा सीखेंगे. रहीम साहब जब तक कोच रहे, तब तक हैदराबाद नेशनल टूर्नामेंट में कभी नहीं हारी. आज आलम यह है कि वे टौप 10 में भी नहीं हैं.’ जौय ने सैय्यद अब्दुल रहीम की बायोपिक के राइट्स उनके बेटे से लिए हैं.

साथ ही जो लोग कोच रहीम के साथ टूर्नामेंट खेलते थे, उन लोगों की जीवनी भी फिल्म में दिखाई जाएगी. वे पीके बनर्जी, चुन्नी गोस्वामी, अरुण घोष और तुलसीदास बलराम हैं. वे सब टीम के बैकबोन थे. सभी लेजेंड हैं फिर भी हम में से कम ही लोग उनके बारे में जानते हैं.

लोगों को जानकर हैरानी होगी कि तुलसीदास बलराम अपने जमाने में एशिया के पेले कहे जाते थे, लेकिन बीमारी के चलते उन्हें 28 साल में ही फुटबौल को अलविदा कहना पड़ा था. वहीं पीके बनर्जी ने अपना जीवन फुटबौल कोचिंग को समर्पित किया. उन्होंने इंडिया और ईस्ट बंगाल में मोहन बागान को कोचिंग दी थी. चुन्नी गोस्वामी ने भी अपनी सेवाएं दीं.

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