गृहशोभा विशेष

फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ में राज कुमार राव के साथ कृति को काफी पसंद किया गया. इन दिनों वे ‘यमला पगला दीवाना फिर से’ और ‘कारवां’ फिल्मों को ले कर काफी उत्साहित हैं. अभिनय की शुरुआत अपने अभिनय की शुरुआत के बारे में कृति कहती हैं, मैं दिल्ली की पंजाबन हूं. पर जब मैं 3 साल की थी तभी अपने मातापिता के साथ बैंगलुरु रहने चली गई थी.

मेरी पढ़ाई लिखाई व परवरिश बैंगलुरु में ही हुई. मैं अपनी दादी की वजह से 4 साल की उम्र से मौडलिंग करने लगी थी. जब मैं 18 वर्ष की थी, तब मेरे एक प्रोडक्ट की मौडलिंग का पोस्टर देख कर तेलुगु फिल्म ‘बोनी’ के निर्देशक ने फोन पर मुझ से फिल्म में अभिनय करने के लिए कहा. मैं ने तुरंत मना कर दिया, क्योंकि उन दिनों मैं शादी के सपने देख रही थी.

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उस वक्त मोबाइल का जमाना नहीं था, अत: उस  निर्देशक ने हमारे लैंड लाइन नंबर पर कई बार फोन किया तब मेरी मां व दादी ने एक दिन कहा कि इतने प्यार से फिल्म का औफर दे रहा है मना मत कर. एक फिल्म कर ले, फिर मत करना. मैं ने यह फिल्म की, पर फ्लौप रही. मैं भी फिल्मों को बायबाय कह अपनी पढ़ाई पूरी करने लगी. लेकिन फिल्मों के औफर आने बंद नहीं हुए. ‘‘अंतत: 1 वर्ष के अंतराल के बाद मैं पुन: फिल्में करने लगी और तब से यह सिलसिला जारी है.

अभिनेत्री बनने के बाद अपने अंदर आए बदलाव पर वे कहती हैं, ‘‘मेरी जिंदगी में सब से बड़ा बदलाव यह हुआ कि मेरे मातापिता को मुझ पर गर्व होने लगा. हम मध्यवर्गीय परिवार से हैं. मेरे अभिनेत्री बनने के बाद जब मेरे मातापिता ने पहली बार बिजनैस क्लास में हवाईयात्रा की, तो उन्हें अपनी बेटी पर गर्व हुआ. हम ने तो कभी हवाईजहाज में चढ़ने का सपना भी नहीं देखा था.’’

मेहनत को प्राथमिकता कृति लक के बजाय मेहनत को महत्त्व देती हैं, उन का मानना है कि यदि आप मेहनत नहीं करेंगे, तो आप के लक का अच्छा होने पर भी कुछ नहीं होगा. सकारात्मकता बांटेंगे, तभी आप के जीवन में भी सकारात्मकता आएगी. कृति मानती हैं कि स्टार कलाकारों के साथ फिल्में करने से कैरियर तेजी से आगे बढ़ता है. लेकिन उन की राय में अच्छी पटकथा वाली कम फिल्में करना ज्यादा फायदेमंद है. इसलिए वे अच्छे कंटैंट और अच्छे किरदार वाली फिल्में ही करना चाहती हैं.

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