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फैशन मौडल से अभिनय के क्षेत्र में आने वाली अभिनेत्री अनुप्रिया गोयनका कानपुर में जन्मीं और दिल्ली में पलीबढ़ीं. उन का शुरुआती जीवन काफी उतारचढ़ाव के बीच गुजरा, लेकिन फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ में नर्स पूर्णा की भूमिका और फिल्म ‘पद्मावत’ में रानी नागमती के किरदार ने उन की जिंदगी बदल दी.

ऐक्टिंग में आने की इच्छा के बारे में पूछे जाने पर अनुप्रिया बताती हैं, ‘‘मैं व्यवसायी परिवार से हूं और शुरुआत व्यवसाय करने से ही हुई थी, क्योंकि मैं पिता के गारमैंट के व्यवसाय में हाथ बंटा रही थी, उस दौरान मैं ने कौल सैंटर में काम किया और बाद में कार्पोरेट में भी काम करने लगी थी, लेकिन स्कूल में पढ़ने के दौरान मुझे एनएसडी के 1 महीने की वर्कशौप को अटैंड करने का मौका मिला. मुझे उसे करने में बहुत मजा आया था. उस का असर मेरे ऊपर काफी दिनों तक रहा. मेरी इच्छा थी कि मैं कभी थिएटर करूंगी, लेकिन पारिवारिक व्यवसाय की वजह से स्कूल की पढ़ाई खत्म कर मैं उस में लग गई. व्यवसाय चला नहीं, तो बंद कर कार्पोरेट में काम करने लगी, क्योंकि मुझे घर चलाना था. जब मेरी आर्थिक हालत थोड़ी सुधरी, तब मुझे अपने लिए कुछ करने की इच्छा पैदा हुई.’’

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मेहनत से सफलता

थिएटर करने के दौरान अनुप्रिया कई बार औडिशन देती रहती थीं. जौब और नाटक दोनों करना कठिन तो था पर कोई चारा नहीं था, क्योंकि पैसे की बहुत जरूरत थी ताकि परिवार का खर्च चलता रहे. ऐसे में अनुप्रिया को एक ऐड फिल्म में काम करने का औफर मिला. टीवी में वे काम करना नहीं चाहती थीं, क्योंकि उन्हें फिल्में ही करनी थीं. वे कहती हैं, ‘‘मैं मुंबई से परिचित नहीं थी. इसलिए इतनी दूर से रोज लोकल ट्रेन से आनाजाना मेरे लिए आसान न था. लेकिन परिवार की एकमात्र ब्रैड अर्नर होने की वजह से मुझे काम तो करना ही था. ऐसे में काम छोड़ कर अभिनय को ही तवज्जो देना नहीं हो पा रहा था. ‘‘यह सही नहीं है कि बिना गौड फादर के आप को काम नहीं मिलता. मुश्किल होती है पर आप में प्रतिभा है तो राह मुश्किल नहीं. आजकल सारी चीजें पारदर्शी हो चुकी हैं. आगे आने में समय जरूर लगता है, पर काम अवश्य मिलता है.’’

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डस्की स्किन होने के बावजूद भी अनुप्रिया को कभी मायूसी नहीं मिली. वे बताती हैं, ‘‘जब आप खुद से प्यार करते हैं तो इस से कुछ फर्क नहीं पड़ता. बचपन में अगर कोई मुझे ‘गोरी लग रही हो’ कहता था, तो मुझे अच्छा नहीं लगता था. वैसे इंडस्ट्री में ‘टाइपकास्ट’ होता है. पर मुझे जो भूमिका पसंद है, मैं उसे ही करती हूं. आप की रंगत कैसी भी हो, कास्टिंग डाईरैक्टर हमेशा रोल के हिसाब से ही कास्ट करता है.’’

फिल्मों से अलग भी दुनिया

मूड के हिसाब से अनुप्रिया कपड़े पहनती हैं जिस में लाल, सफेद और काले रंग के आउटफिट उन्हें बेहद पसंद हैं. मनपसंद फूड कौंटीनैंटल है. सामाजिक कार्य करने से अनुप्रिया कभी पीछे नहीं हटतीं. वे ‘डाउन अर्थ’ संस्था से जुड़ी हैं. उन के एक भाई को सैरिब्रल पल्सी बीमारी है. इसलिए वे ऐसे स्पैशल बच्चों के साथ काम करना चाहती हैं. इस के अलावा महिलाओं के लिए काम करना, खास कर ‘वूमन ट्रैफिकिंग’ पर काम करना चाहती हैं.