गृहशोभा विशेष

धारावाहिक ‘हातिम’ से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले हास्य अभिनेता किकू शारदा राजस्थान के जोधपुर के मारवाड़ी परिवार के है. उनके परिवार में कोई भी इंडस्ट्री से जुड़ा नहीं था, इसलिए उनका एक्टर बनने का सपना परिवार के लिए चौकाने वाला था, लेकिन उन्होंने परिवार को मायूस नहीं किया और अपनी एम बी ए की पढाई पूरी कर इस क्षेत्र में उतरें. धारावाहिक ‘एफ आई आर’  में कांस्टेबल ‘मुलायम सिंह गुलगुले’ और ‘कामेडी नाईट विथ कपिल’ के शो में ‘पलक’ की भूमिका निभाकर उन्होंने काफी नाम कमाया है. स्वभाव से हंसमुख और नम्र स्वभाव के किकू कौलेज के जमाने से अभिनय किया करते थे. इसके अलावा किसी की नकल उतारना, मिमिक्री करना आदि का भी शौक रखते थे. अभी वे सब टीवी की हास्य धारावाहिक ‘पार्टनर डबल हो गयी ट्रबल’ में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं. पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश.

प्र. कौमेडी का सफर कैसे शुरू हुआ?

परिवार में कोई इस क्षेत्र से नहीं था, लेकिन मुझे बचपन से किसी की नकल उतरना, उसे अलग-अलग तरीके से पेश करने में मजा आता था. फिर एक्टिंग का शौक पैदा हुआ, लेकिन परिवार वालों ने पढ़ाई पर जोर दिया, क्योंकि एक्टिंग के क्षेत्र में कुछ निश्चित नहीं होता और यह सही भी था. मेरे पिता का व्यवसाय था, मैंने सोचा अगर एक्टिंग में कुछ नहीं कर पाया, तो व्यवसाय में आ जाऊंगा. इसलिए पढाई पूरी कर मुंबई आया और पहली धारावाहिक ‘हातिम’ साल 2003 में मिली, जिसमें मेरे काम को बड़ी सराहना मिली और उसके बाद से एक के बाद एक काम मिलते गए. कौमेडी ही करूंगा, ऐसा मैंने सोचा नहीं था. मैं किसी भी एक्टिंग को एन्जाय करता हूं.

प्र. काम के लिए कितने संघर्ष करने पड़े?

संघर्ष तो था ही, क्योंकि मैं किसी फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं था. मुझे पता नहीं था कि इतनी बड़ी इंडस्ट्री में कैसे घुसना है. पहले जब अपने शहर से निकला, तो अपने दोस्त के घर 10 से 15 दिन तक रहा. इस दौरान सारे प्रोडक्शन हाउस जाकर अपनी फोटो डाली, जहां भी औडिशन के लिए बुलाया जाता, तुरंत जाकर औडिशन देता रहा. कुछ थियेटर में भी काम किया, ताकि मेरी पहचान बने.

पिता के घर में अच्छी जिंदगी जी रहा था. यहां आकर मानसिक और वित्तीय सारी समस्याओं से जूझता रहा, लेकिन हार नहीं मानी और कुछ कर दिखाना चाहता था. इस जुनून ने मुझे मुंबई रहने पर बाध्य किया और अंत में कामयाब हुआ.

प्र. इस दौरान परिवार का सहयोग किस तरह रहा?

परिवार वाले चाहते थे कि मैं जो भी काम करूं खुशी-खुशी करूं. इसलिए उन्होंने हमेशा वित्तीय रूप से सपोर्ट किया जिससे मुझे काम खोजने और करने का समय मिला.

प्र. क्या महिला का रूप धारण कर कौमेडी करना आसान होता है?

मुझे हर तरह की भूमिका पसंद है, लेकिन महिला के गेटअप में मैं अधिक पोपुलर हुआ, इसलिए वह अधिक करने को मिला. मेरी कोशिश ये रहती है कि मेरी भूमिका लड़की बनकर भी सबको रियल लगे. इसके लिए मैं पूरी मेहनत करता हूं. बाकी तो राइटर का कमाल होता है कि वह किसी भी संवाद को कैसे लिखे.

प्र. आज के तनाव भरे माहौल में हंसना कितना जरुरी है?

हंसना बहुत जरुरी है, क्योंकि आजकल ट्रेन से लेकर औफिस या घर, हर जगह तनाव का माहौल रहता है, ऐसे में दिल से हंसना बहुत जरुरी है, ताकि आपसे रोग कोसों दूर रहे. हंसी मजाक का वातावरण हर घर में किसी न किसी रूप में होना चाहिए, फिर चाहे दोस्तों के समूह में हो या परिवार के साथ. हर व्यक्ति के लिए ह्यूमर जीवन का अंग होना चाहिए.

प्र. कौमेडी की वजह से आपको जेल भी जाना पड़ा, क्या कौमेडी करते वक्त आप इस बात का ध्यान रखते है कि किसी को ठेस न पहुंचे?

वैसे तो कौमेडी के लिए पूरी स्क्रिप्ट तैयार की जाती है. जिसे लेखक, निर्माता, निर्देशक सभी अप्रूव करते हैं. मैं अपने मुंह से कुछ नहीं बोलता. ऐसे में अगर मुझे दोषी माना गया तो ठीक नहीं, लेकिन मैंने माफी भी मांगी. मैं मोटा हूं और मेरे मोटापे को लेकर कई बार कौमेडी बनायीं जाती है, इसमें कोई गलत बात नहीं है. वैसे मैं कोशिश करता हूं कि मैं कुछ ऐसा न कहूं जिससे किसी को ठेस पहुंचे.

प्र. आपकी पत्नी और बच्चे आपके इस हुनर को कितना सराहते हैं?

मेरी पत्नी और मेरे दोनों बेटे मेरे काम के सबसे बड़े आलोचक हैं. उन्हें अगर मेरी कोई परफोर्मेंस पसंद नहीं आती, तो वे तुरंत उसे सुधारने की सलाह देते हैं. इससे मुझे और अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है.

प्र. आज की फिल्मों में कौमेडियन की भूमिका बहुत कम है, क्योंकि आजकल हीरो ही सब कर लेते है, इस बारें में आपकी क्या राय है?

ये अच्छी बात है कि हीरो अधिक इंटेलिजेंट हो चुके हैं और मैं भी केवल हास्य अभिनेता ही नहीं, दूसरे सीरियस अभिनय भी करना चाहता हूं. असरानी, बमन ईरानी, परेश रावल, अक्षय कुमार सभी ने कौमेडी के साथ-साथ सीरियस भूमिका भी निभाई है. कई ऐसी फिल्म आज है, जिसमें ग्रुप में कौमेडी को सराहा गया, गोलमाल की सीरीज इसका उदहारण है. मेरी किसी से कोई प्रतियोगिता नहीं है. मैं खुश हूं कि आज के हीरो हर तरह की भूमिका निभाने की क्षमता रखते है.

प्र. आगे क्या करने की इच्छा रखते है?

मुझे अच्छी स्टोरी टेलिंग करना पसंद है. इसमें मैं निर्माता, निर्देशक बनने की इच्छा रखता हूं.

प्र. आप किस हास्य कलाकारों को देखना अधिक पसंद करते है?

मुझे ह्यूमर और सिचुएशनल कौमेडी बहुत पसंद है, जिसमें संजीव कुमार, देवेन वर्मा, महमूद, जोनी वाकर गोविंदा आदि सभी कलाकार शामिल हैं, जिन्होंने अपने कंधे पर पूरी फिल्म को लिया और वे सफल भी रहे. मैं उनसे बहुत प्रभावित हूं.