गृहशोभा विशेष

18 नवंबर, 2017 को चीन के सान्या में आयोजित ब्यूटी कौंटेस्ट में ‘मिस वर्ल्ड 2017’ का खिताब जब हरियाणा की मानुषी छिल्लर को मिला, तो उनकी खुशी की सीमा नहीं थी. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें इतना बड़ा खिताब मिलेगा. अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के बाद वे दूसरी ‘मिस वर्ल्ड’ बनी हैं.

इस प्रतियोगिता में 118 देशों की सुंदरियों ने भाग लिया. मानुषी की परफौर्मेंस को देखते हुए उन्हें ‘ब्यूटी विद पर्पज’ का पुरस्कार भी मिला. वे भारत के लिए मुकुट जीतने वाली छठी सुंदरी है. हरियाणा के रोहतक में जन्मी और दिल्ली में पली बढ़ीं मानुषी मैडिकल की छात्रा हैं.

वे बताती हैं, ‘‘मैं डाक्टर परिवार से हूं. मेरे माता पिता दिल्ली में रहते हैं और अब मैं हरियाणा में रहती हूं. वहां मैडिकल की पढ़ाई कर रही हूं. बचपन से मुझे ‘मिस इंडिया’ और डाक्टर दोनों बनने की इच्छा थी, क्योंकि मातापिता के प्रोफैशन को मैं ने बचपन से देखा है, लेकिन यह सब हकीकत में हो जाएगा पता नहीं था.

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‘‘मैं कभी कभी ‘मिस इंडिया’ के शो टीवी पर देख लेती थी. मैं उन के ग्लैमर के साथ साथ उन के अंदर की खूबसूरती को भी देखने की कोशिश करती थी. जब मिस इंडिया का खिताब मुझे मिला, तो मुझे यकीन नहीं हो रहा था. इस से मेरा हौसला बढ़ गया. मुझे लगा कि मैं इस क्षेत्र में भी कुछ कर सकती हूं.

‘‘मुझे हमेशा नया काम और चुनौतियों का सामना करना पसंद रहा है. इसीलिए मैंने पढ़ाई के साथ साथ कुचिपुड़ी नृत्य भी सीखा है. ’’ आसान न था सफर यहां तक पहुंचने में मानुषी को काफी मेहनत करनी पड़ी. इस प्रतियोगिता की तैयारी के लिए उन्हें काफी समय देना पड़ता था.

मानुषी कहती हैं, ‘‘मैडिकल के साथ साथ इसकी तैयारी मुश्किल थी. पर मैंने समय के हिसाब से तालमेल बैठाया और फिर सब हो गया. असल में ‘मिस इंडिया’ एक पर्सनैलिटी कौंटैस्ट है, जहां सुंदरता से अधिक बाकी चीजों पर ध्यान देने की जरूरत होती है. मसलन, सामान्य ज्ञान को मजबूत करना, फिटनैस को बढ़ाना होता है. ‘‘इसके अलावा बातचीत का ढंग, सब से मिलना, उनके साथ रहना, अपनी बातें शेयर करना आदि सब इंप्रूव करना होता है.

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इस प्रतियोगिता की तैयारी के दौरान मैं काफी बुद्धिमान लोगों से मिली जिन से काफी कुछ सीखने  को मिला.’’ यादगार पल मानुषी को जब मिस वर्ल्ड का ताज मिला तो उन के सारे भाव बाहर आ गए, क्योंकि उनके सपने की सबसे सुंदर शुरूआत हो चुकी थी. उन के यहां तक पहुंचने में उनके माता पिता का बहुत सहयोग रहा. उन्हें जब भी उन की जरूरत महसूस हुई वे साथ खड़े दिखें.

प्रतियोगिता के दौरान मानुषी ने कतई प्रेशर महसूस नहीं किया, क्योंकि सभी का भरोसा उन पर बहुत था. अपने अनुभव को शेयर करते हुए मानुषी कहती हैं, ‘‘यह मेरे लिए ‘वन टाइम अचीवमैंट’ है. यह प्रतियोगिता काफी कठिन होती है. हर कोई सुंदर और बुद्धिमान होता है, ऐसे में ‘मिस वर्ल्ड’ का खिताब जीतना अपनेआप में खास था.’’ मानुषी मैडिकल की पढ़ाई पूरी करने के साथ साथ महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए भी काम करना चाहती है. उनके अनुसार अगर लड़कियां पढ़ी लिखी होंगी, तो परिवार और समाज दोनों का विकास होगा.

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