अजय देवगन कि बैनर तले बनी फिल्म शिवाय एक एक्शन और थ्रिलर फिल्म है, जिसे अजय देवगन ने लिखा और निर्देशित भी किया है. फिल्म की कहानी नई नहीं है, ऐसी कई फिल्में पहले भी आ चुकी हैं, एक पिता का अपनी पुत्री से स्नेह और इमोशन उसे कहां से कहां तक ले आता है, ये बताने की कोशिश की गयी है. फिल्म का एक्शन और सिनेमेटोग्राफी अच्छी है. हुत सारे खतरनाक स्टंट और वीएसऍफ का प्रभाव फिल्म में देखने को मिला, जो अधिकतर विदेशी फिल्मों में होता है. इसके अलावा बुल्गारिया और मसूरी के बर्फीले पहाड़ों पर स्टंट भी देखने लायक था, लेकिन फिल्म में एक निर्देशक के रूप में अजय देवगन काम करने में असमर्थ रहे, फिल्म के कई दृश्य बेवजह ठूसे हुए लगे. अजय देवगन अभिनेता के रूप मे ठीक थे. कहानी इस प्रकार है.

शिवाय (अजय देवगन) एक हिमालय का पर्वतारोही है और सभी पर्यटकों को ट्रैकिंग करवाता है. ऐसे में ट्रैकिंग करते वक्त बर्फीले तूफान में घिरकर वह बुल्गारियन लड़की ओल्गा (एर्रिका कार) के नजदीक आता है. ओल्गा जब अपने देश बुल्गारिया जाने वाली होती है, तब पता चलता है कि वह मां बनने वाली है. शिवाय की जिद पर वह एक गूंगी बच्ची गौरा (अबीगैल यामेस) को जन्म देकर वापस अपने देश चली जाती है. बेटी के बड़ी होने पर मां से मिलने की जिद करने पर शिवाय उसे लेकर बुल्गारिया जाता है, जहां उसकी बेटी किडनैप हो जाती है. उसे कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. बेटी की खोज में वहां के दूतावास में काम करने वाली सायशा सहगल उसे मदद करती है. इसी तरह कहानी पिता और बेटी के इर्दगिर्द घूमती हुई अंजाम तक पहुंचती है.

फिल्म में गिरीश कर्नाड पिता के रूप में जचें. फिल्म की स्क्रिप्ट जरुरत से अधिक लम्बी थी, इसे कम करने पर फिल्म शायद बेहतर होती. सायसा को बहुत कुछ करने का मौका नहीं मिला, जितना मिला उतना ठीक था. गाने की बात करें तो वह ठीकठाक थे. मिथुन का टाइटल सोंग ‘बोलो हर हर’ अच्छा था. एक्शन फिल्मों को पसंद करने वाले इसे एक बार देख सकते हैं. इसे टू स्टार दिया जा सकता है.