गृहशोभा विशेष

आमिर खान की फिल्म ‘तारे जमीं पर’ का नटखट और क्यूट सा लड़का ईशान अवस्थी आज भी याद होगा सब को. अब वह मासूम लड़का 22 साल का जवान हो चुका है. लेकिन उस के चेहरे पर मासूमियत अब भी है.

ईशान का किरदार निभाकर दर्शील ने काफी लोगों के दिलों को जीता और कई अवार्ड भी जीते थे. दर्शील का इनोसेंट और क्यूट फेस देख कर हर कोई उस छोटे से ईशान का फैन हो गया था.

महज 12 साल की उम्र में बैस्ट ऐक्टर का फिल्मफेयर क्रिटिक अवार्ड अपने नाम करा लेने वाले दर्शील ने कई फिल्मों में अपनी मासूमियत भरे अभिनय से सब का दिल जीता है.

किशोर के रूप में कुछ महत्त्वपूर्ण भूमिकाएं निभाने के बाद दर्शील अब फिल्मों में लीड रोल करने के लिए तैयार हैं. वे टीवी ऐक्ट्रैस श्वेता तिवारी की बेटी पलक के साथ जल्दी ही फिल्म ‘क्विकी’ में नजर आएंगे.

जब उन से कहा गया कि वे बड़े हो गए हैं, यह यकीन करना मुश्किल है तो हंसते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि वे अभी भी ‘तारे जमीं पर’ के बच्चे के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन शुक्र है कि यादें अब धुंधली हो चुकी हैं. पिछले दिनों दिल्ली में एक इवेंट में आए दर्शील ने कुछ पुरानी यादों और अपमे आगे की योजनाओं को हम से साझा किया पेश हैं चुनिंदा अंश :

ऐक्टिंग में करियर बनाने की कब सोची?

‘तारे जमीं पर’ फिल्म करने के बाद मैं ने 3 फिल्में कीं जिस में मेरी भूमिकाएं चाइल्ड ऐक्टर की ही थीं. उस समय तक मैं ने तय नहीं किया था कि मुझे ऐक्टिंग में ही करियर बनाना है. जब पापा ने कहा कि पढ़ाई पर ध्यान दो तो मैं ने ऐक्टिंग से बिलकुल ही छुट्टी ले ली और 12वीं की पढाई कंप्लीट की. लेकिन पढ़ाई के दौरान ही मुझे थिएटर करने का शौक लग गया था. स्कूल के बाद जब कालेज गया तो वहां भी कई थिएटर किए लेकिन वे सब मैं ने शौकिया किए थे. जब 30-40 प्ले कर चुका और लोगों से अपने काम का अच्छा फीडबैक मिला तो मुझे लगा कि अब मैं ऐक्टिंग कर सकता हूं और इसी में मुझे करियर बनाना है.

जब मुझे नैशनल सैंटर औफ परफौर्मिंग आर्ट्स के नाटक में ऐक्टिंग करने का मौका मिला तब मुझे यह अंदाजा नहीं था कि यह बहुत मुश्किल होगा, क्योंकि थिएटर के मंजे हुए कलाकारों के साथ मुझे ऐक्टिंग करनी थी. घबराहट थी लेकिन कौन्फिडैंस लैवल हाई था, इसलिए बडे़ अच्छे से किया. उस के बाद निर्देशक अभिषेक पटनायक ने मुझे दिलीप व अनंत महादेवन जैसे दिग्गजों के साथ नाटक ‘कैन आई हैल्प यू’ करने का प्रस्ताव दिया जो मेरे ऐक्टिंग करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ.

ऐसा क्यों है कि जो चाइल्ड ऐक्टर बचपन में हिट होता है बड़ा होते ही फ्लौप होने लगता है?

आप का सवाल बिलकुल सही है, मास्टर राजू से ले कर जुगल हंसराज जैसे उदाहरण सामने हैं. लेकिन मेरा मानना यह है कि जो हम चाइल्ड ऐक्टर के रूप में सिनेमा करते हैं वह अलग है और जब बड़े हो कर हीरो वाला रोल करते हैं वह सिनेमा बिलकुल अलग है. कभी यह नहीं मानना चाहिए कि मुझे तो ऐक्टिंग का बचपन से अनुभव है. जो ऐसा सोचता है वह आगे काम नहीं कर पाता और फ्लौप हो जाता है. दरअसल, उस के अंदर ईगो आ जाता है और अभिनय में ईगो नहीं होना चाहिए. हर बड़े से बड़ा कलाकार हर समय सीखता रहता है.

मेरा मानना है कि जो हमेशा अपनी ऐक्टिंग पर ध्यान देगा मेहनत करेगा, वह कभी भी असफल नहीं होगा. आज फिल्मों की टैक्नोलौजी और कंटैंट हर दिन अपडेट हो रहे हैं, ऐसे में अगर आप पुराने ढर्रे पर रह कर फिल्मों में काम करेंगे तो सर्वाइव करना मुश्किल होगा. आज कुणाल खेमू को देखिए, वे अच्छे चाइल्ड ऐक्टर भी थे और जब उन की पहली फिल्म ‘कलियुग’ आई, वह भी हिट थी. मैं ने भी ऐक्टिंग के लिए कोर्स किया है, थिएटर करता रहता हूं जिस से सीखता रहूं और आज भी पूरी ईमानदारी से काम करने की कोशिश करता हूं.

पहली फिल्म कैसे मिली?

जब 2006 में आमिर खान और अमोल गुप्ते ‘तारे जमीं पर’ फिल्म के लीड रोल के लिए 10-12 साल के लड़के की तलाश में औडिशन ले रहे थे उस समय मैं शामक डावर के डांसिंग स्कूल में डांस सीख रहा था. कई लोगों के औडिशन के बाद भी जब उन्हें वह लड़का न मिला तो वे हमारे स्कूल में आए और मुझे देखते ही औडिशन देने को बोला. उस समय तो में जानता भी नहीं था कि ऐक्टिंग किस चिडि़या का नाम है. मुझे तो सिर्फ डांस करना पसंद था.

जब औडिशन में मेरा सिलैक्शन हो गया तब मम्मीपापा ने भी ऐक्टिंग के लिए ग्रीनलाइन दे दी. लेकिन एक औटिज्म पीडि़त बच्चे का रोल निभाना काफी कठिन था पर आमिर खान से ले कर पूरी टीम ने मेरी हैल्प की और हर शौट को बड़े ही अच्छे ढंग से समझाया.

शूटिंग पर सभी लोगों के साथ मैं खूब मस्ती किया करता था. जब फिल्म आई और हिट हुई, उस के बाद तो मैं स्कूल का स्टार बन गया था. सभी लड़के मेरे आगेपीछे घूमा करते थे. वे दिन बहुत अच्छे थे.

ईशान से दर्शील किस तरह अलग है?

जब मुझे ‘तारे जमीं पर’ की स्क्रिप्ट सुनाई गई तब लगा कि ईशान की जगह मेरी कहानी बताई जा रही हो, मुझे भी ईशान की तरह सारे अल्फाबेट और नंबर घूमते नजर आते थे, अपने मन की करने में मजा आता था, लेकिन मैं स्कूल कभी बंक नहीं करता था और पेरैंट्स की बात आज तक मानता हूं.

आने वाली फिल्म ‘क्विकी’ किस तरह की फिल्म है?

यह एक टीनएज कौमेडी फिल्म है. इस में टीनएज कालेज लाइफ को बड़े स्वाभाविक ढंग से फिल्माया गया है. जब यह फिल्म मैं कर रहा था तो मुझे लग रहा था कि इस की कहानी तो मेरे कालेज लाइफ की ही है. इस फिल्म में रोमांस, कालेजगोइंग लाइफस्टाइल, कौमेडी का तड़का देखने को मिलेगा. फिल्म का निर्देशन प्रदीप अल्तुरी कर रहे हैं, जबकि टोनी डिसूजा, अमूल विकास मोहन और नितिन उपाध्याय इस फिल्म को मिल कर प्रोड्यूस कर रहे हैं.

पलक के साथ कैसा अनुभव रहा? 

पलक के तो खून में ऐक्टिंग है. वह काम के प्रति समर्पित और स्ट्रौंग गर्ल है. हम लोग जब शूटिंग कर रहे थे तो हम में से सिर्फ वही ऐसी थी जो टाइम की पंचुअल और हर शौट को गंभीरता से समझती थी. उस की मेरे अलावा यूनिट के सभी लोगों से अच्छी ट्यूनिंग थी. उस ने कभी भी यह नहीं शो किया कि उस की मम्मी टीवी की बड़ी कलाकार हैं.

आप के काम का चुनाव आप ही करते हैं या पेरैंट्स ?

जब भी कोई नया शो या फिल्म का औफर मेरे लिए आता है तो मेरे पेरैंट्स से ही लोग संपर्क करते हैं. मम्मीपापा ने कभी भी काम करने के लिए मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं डाला. वे आज भी पूछते हैं कि तेरा मन है इसे करने का, अगर नहीं, तो वे मना कर देते हैं.

‘तारे जमीं पर’ फिल्म के बाद मैं ने जितनी भी फिल्में की हैं, अलगअलग जौनर की फिल्में की हैं. ‘बमबमबोले’ में भाईबहन की कहानी थी. इस के बाद ‘जोकोमौन’ एक सुपरहीरो की कहानी थी. उस के बाद इंटरनैशनल सिनेमा करने का मौका भी दीपा मेहता की फिल्म ‘मिड नाइट चिल्ड्रैन’ से मिला जो सलमान रुश्दी के उपन्यास पर बनाई गई थी. जिस फिल्म को करने का औफर आता है, पहले मैं उस का कंटैंट देखता हूं क्योंकि मुझे सिनेमा सिर्फ ऐक्टिंग के लिए करना है.

अगर कभी मौका मिला तो किस के साथ काम करना चाहेंगे?

इस उम्र में एक बार आमिर खान के साथ जरूर काम करना है. सच बताऊं तो मैं उन्हें अपना मैंटर मानता हूं.

इस समय क्या कर रहे हैं?

अभी तो सिर्फ कमर्शियल थिएटर कर रहा हूं. इस समय में 2 कौमेडी इंगलिश प्ले कर रहा हूं जिन का जबरदस्त रिस्पौंस मिल रहा है. हां, अगर बौलीवुड में कोई हैरी पौटर पर फिल्म बनाता है तो हैरी के किरदार के लिए मैं आज से हां कहता हूं. हैरी पौटर की सभी फिल्मों का मैं फैन हूं. उस जादुई दुनिया का रोमांच मुझे बचपन से आकर्षित करता रहा है. मैं ने सुपरहीरो वाली वाल्ट डिजनी की फिल्म ‘जोकोमौन’ की थी. एक बार रितिक रोशन के साथ भी जरूर काम करना चाहूंगा.

फिल्मों में काम करने से कहीं बचपन तो प्रभावित नहीं हुआ?

जब मुझे फिल्मों के औफर मिल रहे थे तो उस समय भी मेरे ऊपर काम का कोई दबाव नहीं था. मेरे पेरैंट्स ने कभी भी किसी भी असाइनमैंट को मेरी सहमति के बगैर साइन नहीं किया है. अगर ऐसा न होता तो मैं 4-5 साल का लंबा ब्रैक नहीं लेता.

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