अभिनय करियर की शुरुआत के साथ ही राज कुमार राव निरंतर कुछ अलग तरह की फिल्मों में प्रयेागात्मक किरदार निभाते हुए नजर आ रहे हैं. इन दिनों वह फिल्म ‘‘न्यूटन’’ को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें राज कुमार राव ने शीर्ष भूमिका निभायी है. 22 सितंबर को प्रदर्शित होने वाली अमित मसूरकर निर्देशित फिल्म ‘‘न्यूटन’’ में दिखाया गया है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों, खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों में चुनाव करना कितना पेचीदा है. पर सुरक्षा बलों की उदासीनता के बावजूद न्यूटन निश्पक्ष चुनाव कराने की पूरी कोशिश करता है. न्यूटन सिस्टम में रहकर चीजों को बदलने के लिए प्रयासरत हैं.

इस फिल्म की चर्चा चलने पर खुद राज कुमार राव कहते हैं, ‘‘फिल्म ‘न्यूटन’ में दुनिया की व्यवहारिकता और सनकवाद के खिलाफ आदर्शवादी युवाओं की दुर्दशा पर प्रकाश डाला गया है. भारतीय संविधान के प्रस्तावना और  हमारे समय की वास्तविकता के साथ डार्क कामेडी वाली फिल्म है. इसमें चुनाव प्रक्रिया के साथ ही वोट देने की बात की गयी है. लोकतांत्रिक प्रकिया में इंसान का सबसे मजबूत हथियार वोट है. वोट देकर हम तय कर सकते हैं कि हमें किस तरह का देश चाहिए. यानी कि कहीं न कहीं राजनीतिक प्रभाव की भी बात की गयी है.’’

जब हमने राज कुमार से पूछा कि वह राजनीति से कितना प्रभावित होते हैं तो राज कुमार राव ने कहा, ‘‘मेरी राय में राजनीति से हर इंसान प्रभावित होता है. हम सभी परोक्ष व अपरोक्ष रूप से राजनीति से जुड़े हुए हैं. हमारी जिंदगी में तमाम बदलाव सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णय के कारण भी आते हैं. इसलिए भी लोग इस फिल्म के साथ जुड़ेंगे क्योंकि हम लोकतात्रिंक देश में रहते हैं जिसमें चुनाव तथा वोट अपनी अहमियत रखता है. यह संदेश हमारी फिल्म बड़े सहज तरीके से लोगों तक पहुंचाएगी. यह फिल्म उपदेश या ज्ञान देने वाली फिल्म नहीं है. यह एक सुंदर मनोरंजक कहानी है. यदि आप कोई सीख लेते हैं, तो ठीक हैं, नहीं, तो आप कहानी का मजा लीजिए.’’

वह आगे कहते हैं, ‘‘देखिए, राजनीति ने हमें हमेशा अच्छे या बुरे तरीके से प्रभावित किया है. आज कल जो हालात चल रहे हैं, वह बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करते हैं. अब राम रहीम वाला जो मसला है, कई लोग मर रहे हैं, यह बहुत दुःखद है. मैं खुद गुड़गांव से हूं. हमारे हरियाणा में ही राम रहीम ने डेरा बनाया हुआ है. वहां यह सब होता था, तकलीफ होती है पर हम इस उम्मीद के साथ जीते हैं कि सुनहरा कल आएगा.’’

क्या हम सभी सिर्फ सुनहरे कल की आस में जीते हैं? हमारे इस सवाल पर राज कुमार राव ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है. हम सभी अपनी अपनी क्षमता के अनुरूप काम करते हैं. हम कलाकार हैं, तो हम अपनी फिल्मों के माध्यम से कुछ बात कहने का प्रयास करते हैं. जब भी कुछ गलत हो रहा होता है, तो मैं कहने से हिचकता नही हूं. पर यदि हमारे पास बदलाव लाने की अथौरिटी है, तो हम वह भी कर सकते हैं.’’

राम रहीम की चर्चा चलने पर राज कुमार राव ने कहा, ‘‘मुझे तो यह अंध भक्ति लगती है. इसलिए राम रहीम के भक्तों को बुरा लगा. इस देश का नागरिक होने के नाते मैं अदालत के निर्णय का सम्मान करता हूं. पिछले दस दिनों में अदालत ने जिस तरह से निर्णय लिए हैं, उसके लिए हमें उसे सलाम करते हैं. यह खुशी की बात है कि हमारी न्याय प्रणाली ताकतवर है.’’

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