रॉ एजेंट्स और उनकी ईमानदारी को नजरअंदाज करती देश की सिस्टम पर बनी फिल्म ‘फोर्स टू’ एक एक्शन और थ्रिलर फिल्म है. इसमें एक ईमानदार रॉ एजेंट का विदेश में पकड़े जाने पर उन्हें देशद्रोही बताकर उन्हें मरने दिया जाना, परिवार का बिखरना, बेटे का अपराधी बनना आदि सभी घटनाओं को दिखाने की कोशिश की गयी है.

फिल्म में निर्देशक अभिनय देव ने देश के नेतागण और उनकी सिस्टम को कुछ हद तक ठीक दिखाया है, जिसका सामना हमारे देश के स्पाई और रॉ एजेंट्स करते हैं. आज भी ऐसे कई परिवार हमारे देश में है जो इस प्रकार के हालात से गुजर रहे हैं.

फिल्म में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई है. जॉन अब्राहम अपने जबरदस्त एक्शन में खूब जंचे, जबकि काफी दिनों बाद जिनेलिया देशमुख का जॉन की स्वर्गवासी पत्नी की भूमिका निभाना और बार-बार जॉन की याद में आना और उसके काम को शाबाशी देना अच्छा लगा. फिल्म में सबसे अधिक विलेन के रूप में  ताहिर राज भसीन ने फिल्म को अपनी दमदार अदाकारी से खूब बांधे रखा. फिल्म की कहानी इस प्रकार है.

ए.सी.पी. यशवर्धन (जॉन अब्राहम) को चीन में लगातार रॉ एजेंट्स के मर्डर के सिलसिले में एक मिशन पर चीन भेजा जाता है. जिसमें साथ देती है इंडिया की रॉ ऑफिसर कमलजीत कौर यानि के.के. (सोनाक्षी सिन्हा). दोनों चीन, बुडापेस्ट आदि कई जगहों पर पता लगाना चाहते है कि रॉ एजेंट्स के मर्डरर आखिर कौन है, काफी मुश्किलों के बाद उन्हें पता लगता है कि शिव (ताहिर राज भसीन) इन सभी मर्डर का जिम्मेदार है. उसे पकड़ कर भी वे उसे भारत लाने में असमर्थ रहते है, क्योंकि वह उनके हाथ से चकमा देकर निकल जाता है. फिर वे दोनों उसे पकड़ने और मर्डर की वजह जानने के लिए जुट जाते हैं, ऐसी ही कई घटनाओं के बाद कहानी अंजाम तक पहुंचती है.

फिल्म का पहला भाग काफी अच्छा था. इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार धीमी और जरुरत से अधिक खीचीं गयी. एक्शन सीन में कैमरे का बार-बार मूवमेंट आंखों के लिए परेशानी का सबब बन रहा थी. फिल्म में प्रेम प्रसंग न के बराबर था, क्योंकि यह एक्शन फिल्म है. लेकिन गाना ‘कोई इशारा…’ जॉन और सोनाक्षी के मनोभाव को दिखाने के लिए काफी था. एक्शन फिल्म को पसंद करने वाले दर्शक इसे देख सकते है.

इसे थ्री स्टार दिया जा सकता है.