साल 2013 में रिलीज़ हुई कोरियन फिल्म ‘मोनटेज’ पर आधारित फिल्म ‘Te3n’ एक थ्रिलर और इमोशनल फिल्म है, जिसे पहली बार बड़ी फिल्म के लिए निर्देशक बने रिभु दासगुप्ता ने काफी मेहनत से बनाया है. फिल्म की पटकथा की पकड़ को मजबूत बनाये रखने के लिए उन्होंने काफी कोशिश की है, ताकि दर्शक की उत्सुकता अंत तक बनी रहे, हालांकि वे इसमें काफी हद तक सफल भी रहे, पर बीच-बीच में फिल्म की रफ़्तार थोड़ी धीमी दिखी.

अमिताभ बच्चन ने एक वयस्क और टूटे हुए दादा की भूमिका को बहुत ही संजीदगी से निभाया है कि कैसे एक मर्मांहत दादा अपनी पोती के किड्नैपर को सजा दिलाने की कोशिश करता है. उसमें नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की भूमिका भी देखने लायक रही. रिभु दासगुप्ता कोलकाता के हैं और उन्होंने वहां की हर लोकेशन का भरपूर उपयोग किया है.

फिल्म की कहानी इस प्रकार है, जो फ़्लैश बैक से होती हुई आगे बढती है. जॉन रॉय (अमिताभ बच्चन) पिछले 8 सालों से रोज पुलिस स्टेशन आते है. उनकी पत्नी नैन्सी (पद्मावती रॉय) व्हील चेयर पर बैठीउनकी इस हरकत से परेशान होती रहती है. जॉन बिनी किसी बात की परवाह किये अपना काम करता है वह अपनी पत्नी को समझाता है कि मेरी बेटी नहीं रही, पोती की जिम्मेदारी भी हमने ठीक से नहीं निभाई. इसलिए अपराधी को पकड़ कर ही वह अपनी पोती को न्याय दिला सकते हैं.

इस काम में वह मार्टिन (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) की सहायता चाहते हैं, लेकिन नवाज़ुद्दीन जो पहले पुलिस में ही काम करता था, पर एंजिला रॉय को न बचा पाने और फिरौती लेने वाले को न पकड़ पाने की वजह से अपनी नौकरी खोकर पादरी बन जाता है. वह जॉन को इसे भूल जाने की सलाह देता है. उसी दौरान एक और किडनैप उसी तरह से हो जाता है जिसको पकड़ने का जिम्मा सरिता (विद्या बालन) को दिया जाता है. सरिता अपनी खोज जारी रखती है और इधर जॉन अपने हिसाब से अपराधी तक पहुंचता है जो मनोहर (सव्यसांची चक्रवर्ती) होता है. वैसी ही किडनैप जो आज से 8 साल पहले हुई थी, जानकर सरिता, मार्टिन की मदद चाहती है. ऐसे ही ट्विस्ट के साथ कहानी अंजाम तक पहुचती है.

हालांकि यह एक संवेदनशील और थ्रिलर फिल्म है, इसलिए इसमें अमिताभ बच्चन ने अपनी कला का पूरी तरह से प्रयोग किया है, जिसमें बराबर का साथ दिया है नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने. विद्या बालन और अधिक कर सकती थी, जिसकी कमी दिखी. इसके अलावा तकनीक का प्रयोग इस फिल्म में खास नहीं की गई, जो किया जा सकता था. इतना सही है कि फिल्म के कुछ संवाद वाह-वाही  लूट सकते हैं. गाने कुछ ख़ास नहीं हैं, दृश्य के हिसाब से ठीक हें. इसे टू एंड हाफ स्टार दिया जा सकता है.