गृहशोभा विशेष

गैर फिल्मी परिवार से आकर बॉलीवुड में अपनी अलग जगह बनाने के साथ साथ तीनों खान कलाकारों के साथ अभिनय करते हुए हर फिल्म में इन खान कलाकारों से अलग पहचान बना लेने वाली अनुष्का शर्मा ने सबसे कम उम्र में अभिनय के साथ ही फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा.

पहली फिल्म ‘‘एन एच 10’’ को मिली अपार सफलता के बाद वह अब बतौर निर्माता दूसरी फिल्म ‘‘फिलौरी’’ लेकर आयी हैं. जिसमें उन्होंने सूरज शर्मा, दिलजीत दोशांज व मेहरीन पीरजादा के संग अभिनय किया है. तो वहीं शाहरुख खान के साथ तीसरी फिल्म ‘द रिंग’ कर रही हैं, जिसके निर्देशक इम्जिताज अली हैं. गत वर्ष उन्होंने ‘सुल्तान’ तथा ‘ए दिल है मुश्किल’ फिल्मों में अपनी अच्छी उपस्थिति दर्ज करायी है.

गत वर्ष आपकी फिल्मों ने बाक्स आफिस पर जबरदस्त कमाई की थी. जिसका फायदा अब आपकी फिल्म ‘‘फिलौरी’’ को मिलेगा?

इसमें कोई शक नहीं है. 2016 में मेरी फिल्म रिलीज हुई, उसके बाद फिल्मों को जिस तरह से लोगों ने पसंद किया, जिस तरह से मेरे काम को सराहा, उससे तो यही लगता है कि लोगों ने मुझे पसंद किया. 2016 में मेरी दोनों फिल्में अलग तरह की रहीं. दोनों में मैंने बहुत अलग तरह के किरदार निभाए. मुझे उन फिल्मों के लिए पुरस्कार भी मिले. पर 2017 में फिल्म के प्रदर्शन से पहले मैं किसी भी फिल्म को लेकर अपनी तरफ से कुछ कहना नहीं चाहती. 24 मार्च को मेरी पहली फिल्म ‘फिलौरी’ प्रदर्शित होगी. उसके बाद इम्तियाज अली वाली फिल्म भी इसी साल प्रदर्शित होगी.

फिल्म ‘‘फिलौरी’’ क्या है?

यह एक प्रेम कहानी है. पर फिल्म में मांगलिक दोश के चलते पेड़ से शादी और भूत की प्रेम कहानी के जुड़ने से फिल्म अनूठी हो गयी. हमने अपनी इस फिल्म के लिए एक ऐसा किरदार रचा, जो कि अब तक किसी भी फिल्म में नहीं रचा गया. यह भूत ऐसा है, जो कि लोगों को डराता नहीं है. हमने काफी वीएफएक्स और स्पेशल इफेक्ट्स का प्रयोग किया है. इस फिल्म में हमने बहुत कुछ नया जोड़ा है. हम लोगों को ‘दृश्य श्राव्य’ माध्यम में कुछ नया अनुभव देना चाहते हैं. 

फिल्म ‘‘फिलौरी’’ के अपने किरदार पर रोशनी डालना चाहेंगी?

मैं आज की तारीख में अपने किरदार को लेकर बहुत कुछ बता नहीं सकती. क्योंकि कहीं न कहीं उसमें एक सस्पेंस भी है.

फिल्म के ट्रेलर के बाद किस तरह की प्रतिक्रिया मिली?

देखिए, जब आप कुछ अलग काम करने जाते हैं, तो आपके मन में शक होता है कि क्या लोगों को पसंद आएगा? कई बार आपने जो अलग काम किया, वह लोगों को पसंद नहीं भी आ सकता है. ट्रेलर आने के बाद हमारा यह शक दूर हो गया. क्योंकि लोगो ने बड़ी तारीफ की. हम तो बहुत अलग ढंग से सोचते हैं, पर दर्शक का नजरिया अलग हो सकता है. ट्रेलर देखकर ज्यादातर लोगों ने प्रशंसा ही की है.

फिल्म ‘‘फिलौरी’’ में भूत के अलावा लड़के के मांगलिक होने का मसला भी है. आप इन दोनों चीजों पर कितना यकीन करती हैं?

देखिए, भूत होते हैं या नहीं, किसको पता? मैंने निजी जिंदगी में ऐसा कोई अनुभव नहीं किया है, हो सकता है भूत होते हों. मैं इस बात से इंकार भी नहीं कर सकती. जहां तक मांगलिक का मसला है, तो यह एक सामाजिक सोच है, जिस पर हमने बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं दी है. मांगलिक के मसले पर हमारी फिल्म अपनी तरफ से कोई कमेंट नहीं करती है. यह सब हर इंसान के अपने विष्वास की बात है. यदि आप किसी बात पर यकीन नहीं करते हैं, तो उससे आपको कोई फर्क नहीं पड़ता.

सिनेमा में आ रहे बदलाव का आप पर असर?

सिनेमा में आ रहे बदलाव के चलते मैं फिल्मों में नारियों का सही प्रतिनिधित्व कर पा रही हूं. मैंने हर फिल्म में नारी किरदारों को सही परिप्रेक्ष्य व प्रगतिशील नारी के किरदार ही निभाती आ रही हूं.

आप मानती हैं कि बॉलीवुड फिल्मों में नारियों का सही प्रतिनिधित्व हो रहा है?

मैं तो सिर्फ अपनी बात कर सकती हूं. मैंने अपनी तरफ से हर फिल्म में नारी का सही प्रतिनिधित्व किया है. देखिए, हम वही काम कर सकते हैं, जो मेरे हाथ में है. हम अपना निर्णय दूसरों पर थोप नहीं सकते हैं. आप शायद यकीन ना करें, पर सच यह है कि मैंने कई बड़ी बड़ी फिल्मों को महज इसलिए ठुकाराया है, कि उनमें मेरे किरदार में करने के लिए कुछ नहीं था और ना ही वह नारी का सही प्रतिनिधित्व कर रहे थे. पर दूसरी अभिनेत्रियों ने उन फिल्मों में वही किरदार निभाए. आज मैं यह कह सकती हूं कि मैंने अपनी कोशिश से, अपने प्रयास से,कुछ अलग करने की कोशिश कर रही हूं.

शाहरुख खान के साथ तीन फिल्में करने के बाद खुद में क्या बदलाव महसूस करती हैं?

इस सवाल का जवाब देना बड़ा मुश्किल है. क्योंकि जो बदलाव होता है, वह जल्द नजर नहीं आता. जिस समय सारी चीजें हो रही होती हैं, जिस समय हम काम कर रहे होते हैं, उस वक्त यह सब चीजें समझ नहीं आती. मगर मेरे साथ यह होता रहा है कि हर फिल्म के बाद मुझे सकून मिला. हर फिल्म के बाद मेरी समझ बढ़ी है. जब हम शाहरूख खान जैसे कलाकार के साथ काम करते हैं, हमें उनसे भी मदद मिलती है.

ट्वीटर पर आप बहुत ज्यादा व्यस्त हैं. ट्वीटर का बॉक्स ऑफिस पर कितना असर पड़ता है?

देखिए, ट्वीटर भी प्रचार का एक माध्यम है. हम चाहते हैं कि हमारी फिल्म के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी लोगों के पास पहुंचे. लोगों में फिल्म को लेकर जागरूकता आए. क्योंकि हम तो हर माध्यम का उपयोग कर अपनी फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचांना चाहते हैं. आज की तारीख में सोशल मीडिया बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म है. सोशल मीडिया पर मेरे करीब एक करोड़ फॉलोवर हैं. तो यही फैन आधार हैं? जिस तरह से अखबार या मैगजीन में कुछ छपने से फिल्म का प्रचार होता है, उसी तरह से ट्वीटर से भी फिल्म का प्रचार होता है. तभी तो हमने ट्वीटर को बहुत अलग अलग तरीके से उपयोग करने की कोशिश की है. जिससे हमारी फिल्म लोगों के जेहन में रहे. बॉक्स ऑफिस पर असर है या नहीं, इस पर नहीं सोचा.

मीडिया को लेकर भी आपकी कुछ नाराजगी है?

बिलकुल नहीं है. वास्तव में मैंने एक खास घटनाक्रम पर वह बात कही थी. वह भी किसी खास मीडिया को लेकर. अन्यथा मुझे आज तक कभी भी मीडिया को लेकर नाराजगी नहीं हुई. मैंने साफ कहा था कि जिन्होंने भी यह स्टोरी छापी है, उनकी बात कर रही हूं. मैं कभी भी पूरे मीडिया को कटघरे में खड़ा नही करती.