सहायक निर्देशक से करियर की शुरुआत करने वाले वरुण धवन ने फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर से अभिनय की शुरुआत की. वे एक अच्छे डांसर हैं और गोविंदा को अपना आदर्श मानते हैं. वे हर फिल्म में अपना सौ प्रतिशत कमिटमेंट देते हैं और चाहते हैं कि फिल्म सफल हो. लेकिन अगर फिल्म नहीं चलती तो उन्हें दुःख भी होता है.

उन्हें क्लब और पार्टी में अधिक जाना पसंद नहीं. वे स्कूल और कॉलेज के दोस्तों के साथ घर पर ही अधिकतर पार्टी करते हैं, जहां उन्हें बहुत सुकून मिलता है. यहां तक पहुंचने में वे अपने मां को श्रेय देते हैं जिन्होंने हमेशा उनको काम की बारीकियां समझायी है. स्वभाव से बिंदास और हंसमुख वरुण से बात करना बेहद रोचक था पेश है अंश.

आप सच्चे दोस्त किसे मानते हैं? क्या वे आपके आलोचक हैं?

मुझे हंसी आती है कि मेरा एक दोस्त मुझे बद्री कहकर ही बुलाता था और आज मैंने फिल्म भी उसी  नाम से किया है. वे सब मेरे अच्छे क्रिटिक हैं. मेरे तीन दोस्त काफी अच्छे हैं. अंकित, कविश और अमन ये मेरे बचपन के दोस्त हैं. किसी भी फिल्म के सेट पर जाने से पहले मैं उनसे थोड़ी बात कर लेता हूं. सीन्स की चर्चा भी कर लेता हूं. वे गलत और सही बताते हैं. मेरे कजिन भाई आदित्य पूरी ने भी मेरी फिल्म स्टूडेंट ऑफ द इयर को देखकर कहा था कि मेरा वॉइस वीक है. ’हम्टी शर्मा की दुल्हनियां’ में मैंने अपनी आवाज पर काफी मेहनत की थी. अभी भी फिल्म ‘बद्रीनाथ की दुल्हनियां’ में किया है. मैंने अपने ‘वोकल कॉड’ को ठीक करने के लिए कई तकनीक सीखे हैं.

फिल्म में मनोरंजन के साथ मेसेज भी हो इस पर आप कितना ध्यान देते है?

ये जरुरी नहीं कि हमेशा ही मेसेज हो, ये बड़े और स्टैब्लिश कलाकार के साथ होता है कि वे डायरेक्ट मेसेज देकर फिल्में बनाते हैं, जिसमें अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार हैं, लेकिन मैं चाहता हूं कि कोई मेसेज मेरे फिल्म में भी हो. ‘बद्रीनाथ की दुल्हनियां’ में महिला और पुरुष के समान अधिकार को मनोरंजक रूप में दिखाया गया है. मेरी सोच फिल्म में कैसे बदली, एक पारंपरिक समाज और परिवार से निकलकर कैसे एक व्यक्ति अलग सोच सकता है. ये देखने लायक है.

क्या रियल लाइफ में आपने कभी ऐसे हालात देखे हैं जहां महिलाओं का अनादर हो रहा हो? इस तरह की घटनाओं के जिम्मेदार आप किसे मानते हैं, परिवार समाज या धर्म?

मैंने देखा है कि शादीशुदा कपल अगर एक दूसरे को इज्जत ना करें, तो उनका रिश्ता टूट जाता है. पहले ऐसा नहीं था, सामंजस्य न बैठा पाने की परिस्थिति में भी पत्नी, पति को स्वीकार कर लेती थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर वह उसे छोड़ देगी, तो उसके खुद के बच्चों का क्या होगा? वह कहां रहेगी? आजकल महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और वह पति के बिना अकेले रह सकती हैं. आज  परिवार में महिला को इज्जत देना बहुत जरुरी है.

मैं समाज को ही सबसे अधिक जिम्मेदार मानता हूं. अभी थोड़ा परिवर्तन हुआ है, पर वह बहुत कम है. मुझे पश्चिम की ये बातें अच्छी लगती है कि ‘डोमेस्टिक वॉयलेंस’ होने पर वे तुरंत पुलिस को बुला लेते हैं. मुझे याद आता है कि 12 वर्ष की उम्र में मेरे बिल्डिंग के एक फ्लैट में पति पत्नी के झगड़े में मैंने पुलिस को बुला लिया था.

बचपन से हमेशा आपको कैसी सीख मिली है?

मुझे बचपन से महिलाओं को आदर करना सिखाया गया है. मेरी मां की 6 बहने हैं. वहां मैं हमेशा जाता था. कजिन बहनों के बीच में मैं बड़ा हुआ हूं. अभी जो खबरें आये दिन महिलाओं को लेकर अखबार की सुर्खियां बनती हैं इसे देखकर मैं बहुत हैरान होता हूं कि आखिर इनकी सोच ऐसी क्यों है? मेरी मां हमेशा मेरे पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती रहीं. वह एक डिजाइनर हैं. मैं मां से काफी क्लोज हूं. उन्होंने मुझे पूरी तरह से गाइड किया है, क्योंकि पिता हमेशा व्यस्त रहते थें. मैंने अपनी जिंदगी में एक स्ट्रॉन्ग महिला को नजदीक से देखा है. मेरे पिता ने हमेशा मेरी मां को बहुत सम्मान दिया है.

आपको फिल्मों में एंट्री मिली कामयाब भी हुए, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है?

हर फिल्म सफल हो ये जरुरी नहीं. ये सोचकर मैं काम नहीं करता. इतना जरुर है कि ब्रांड वैल्यू को देखना पड़ता है. अलिया के साथ मेरी ये तीसरी फिल्म है, लोगों ने पहले हमें पसंद किया. इस बार भी वैसा ही हो, उसे बनाये रखने के लिए प्रेशर है. फिल्म ‘बदलापुर’ से पहले लोग कहते थे कि मुझे एक्टिंग नहीं आती, मुझे प्रूव करना पड़ा. उसके बाद मसाला फिल्में भी आई और चली भी, लेकिन दर्शकों को अभी भी मुझपर विश्वास नहीं है कि मेरी फिल्म हमेशा ही अच्छी होगी, उसके लिए ही मेहनत कर रहा हूं.

इंडस्ट्री में फीमेल एक्ट्रेस को मेल एक्टर्स से कम पारिश्रमिक मिलती है, आप अगर फिल्म बनाये तो क्या आप इस बात पर विचार करेंगे?

मेरे हिसाब से अलिया भट्ट, सोनम कपूर, कंगना रनौत, अनुष्का शर्मा, श्रद्धा कपूर, प्रियंका चोपड़ा आदि ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने सोलो एक्टिंग कर फिल्म को सफल बनाया है. ऐसे में आगे चलकर वे और बेहतर काम कर पाएंगी, क्योंकि उनमें बहुत टैलेंट है. समय बदल रहा है और ये एक व्यवसाय है जहां पैसे काफी महत्व रखते है. कोई भी फिल्म अगर अच्छा व्यवसाय करेगी, तो उस कलाकार की मांग बढ़ेगी.

आप के बारें में कहा जाता है कि आप गोविंदा की नकल करते हैं, ऐसी बातों को आप कैसे लेते है?

आलोचना को हमेशा सकारात्मक रूप से लेना चाहिए. इससे आपको सुधरने का मौका मिलता है, क्योंकि इंडस्ट्री में बनावटी अधिक हैं. मैं गोविंदा की तरह बन नहीं सकता, क्योंकि वे बहुत ही बेहतर कलाकार हैं. मैं हमेशा उनके काम की सराहना करता हूं.

क्या कोई ड्रीम प्रोजेक्ट है?

मुझे ‘सोल्जर’ की एक्टिंग करने की इच्छा है.

आप की रियल लाइफ दुल्हनियां कैसी होनी चाहिए?

वह आत्मनिर्भर, साहसी और समझदार होनी चाहिए.

होली कैसे मनाते हैं? इस बार क्या करना है?

होली रंगों का त्यौहार है, इसे परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर मनाता हूं. मेरी फिल्म में भी होली पर गीत है. मुझे अमिताभ का ‘रंग बरसे… गीत  और अक्षय कुमार की लेट्स प्ले होली… गाना पसंद है. होली पर सूखे रंगों का अधिक प्रयोग करें, जिससे पानी कम खर्च हो.