मैं फिल्में दूसरों की सलाह से नहीं, अपनी पसंद से चुनती हूं : नेहा शर्मा

By Shantiswaroop Tripathi | 19 June 2017

फैशन डिजाइनर नेहा शर्मा ने तेलुगू फिल्म ‘चिरूथा’ से अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत की. आज वे बौलीवुड में भी अपनी धाक जमाने का प्रयास कर रही हैं. उन का कहना है कि वे बौलीवुड में कुछ खास किरदार निभा कर नाम कमाना चाहती हैं.

नेहा शर्मा उन अभिनेत्रियों में से हैं, जिन के कैरियर को फिल्म की असफलता प्रभावित नहीं करती. 2007 में चरण तेज के साथ तेलुगू फिल्म ‘चिरुथा’ से अभिनय कैरियर की शुरुआत करने के बाद वे हिंदी फिल्मों से जुड़ीं. पिछली फिल्म ‘तुम बिन 2’ की असफलता के बाद वे अनिल कपूर और अर्जुन कपूर के संग ‘मुबारकां’ फिल्म में काम कर खुश हैं. पेश हैं उन से हुई बातचीत के खास अंश :

आप का कैरियर जिस तरह से बढ़ रहा है, इससे आप कितना खुश हैं?

मैं अपने कैरियर को ले कर काफी खुश हूं. इसकी सब से बड़ी वजह यह है कि हर इंसान के लिए सफलता के मायने अलग होते हैं. आपके लिए सफलता के जो मायने हैं, वही मेरे लिए हों, ऐसा जरूरी नहीं है. मेरी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना ये है कि मैं जो कुछ करना चाहती हूं, जिस तरह का काम करना चाहती हूं, उसे करने के मुझे अवसर मिले.

मैं अपनेआप को खुशकिस्मत मानती हूं कि मैं खुद से अपनी फिल्में चुन सकती हूं. मैं हमेशा वही काम करती हूं, जिसे करने के लिए मेरा दिल कहे. मुझे यह पसंद नहीं कि कोई इंसान मुझे सलाह दे कि मुझे यह फिल्म करनी चाहिए या यह नहीं करनी चाहिए. यदि दूसरों की सलाह पर फिल्में करना सफलता का पैमाना है तो मुझे यह पसंद नहीं. मुझे लगता है कि अब तक के कैरियर में मैं ने वही काम किया, जो मुझे पसंद आया. इसलिए मैं खुश हूं. इसी आधार पर मुझे लगता है कि मेरा कैरियर बहुत सही तरीके से आगे बढ़ रहा है.

मगर बौलीवुड में कलाकार का कैरियर तो फिल्म की सफलता के इर्दगिर्द घूमता है?

देखिए, यह सब अलगअलग नजरिए से खुद को देखने का तरीका होता है. कुछ लोगों को अपनेआप को नंबर वन कहलाने की चाहत होती है, तो वे बताते रहते हैं कि हमारी फिल्म ने इतने करोड़ कमा लिए. मैं नंबर वन, नंबर 2 या नंबर 3 में यकीन नहीं रखती. वास्तव में वे कलाकार, जो नंबर की चूहादौड़ में हैं, उन्हें तमाम लोग कंट्रोल करते हैं. इन के इर्दगिर्द लंबीचौड़ी फौज रहती है, जो इन्हें पल-पल पर टोकती रहती है कि उन्हें क्या करना है या क्या नहीं करना है.

मेरे इर्दगिर्द ऐसी कोई फौज नहीं है. मैं खुश हूं. मेरे लिए सफलता बहुत बड़ी बात है. पर मैं हमेशा वही काम करना चाहती हूं, जिस में मुझे खुशी मिले. जिस काम को करने के लिए मेरा मन गवाही दे. मुझे कोई टोकने वाला नहीं है, जो मुझ से कहे कि मुझे क्या करना है. मैं तो फिल्में भी दूसरों की सलाह से नहीं, अपनी पसंद से चुनती हूं.

‘तुम बिन 2’ की असफलता से आप के कैरियर पर क्या असर हुआ?

हम सब की ढेरों अपेक्षाएं और उम्मीदें होती हैं, उसी के अनुरूप हम योजना बनाते हैं, जब उस तरह से चीजें नहीं होतीं तो हम हताश हो जाते हैं. परिणामत: हमारा कैरियर खत्म होने लगता है, लेकिन मैं तो फिल्म की शूटिंग पूरी करते ही उसे भूल कर आगे बढ़ जाती हूं. इसलिए किसी भी फिल्म की असफलता का मेरे कैरियर पर कोई असर नहीं होता.

जहां तक ‘तुम बिन 2’ की असफलता का सवाल है, तो मेरे हिसाब से फिल्म सफल रही, निर्माता को नुकसान नहीं हुआ. लोगों को मेरा काम भी पसंद आया. दूसरी सफलता और असफलता दोनों ही हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं. हमें सफलता की ही तरह असफलता को भी लेना चाहिए. मैं सफलता मिलने पर हवा में नहीं उड़ती और असफलता से मायूस नहीं होती.

मैं इस बात का गम नहीं मानती कि मुझे क्या नहीं मिला, पर जो मिलता है, उसका जश्न जरूर मनाती हूं. तीसरी बात मैं इस बात पर यकीन करती हूं कि किसी भी फिल्म की सफलता व असफलता कलाकार के हाथ में नहीं होती है.

कलाकार के अलावा फिल्म के साथ बहुत सी चीजें जुड़ी होती हैं. मसलन, फिल्म का निर्माता कौन है? फिल्म के साथ कौन सा स्टूडियो जुड़ा हुआ है? निर्देशक कौन है? उस ने पहले कौन सी फिल्में बनाई हैं? गाने किस तरह के हैं? संगीतकार कौन है? कलाकार कौनकौन हैं? पता नहीं कितनी लंबी सूची होती है, जब तक इन सारी चीजों पर चैकलिस्ट नहीं लगेगी, तब तक फिल्म की सफलता की गारंटी कोई नहीं दे सकता.

एक कलाकार के तौर पर आप फिल्में चुनते समय कुछ तो ध्यान देती होंगी?

कलाकार के तौर पर हम उस तरह के कटैंट वाली फिल्म चुनते हैं, जिसमें हमें यकीन होता है. हम कहानी या पटकथा के बारे में जानकारी दे कर अपने आप से सवाल करते हैं कि क्या यह हमें पसंद है? क्या हम किरदार के साथ इत्तेफाक रखते हैं? क्या हम इसे अपने अभिनय से संवार सकेंगे? इन सारे सवालों का जवाब ‘हां’ हो तो हम फिल्म कर लेते हैं.

हीरोइन के रूप में फिल्म ‘तुम बिन 2’ करने के बाद मल्टीस्टारर फिल्म ‘मुबारकां’ में छोटा सा कैमियो करना कहां तक उचित है?

यह मसला पानी से भरे आधे गिलास की ही तरह है. इस गिलास को देखने का हर इंसान का अपना अलग नजरिया होता है. क्या आप मल्टीस्टारर फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ में जिस किरदार को जूही चावला ने निभाया था, भुला सकते हैं? वह भी तो छोटा सा किरदार था. इसी तरह मेरा दावा है कि जब फिल्म ‘मुबारकां’ प्रदर्शित होगी, तो लोगों को मेरा किरदार याद रहेगा.

इस मल्टीस्टारर फिल्म में अभिनय कर मैं ने बहुत कुछ सीखा. जहां मुझे दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर के साथ काम कर बहुत कुछ सीखने को मिला, तो वहीं मैं लंबे समय से अनीस बजमी के निर्देशन में फिल्म करने का सपना देख रही थी.

मैं तो उनकी कौमेडी फिल्मों की मुरीद हूं. मैंने उन की हर फिल्म देखी है. ऐसे में जब अनीस बजमी ने मेरे सामने ‘मुबारकां’ में कैमियो करने का प्रस्ताव यह कहते हुए रखा कि इस में अनिल कपूर व अर्जुन कपूर भी हैं, तो मैं ने इसे तुरंत लपक लिया.

इस के अलावा आज मैं अपने कैरियर के जिस मुकाम पर हूं वहां मुझे ज्यादा से ज्यादा अच्छा काम, बेहतरीन लोगों के साथ करना है. मैं ‘मुबारकां’ के अलावा कुछ दूसरी रोचक व बड़ी फिल्में कर रही हूं, पर जब तक उन की घोषणा निर्माता न कर दें, मैं उस पर बात नहीं कर सकती.

फिल्म में आप का क्या किरदार है?

बहुत ज्यादा विस्तार से बताना तो ठीक नहीं होगा, लेकिन यह फनी फिल्म है. मेरा किरदार भी फनी है. मैं लोगों को इस फिल्म में हंसाऊंगी.

अनिल कपूर के साथ ’मुबारकां’ में काम करने के क्या अनुभव रहे?

बहुत मजा आया. वे काफी बड़े कलाकार हैं. विविधतापूर्ण किरदार निभा चुके हैं. वे ऐनर्जी से भरपूर हैं. हर किसी से गर्मजोशी के साथ मिलते हैं. काम के प्रति उन का समर्पण देख कर मैं दंग रह गई. उन से बहुत कुछ सीखने को मिला.

क्या यह माना जाए कि आप महत्त्वाकांक्षी नहीं हैं?

किस ने कहा? मैं महत्त्वाकांक्षी हूं, लेकिन मेरे लिए सफलता के माने कुछ और हैं. मेरे लिए सफलता का अर्थ नंबर वन की कुरसी हथियाना नहीं है. मैं इस तरह की किसी भी चूहादौड़ का हिस्सा नहीं हूं.

मेरे लिए सफलता का पैमाना इस बात पर निर्भर करता है कि मैं अपनी पसंद के किरदार व पसंद की फिल्में चुनने के लिए स्वतंत्र हूं. किसी भी फिल्म को स्वीकार करने में मुझे काफी समय लगता है. कुछ लोग मुझे चूजी समझते हैं.

अब तो आप की बहन आयशा शर्मा भी बौलीवुड में संघर्ष कर रही हैं?

वे भी दूसरी आम युवतियों की तरह हैं, जो अपने लिए बौलीवुड में जगह तलाश रही हैं.

आपने कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अभिनय किया है. आप को लगता है कि वहां काम करना ज्यादा आसान है?

आसान कहीं नहीं होता. हर जगह आप को अपनी प्रतिभा के बल पर अपनी जगह बनानी होती है. यही बात बौलीवुड, टौलीवुड, हौलीवुड हर जगह लागू होती है.

आप ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था, वह अब काम आ रहा है?

दिल्ली में मैं ने निफ्ट से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया. फैशन डिजाइनिंग करने से हमें पोशाक कैसे डिजाइन करनी है, यह समझ में आता है. इसी के चलते मेरे लिए अपनी फिल्मों के किरदारों के अनुरूप पोशाकों को अपनी डिजाइनर के साथ बैठ कर डिजाइन करवाना आसान होता है. इस के अलावा अब मैं ने अपना ऐप शुरू किया है. अब मैं अपना खुद का लेबल शुरू करने वाली हूं.

आप को अपने ऐप की जरूरत क्यों महसूस हुई?

मुझे जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन ऐप बनाने वाली कंपनी इस्कापेक्स ने मुझ से संपर्क किया. उन्होंने मुझे ऐप के बारे में विस्तृत जानकारी दी. तब मुझे एहसास हुआ कि ऐप होना कितना जरूरी है, क्योंकि इस में बहुत कुछ है.

मेरे फैंस मेरे संपर्क में आने के लिए मेरे बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अलगअलग सोशल मीडिया यानी कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर वगैरा पर जाते हैं. इससे उनका काफी समय बरबाद होता है.

अब उन्हें मेरे बारे में किसी भी जानकारी को हासिल करने के लिए अलगअलग सोशल मीडिया पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्हें सारी जानकारी मेरे ऐप से मिल जाएगी.

किन फिल्मकारों के साथ काम करना चाहती हैं?

मैं संजय लीला भंसाली के साथ फिल्में करना चाहती हूं. यदि वे अपनी किसी ऐतिहासिक फिल्म से जुड़ने का औफर देंगे, तो मैं आंख मूंद कर उन के इस औफर को स्वीकार कर लूंगी.

मैं संजय लीला भंसाली से फिल्म की पटकथा भी नहीं मांगूगी, क्योंकि मुझे पता है कि संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों में महिला किरदारों को बहुत ही भव्यता व शालीनता के साथ पेश करते हैं. उनकी फिल्म में महिला पात्र हमेशा सशक्त होते हैं.

आप एक राजनीतिज्ञ परिवार से जुड़ी हुई हैं. तो क्या फिल्मों में क्या करना है या क्या नहीं ऐसा कुछ है?

बिलकुल नहीं. मैंने कोई सीमाएं नहीं बनाई हैं. मैं किरदार की मांग के अनुरूप हर तरह की पोशाक पहनने के लिए तैयार हूं. मैं ने अपने पिता व भागलपुर से कांग्रेस के विधायक अजीत शर्मा के लिए चुनाव प्रचार किया है. मगर मेरा राजनीति से जुड़ने का कोई इरादा नहीं है.

आप ने एक चीनी फिल्म ‘झौंगजौंग’ की थी. कोई दूसरी चीनी फिल्म करने वाली हैं?

ऐतिहासिक फिल्म है. पिछले वर्ष चीन में प्रदर्शित हुई और सफल हुई. वहां फिल्म करने का मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा. वहां फिल्मकार पटकथा, विषय व चरित्र पर बहुत बारीकी से काम करते हैं. यदि दूसरी फिल्म का औफर मिला, तो जरूर करना चाहूंगी.

अब दक्षिण भारतीय फिल्में नहीं कर रही हैं?

जब किसी अच्छे कथानक वाली फिल्म का औफर मिलेगा, तो जरूर करना चाहूंगी.

किस तरह के किरदार निभाना चाहती हैं?

कोई सीमारेखा तो खींची नहीं है. मगर मैं संजीदा या गंभीर किस्म के किरदार फिलहाल नहीं निभाना चाहती. मैं हमउम्र के हलकेफुलके किरदारों को ही निभाना चाहती हूं. रोमांटिक किरदारों को निभाना चाहती हूं.

सच कहूं तो मुझे ढेर सारे चरित्र निभाने हैं. अभी तो मेरे कैरियर की शुरुआत हुई है. मुझे उम्मीद है कि अभी मेरी राह में तमाम औफर आएंगे. मैं यह भी अच्छी तरह से समझती हूं कि मैं उस मुकाम पर नहीं हूं, जहां शाहरुख खान या सलमान खान हैं.

इन सभी कलाकारों ने 20-25 साल के कैरियर में 2-3 सौ फिल्में की हैं. तो जब मैं उस मुकाम पर पहुंचूंगी, तो शायद मैं लोगों से कह सकूंगी कि मुझे यह किरदार या यह फिल्म करनी है.

सच यही है कि जो दूसरे कर रहे हैं, उन से मैं कुछ अलग काम करना चाहती हूं. मेरी कोशिश रहती है कि मैं जो भी किरदार निभाऊं वह मेरे लिए ड्रीम रोल साबित हो. इस के लिए मैं अपनी तरफ से पूरी मेहनत करती हूं.

कोई खास किरदार जो करना चाहती हों?

ऐसा कुछ नहीं है. मैं अलगअलग तरह की फिल्में करना चाहती हूं. हर जौन में काम करना है. मुझे लगता है कि जिंदगी में काम ज्यादा और आराम कम करना चाहिए. तो मेरी कोशिश यही है कि मैं बहुत सी फिल्में करूं और सब अलग तरह की हों, जिस से मेरे अंदर की अभिनय कला का विकास हो सके. आप को याद होगा कि मैं ने अभिनय की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. जो कुछ सीखा है, काम करते हुए सीखा है.

शौक?

कुकिंग, पढ़ना, कुत्तों के साथ खेलना, संगीत सुनना मुझे पसंद है. मुझे बचपन से ही नृत्य का शौक रहा है. मैं ने कत्थक की विधिवत ट्रेनिंग ली है. इसके अलावा मैंने जेज, सालसा जैसे कई वैस्टर्न डांस के फौर्म की भी ट्रेनिंग हासिल की.

पसंदीदा अभिनेत्री?

विद्या बालन, मधुबाला, कैमरोन डियाज.

फैशन डिजाइनर नेहा शर्मा ने तेलुगू फिल्म ‘चिरूथा’ से अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत की. आज वे बौलीवुड में भी अपनी धाक जमाने का प्रयास कर रही हैं. उन का कहना है कि वे बौलीवुड में कुछ खास किरदार निभा कर नाम कमाना चाहती हैं.

नेहा शर्मा उन अभिनेत्रियों में से हैं, जिन के कैरियर को फिल्म की असफलता प्रभावित नहीं करती. 2007 में चरण तेज के साथ तेलुगू फिल्म ‘चिरुथा’ से अभिनय कैरियर की शुरुआत करने के बाद वे हिंदी फिल्मों से जुड़ीं. पिछली फिल्म ‘तुम बिन 2’ की असफलता के बाद वे अनिल कपूर और अर्जुन कपूर के संग ‘मुबारकां’ फिल्म में काम कर खुश हैं. पेश हैं उन से हुई बातचीत के खास अंश :

आप का कैरियर जिस तरह से बढ़ रहा है, इससे आप कितना खुश हैं?

मैं अपने कैरियर को ले कर काफी खुश हूं. इसकी सब से बड़ी वजह यह है कि हर इंसान के लिए सफलता के मायने अलग होते हैं. आपके लिए सफलता के जो मायने हैं, वही मेरे लिए हों, ऐसा जरूरी नहीं है. मेरी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना ये है कि मैं जो कुछ करना चाहती हूं, जिस तरह का काम करना चाहती हूं, उसे करने के मुझे अवसर मिले.

मैं अपनेआप को खुशकिस्मत मानती हूं कि मैं खुद से अपनी फिल्में चुन सकती हूं. मैं हमेशा वही काम करती हूं, जिसे करने के लिए मेरा दिल कहे. मुझे यह पसंद नहीं कि कोई इंसान मुझे सलाह दे कि मुझे यह फिल्म करनी चाहिए या यह नहीं करनी चाहिए. यदि दूसरों की सलाह पर फिल्में करना सफलता का पैमाना है तो मुझे यह पसंद नहीं. मुझे लगता है कि अब तक के कैरियर में मैं ने वही काम किया, जो मुझे पसंद आया. इसलिए मैं खुश हूं. इसी आधार पर मुझे लगता है कि मेरा कैरियर बहुत सही तरीके से आगे बढ़ रहा है.

मगर बौलीवुड में कलाकार का कैरियर तो फिल्म की सफलता के इर्दगिर्द घूमता है?

देखिए, यह सब अलगअलग नजरिए से खुद को देखने का तरीका होता है. कुछ लोगों को अपनेआप को नंबर वन कहलाने की चाहत होती है, तो वे बताते रहते हैं कि हमारी फिल्म ने इतने करोड़ कमा लिए. मैं नंबर वन, नंबर 2 या नंबर 3 में यकीन नहीं रखती. वास्तव में वे कलाकार, जो नंबर की चूहादौड़ में हैं, उन्हें तमाम लोग कंट्रोल करते हैं. इन के इर्दगिर्द लंबीचौड़ी फौज रहती है, जो इन्हें पल-पल पर टोकती रहती है कि उन्हें क्या करना है या क्या नहीं करना है.

मेरे इर्दगिर्द ऐसी कोई फौज नहीं है. मैं खुश हूं. मेरे लिए सफलता बहुत बड़ी बात है. पर मैं हमेशा वही काम करना चाहती हूं, जिस में मुझे खुशी मिले. जिस काम को करने के लिए मेरा मन गवाही दे. मुझे कोई टोकने वाला नहीं है, जो मुझ से कहे कि मुझे क्या करना है. मैं तो फिल्में भी दूसरों की सलाह से नहीं, अपनी पसंद से चुनती हूं.

‘तुम बिन 2’ की असफलता से आप के कैरियर पर क्या असर हुआ?

हम सब की ढेरों अपेक्षाएं और उम्मीदें होती हैं, उसी के अनुरूप हम योजना बनाते हैं, जब उस तरह से चीजें नहीं होतीं तो हम हताश हो जाते हैं. परिणामत: हमारा कैरियर खत्म होने लगता है, लेकिन मैं तो फिल्म की शूटिंग पूरी करते ही उसे भूल कर आगे बढ़ जाती हूं. इसलिए किसी भी फिल्म की असफलता का मेरे कैरियर पर कोई असर नहीं होता.

जहां तक ‘तुम बिन 2’ की असफलता का सवाल है, तो मेरे हिसाब से फिल्म सफल रही, निर्माता को नुकसान नहीं हुआ. लोगों को मेरा काम भी पसंद आया. दूसरी सफलता और असफलता दोनों ही हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं. हमें सफलता की ही तरह असफलता को भी लेना चाहिए. मैं सफलता मिलने पर हवा में नहीं उड़ती और असफलता से मायूस नहीं होती.

मैं इस बात का गम नहीं मानती कि मुझे क्या नहीं मिला, पर जो मिलता है, उसका जश्न जरूर मनाती हूं. तीसरी बात मैं इस बात पर यकीन करती हूं कि किसी भी फिल्म की सफलता व असफलता कलाकार के हाथ में नहीं होती है.

कलाकार के अलावा फिल्म के साथ बहुत सी चीजें जुड़ी होती हैं. मसलन, फिल्म का निर्माता कौन है? फिल्म के साथ कौन सा स्टूडियो जुड़ा हुआ है? निर्देशक कौन है? उस ने पहले कौन सी फिल्में बनाई हैं? गाने किस तरह के हैं? संगीतकार कौन है? कलाकार कौनकौन हैं? पता नहीं कितनी लंबी सूची होती है, जब तक इन सारी चीजों पर चैकलिस्ट नहीं लगेगी, तब तक फिल्म की सफलता की गारंटी कोई नहीं दे सकता.

एक कलाकार के तौर पर आप फिल्में चुनते समय कुछ तो ध्यान देती होंगी?

कलाकार के तौर पर हम उस तरह के कटैंट वाली फिल्म चुनते हैं, जिसमें हमें यकीन होता है. हम कहानी या पटकथा के बारे में जानकारी दे कर अपने आप से सवाल करते हैं कि क्या यह हमें पसंद है? क्या हम किरदार के साथ इत्तेफाक रखते हैं? क्या हम इसे अपने अभिनय से संवार सकेंगे? इन सारे सवालों का जवाब ‘हां’ हो तो हम फिल्म कर लेते हैं.

हीरोइन के रूप में फिल्म ‘तुम बिन 2’ करने के बाद मल्टीस्टारर फिल्म ‘मुबारकां’ में छोटा सा कैमियो करना कहां तक उचित है?

यह मसला पानी से भरे आधे गिलास की ही तरह है. इस गिलास को देखने का हर इंसान का अपना अलग नजरिया होता है. क्या आप मल्टीस्टारर फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ में जिस किरदार को जूही चावला ने निभाया था, भुला सकते हैं? वह भी तो छोटा सा किरदार था. इसी तरह मेरा दावा है कि जब फिल्म ‘मुबारकां’ प्रदर्शित होगी, तो लोगों को मेरा किरदार याद रहेगा.

इस मल्टीस्टारर फिल्म में अभिनय कर मैं ने बहुत कुछ सीखा. जहां मुझे दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर के साथ काम कर बहुत कुछ सीखने को मिला, तो वहीं मैं लंबे समय से अनीस बजमी के निर्देशन में फिल्म करने का सपना देख रही थी.

मैं तो उनकी कौमेडी फिल्मों की मुरीद हूं. मैंने उन की हर फिल्म देखी है. ऐसे में जब अनीस बजमी ने मेरे सामने ‘मुबारकां’ में कैमियो करने का प्रस्ताव यह कहते हुए रखा कि इस में अनिल कपूर व अर्जुन कपूर भी हैं, तो मैं ने इसे तुरंत लपक लिया.

इस के अलावा आज मैं अपने कैरियर के जिस मुकाम पर हूं वहां मुझे ज्यादा से ज्यादा अच्छा काम, बेहतरीन लोगों के साथ करना है. मैं ‘मुबारकां’ के अलावा कुछ दूसरी रोचक व बड़ी फिल्में कर रही हूं, पर जब तक उन की घोषणा निर्माता न कर दें, मैं उस पर बात नहीं कर सकती.

फिल्म में आप का क्या किरदार है?

बहुत ज्यादा विस्तार से बताना तो ठीक नहीं होगा, लेकिन यह फनी फिल्म है. मेरा किरदार भी फनी है. मैं लोगों को इस फिल्म में हंसाऊंगी.

अनिल कपूर के साथ ’मुबारकां’ में काम करने के क्या अनुभव रहे?

बहुत मजा आया. वे काफी बड़े कलाकार हैं. विविधतापूर्ण किरदार निभा चुके हैं. वे ऐनर्जी से भरपूर हैं. हर किसी से गर्मजोशी के साथ मिलते हैं. काम के प्रति उन का समर्पण देख कर मैं दंग रह गई. उन से बहुत कुछ सीखने को मिला.

क्या यह माना जाए कि आप महत्त्वाकांक्षी नहीं हैं?

किस ने कहा? मैं महत्त्वाकांक्षी हूं, लेकिन मेरे लिए सफलता के माने कुछ और हैं. मेरे लिए सफलता का अर्थ नंबर वन की कुरसी हथियाना नहीं है. मैं इस तरह की किसी भी चूहादौड़ का हिस्सा नहीं हूं.

मेरे लिए सफलता का पैमाना इस बात पर निर्भर करता है कि मैं अपनी पसंद के किरदार व पसंद की फिल्में चुनने के लिए स्वतंत्र हूं. किसी भी फिल्म को स्वीकार करने में मुझे काफी समय लगता है. कुछ लोग मुझे चूजी समझते हैं.

अब तो आप की बहन आयशा शर्मा भी बौलीवुड में संघर्ष कर रही हैं?

वे भी दूसरी आम युवतियों की तरह हैं, जो अपने लिए बौलीवुड में जगह तलाश रही हैं.

आपने कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अभिनय किया है. आप को लगता है कि वहां काम करना ज्यादा आसान है?

आसान कहीं नहीं होता. हर जगह आप को अपनी प्रतिभा के बल पर अपनी जगह बनानी होती है. यही बात बौलीवुड, टौलीवुड, हौलीवुड हर जगह लागू होती है.

आप ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था, वह अब काम आ रहा है?

दिल्ली में मैं ने निफ्ट से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया. फैशन डिजाइनिंग करने से हमें पोशाक कैसे डिजाइन करनी है, यह समझ में आता है. इसी के चलते मेरे लिए अपनी फिल्मों के किरदारों के अनुरूप पोशाकों को अपनी डिजाइनर के साथ बैठ कर डिजाइन करवाना आसान होता है. इस के अलावा अब मैं ने अपना ऐप शुरू किया है. अब मैं अपना खुद का लेबल शुरू करने वाली हूं.

आप को अपने ऐप की जरूरत क्यों महसूस हुई?

मुझे जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन ऐप बनाने वाली कंपनी इस्कापेक्स ने मुझ से संपर्क किया. उन्होंने मुझे ऐप के बारे में विस्तृत जानकारी दी. तब मुझे एहसास हुआ कि ऐप होना कितना जरूरी है, क्योंकि इस में बहुत कुछ है.

मेरे फैंस मेरे संपर्क में आने के लिए मेरे बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अलगअलग सोशल मीडिया यानी कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर वगैरा पर जाते हैं. इससे उनका काफी समय बरबाद होता है.

अब उन्हें मेरे बारे में किसी भी जानकारी को हासिल करने के लिए अलगअलग सोशल मीडिया पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्हें सारी जानकारी मेरे ऐप से मिल जाएगी.

किन फिल्मकारों के साथ काम करना चाहती हैं?

मैं संजय लीला भंसाली के साथ फिल्में करना चाहती हूं. यदि वे अपनी किसी ऐतिहासिक फिल्म से जुड़ने का औफर देंगे, तो मैं आंख मूंद कर उन के इस औफर को स्वीकार कर लूंगी.

मैं संजय लीला भंसाली से फिल्म की पटकथा भी नहीं मांगूगी, क्योंकि मुझे पता है कि संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों में महिला किरदारों को बहुत ही भव्यता व शालीनता के साथ पेश करते हैं. उनकी फिल्म में महिला पात्र हमेशा सशक्त होते हैं.

आप एक राजनीतिज्ञ परिवार से जुड़ी हुई हैं. तो क्या फिल्मों में क्या करना है या क्या नहीं ऐसा कुछ है?

बिलकुल नहीं. मैंने कोई सीमाएं नहीं बनाई हैं. मैं किरदार की मांग के अनुरूप हर तरह की पोशाक पहनने के लिए तैयार हूं. मैं ने अपने पिता व भागलपुर से कांग्रेस के विधायक अजीत शर्मा के लिए चुनाव प्रचार किया है. मगर मेरा राजनीति से जुड़ने का कोई इरादा नहीं है.

आप ने एक चीनी फिल्म ‘झौंगजौंग’ की थी. कोई दूसरी चीनी फिल्म करने वाली हैं?

ऐतिहासिक फिल्म है. पिछले वर्ष चीन में प्रदर्शित हुई और सफल हुई. वहां फिल्म करने का मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा. वहां फिल्मकार पटकथा, विषय व चरित्र पर बहुत बारीकी से काम करते हैं. यदि दूसरी फिल्म का औफर मिला, तो जरूर करना चाहूंगी.

अब दक्षिण भारतीय फिल्में नहीं कर रही हैं?

जब किसी अच्छे कथानक वाली फिल्म का औफर मिलेगा, तो जरूर करना चाहूंगी.

किस तरह के किरदार निभाना चाहती हैं?

कोई सीमारेखा तो खींची नहीं है. मगर मैं संजीदा या गंभीर किस्म के किरदार फिलहाल नहीं निभाना चाहती. मैं हमउम्र के हलकेफुलके किरदारों को ही निभाना चाहती हूं. रोमांटिक किरदारों को निभाना चाहती हूं.

सच कहूं तो मुझे ढेर सारे चरित्र निभाने हैं. अभी तो मेरे कैरियर की शुरुआत हुई है. मुझे उम्मीद है कि अभी मेरी राह में तमाम औफर आएंगे. मैं यह भी अच्छी तरह से समझती हूं कि मैं उस मुकाम पर नहीं हूं, जहां शाहरुख खान या सलमान खान हैं.

इन सभी कलाकारों ने 20-25 साल के कैरियर में 2-3 सौ फिल्में की हैं. तो जब मैं उस मुकाम पर पहुंचूंगी, तो शायद मैं लोगों से कह सकूंगी कि मुझे यह किरदार या यह फिल्म करनी है.

सच यही है कि जो दूसरे कर रहे हैं, उन से मैं कुछ अलग काम करना चाहती हूं. मेरी कोशिश रहती है कि मैं जो भी किरदार निभाऊं वह मेरे लिए ड्रीम रोल साबित हो. इस के लिए मैं अपनी तरफ से पूरी मेहनत करती हूं.

कोई खास किरदार जो करना चाहती हों?

ऐसा कुछ नहीं है. मैं अलगअलग तरह की फिल्में करना चाहती हूं. हर जौन में काम करना है. मुझे लगता है कि जिंदगी में काम ज्यादा और आराम कम करना चाहिए. तो मेरी कोशिश यही है कि मैं बहुत सी फिल्में करूं और सब अलग तरह की हों, जिस से मेरे अंदर की अभिनय कला का विकास हो सके. आप को याद होगा कि मैं ने अभिनय की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. जो कुछ सीखा है, काम करते हुए सीखा है.

शौक?

कुकिंग, पढ़ना, कुत्तों के साथ खेलना, संगीत सुनना मुझे पसंद है. मुझे बचपन से ही नृत्य का शौक रहा है. मैं ने कत्थक की विधिवत ट्रेनिंग ली है. इसके अलावा मैंने जेज, सालसा जैसे कई वैस्टर्न डांस के फौर्म की भी ट्रेनिंग हासिल की.

पसंदीदा अभिनेत्री?

विद्या बालन, मधुबाला, कैमरोन डियाज.

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