गृहशोभा विशेष

फिल्म ‘काबिल’ के निर्देशक संजय गुप्ता काफी खुश हैं. उनकी खुशी की वजह यह है कि फिल्म ‘काबिल’ की वजह से वह सुर्खियों में नहीं छा पा रहे थे, मगर बंद होते स्टूडियो पर खुशी जाहिर कर वह सुर्खियों में छा गए हैं. मगर उनके इसी बयान की वजह से बौलीवुड में उनकी गिनती गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले फिल्मकारों में हो रही है.

मजेदार बात यह है कि बंद होते स्टूडियो पर खुशी जाहिर करने वाले संजय गुप्ता फिल्म ‘‘काबिल’’ के निर्माता राकेश रोशन के बयानों पर चुप हैं. राकेश रोशन के अनुसार संजय गुप्ता हर सीन फिल्माने के बाद पहले राकेशरोशन को दिखाते थे. राकेश रोशन जब उसे ओके  करते थे, तभी वह आगे बढ़ते थे. अन्यथा राकेश रोशन के कहने पर वह उस सीन में बदलाव करते थे.

जबकि अपनी पिछली नाकामयाब फिल्म ‘‘जज्बा’’ तक हर फिल्म को स्टूडियो के साथ बनाते आ रहे संजय गुप्ता कल तक स्टूडियो सिस्टम व कारपोरेट कंपनियों की तारीफों के पुल बांधते हुए नहीं थकते थे. पर जब ‘काबिल’की वजह से सुर्खियां नहीं मिली, तो बंद होते स्टूडियों पर खुशी जाहिर कर सुर्खियां बटोर रहे हैं.

फिल्म ‘‘जज्बा’’ के प्रदर्शन से पहले स्टूडियो सिस्टम व कारपोरेट कंपनियों की तारीफ करते हुए संजय गुप्ता ने हमसे कहा था-‘‘हम हर फिल्म किसी न किसी स्टूडियो के साथ ही बनाते आए हैं. हमने अतीत में ‘बालाजी टेलीफिल्म्स’ और ‘इरोज इंटरनेशनल’ के साथ फिल्में बनायी हैं. अब ‘एस्सेल विजन’ हमारे लिए ‘वन स्टापशॉप’ है. इस कंपनी की शुरुआत ढाई सो करोड़ रूपए से हुई है. ‘बालाजी टेली फिल्मस’ या ‘इरोज इंटरनेशनल’के साथ मिलकर जो फिल्में बनायी थीं. वहां भी कंटेट को लेकर समस्या कभी नहीं हुई. पर हर इंसान काम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा कम्फर्ट जोन तलाशता है. मुझे यह मानने में कोई संकोच नही कि तमाम कारपोरेट कंपनियों ने ‘एस्सेल वीजन’ के नितिन केणी के बनाए फार्मूले पर बाद में काम किया.’’

कारपोरेट सिस्टम की वजह से क्रिएटीविटी को नुकसान को गलत ठहराते हुए उस वक्त संजय गुप्ता ने कहा था-‘‘यह कहना गलत है कि कारपोरेट कंपनियों व स्टूडियो के चलते क्रिएटीविटी को नुकसान हो रहा है. क्रिएटिव नुकसान उन लोगों का होता हैं, जिन्हें हम उतनी छूट देते हैं. फिल्म की शूटिंग के दौरान सारे निर्णय मेरे अपने होते हैं.’’

पर अब संजय गुप्ता कहते हैं-‘‘स्टूडियो के बंद होने से हम खुश हैं. पहले निर्माता फिल्म बनाता और वितरक उसे प्रदर्शित करता था. अब बीच में 600 लोगों की टीम के साथ यह कारपोरेट कंपनियां आ गयी हैं. तब से मुनाफा कम हो गया है. मैं इन स्टूडियो के बंद होने से खुश हूं.’’

वाह क्या बात है..संजय गुप्ता, कल तक जब कारपोरेट कंपनियों के गुण गा रहे थे, तब मुनाफा कम नहीं हो रहा था.

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