गृहशोभा विशेष

उम्र के 5 दशक पार कर चुके मिलिंद सोमन एक सुपर मौडल, अभिनेता, फिल्म निर्माता, स्पोर्ट्स पर्सन हैं और फिटनैस को प्रमोट करते हैं. महाराष्ट्र के मिलिंद सोमन ने 10 साल की उम्र से ही महाराष्ट्र को राष्ट्रीय स्तर पर रिप्रेजैंट करना शुरू कर दिया था.

उन्होंने 4 साल तक लगातार नैशनल सीनियर स्विमिंग चैंपियनशिप जीती. 30 दिनों में 1,500 किलोमीटर दौड़ कर अपना नाम लिम्का बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स में दर्ज करवाया. इस के अलावा उन्होंने ‘आयरन मैन’ चैलेंज को पहली ही कोशिश में 15 घंटों और 19 मिनट में पूरा किया. इस में साइक्लिंग, स्विमिंग और रनिंग शामिल हैं.

समय मिलने पर सोमन आज भी 10-12 किलोमीटर दौड़ते हैं और फिटनैस के लिए सब को प्रोत्साहित करते हैं. इस समय वे महिलाओं की मैराथन दौड़ ‘पिंकाथन’ के ब्रैंड ऐंबैसेडर हैं. हर बार मैराथन में भाग लेने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या को देख कर वे काफी खुश हैं. उन से हुई बातचीत के कुछ अंश प्रस्तुत हैं:

अच्छी हैल्थ के लिए फिटनैस कितनी जरूरी

फिट रहने से केवल शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक अवस्था भी अच्छी रहती है. आमतौर पर महिलाएं कुछ न कुछ बहाना बना कर फिटनैस से भागती हैं. ऐसे में इस तरह की दौड़ उन के लिए काफी आकर्षक होती है. हमारे समाज में कुछ पुरुषों का ही कहना है कि महिलाएं दौड़ नहीं सकतीं.

यही वजह है कि मैं ‘पिंकाथन’ से जुड़ा हूं. अधिकतर महिलाएं घरेलू होती हैं और उन्हें इस की जानकारी नहीं है, इसलिए आज मैं महिलाओं को अपने लिए, अपनी हैल्थ के लिए दौड़ने के लिए कह रहा हूं. मेरे खयाल से एक महिला जो सोचती है वह कर सकती है.

कुछ महिलाएं तो ऐसी भी हैं कि शादी से पहले अपने लिए सबकुछ करती हैं और शादी के बाद सब छोड़ कर घरपरिवार में व्यस्त हो जाती हैं. ऐसे में वे एक अच्छी सेहत को नहीं जी पातीं. उन का स्ट्रैस लैवल भी बढ़ता रहता है.

महिलाओं का झुकाव इस ओर कितना बढ़ा

महिलाओं में अवेयरनैस बढ़ रही है. पहले हम केवल 8 शहरों में इस दौड़ का आयोजन करते थे. अब छोटेबड़े अनेक शहरों जैसे विशाखापट्टनम, विजयवाड़ा, नागपुर आदि से भी लोग हमें बुला रहे हैं. मैं ने इन छोटेबड़े शहरों के लिए एक दूसरा इवैंट ‘इंडिया गोइंग पिंक’ भी और्गनाइज किया है.

 इस इवैंट से जुड़े लोग सब को गाइड करते हैं और दौड़ का आयोजन करते हैं. इस बार 14 शहरों में यह दौड़ होगी. मुंबई की पहली मैराथन में केवल 2 हजार महिलाओं ने भाग लिया था. पिछले साल 11 हजार महिलाओं ने भाग लिया था और इस बार यह संख्या लाखों में होने की संभावना है.

फिटनैस से महिला के जीवन में बदलाव

मैं तो सब को ले कर दौड़ता हूं. अंदर जो बदलाव आते हैं यह उन्हें ही पता चलता है. उन के अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है कि वे जो चाहें कर सकती हैं. वे अच्छा फील करती हैं. हमारे देश में पिछले कुछ सालों से ही महिलाएं दौड़ रही हैं, जबकि अमेरिका में 40-45 साल पहले ही यह ट्रैंड शुरू हो गया था. लेकिन तब केवल प्रतियोगिता के लिए ही लोग दौड़ते थे, जिन में अधिकतर पुरुष ही होते थे.

हैल्थ के लिए कोई भी नहीं दौड़ता था. अभी अमेरिका में हर सप्ताह 30 मिलियन लोग दौड़ते हैं, क्योंकि उन्हें इस के फायदे पता चल चुके हैं. वहां स्पोर्ट्स कल्चर है पर अपने देश में ऐसा नहीं है. महिलाएं तो स्पोर्ट्स के मामले में और भी पीछे हैं. लेकिन अब हर स्कूल, गांव, शहर, क्लब आदि जगह रनिंग के इवैंट कराए जा रहे हैं. लोग भाग भी ले रहे हैं.

इस तरह सभी एकदूसरे से प्रेरित हो रहे हैं, यह एक अच्छी बात है. अब महिलाओं की झिझक दूर हो रही है. अब उन्हें फिटनैस के फायदे समझ में आ रहे हैं. इस से उन का स्ट्रैस दूर होता ही है, साथ ही और कई बीमारियां भी कम हो रही हैं.

स्टै्रस को भगाना मुश्किल नहीं, अगर हम अपने दैनिक रूटीन में दौड़ना, व्यायाम आदि को शामिल करें. बड़े शहरों में महिलाएं सुबह से शाम तक दौड़ती रहती हैं, फिर भी बीमार रहती हैं. उन्हें अपने लिए थोड़ा समय निकाल कर जो भी व्यायाम अच्छा लगे, करना चाहिए. उन्हें अपने व्यायाम की समय सीमा खुद ही तय करनी चाहिए. महिलाओं का सैल्फ अवेयर होना बहुत ही जरूरी है.