गृहशोभा विशेष

फैशनेबल पोशाकों को ले कर चर्चित रहने वाली अदाकारा सोनम कपूर को उम्मीद थी कि फिल्म ‘बेवकूफियां’ को बौक्स औफिस पर फिल्म ‘रांझणा’ से भी ज्यादा सफलता मिलेगी. मगर अफसोस ऐसा हुआ नहीं. अब यह पहला मौका है, जब उन्हें किसी फिल्म में बड़े स्टार के साथ काम करने का मौका मिला. वरना तो वे 7 सालों के कैरियर में हर फिल्म में नवोदित कलाकार के साथ ही नजर आईं.

जी हां, पहली बार सोनम कपूर सूरज बड़जात्या के निर्देशन में फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ कर रही हैं, जिस में उन के नायक सलमान खान हैं.

पेश हैं, सोनम से हुई गुफ्तगू के कुछ अहम अंश:

फिल्म ‘बेवकूफियां’ बौक्स औफिस पर तो उम्मीदों पर खरी उतरी नहीं?

मगर मेरी उम्मीदों पर खरी उतरी. मेरी उम्मीदें सिर्फ अभिनय तक होती हैं. मेरे अभिनय की खूब तारीफ हुई. मेरे हिसाब से फिल्म का प्रमोशन सही ढंग से नहीं किया गया था.

किसी भी किरदार को निभाने के लिए लुक पर कितना ध्यान देती हैं?

हर बात पर ध्यान देती हूं. मैं हर फिल्म के लिए खुद को बदलती रहती हूं, क्योंकि लुक बहुत माने रखता है. कभी बाल कटवाती हूं, कभी मोटी होती हूं तो कभी पतली. बौडी लैंग्वेज पर भी ध्यान देती हूं. इसीलिए आप को हर फिल्म में अलग सोनम कपूर नजर आएगी. फिर चाहे फिल्म ‘आएशा’ हो, ‘दिल्ली 6’ हो, ‘रांझणा’ हो अथवा ‘बेवकूफियां’. आप को कहीं कोई समानता नजर नहीं आएगी.

चर्चा है कि आप की निजी जिंदगी और फिल्म ‘खूबसूरत’ के किरदार में काफी समानता है?

मैं ईमानदारी से कहूं तो फिल्म की निर्माता और मेरी बहन रिया तथा निर्देशक व लेखक शशांक घोष मुझे इतनी अच्छी तरह जानते थे कि उन्होंने मेरे निजी जीवन के करैक्टर को फिल्म ‘खूबसूरत’ के मेरे किरदार में डाल दिया.

चर्चा है कि आप ने 80 के दशक की रेखा द्वारा अभिनीत फिल्म ‘खूबसूरत’ का रीमेक करवाया?

ऐसा कुछ नहीं है. हमारी यह फिल्म ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों से बस इंस्पायर्ड है.

जब यह फिल्म ‘खूबसूरत’ का रीमेक नहीं है, तो फिर इस का नाम ‘खूबसूरत’ क्यों रखा?

इस की सब से बड़ी वजह यह है कि इस फिल्म की कहानी खूबसूरत लोगों के बारे में है. यह ऐसे लोगों की कहानी है, जो दिखने में भले ही खूबसूरत न हों, पर उन का नेचर, उन की प्रकृति, उन का स्वभाव इतना खूबसूरत है कि वे दुनिया को भी खूबसूरत बना देते हैं. इस फिल्म के माध्यम से हम खूबसूरती की परिभाषा बदलना चाहते हैं. हम इस बात को रेखांकित करना चाहते हैं कि एक इंसान की आंखें, नाक, कान, चेहरा ठीकठाक हो, तो वह खूबसूरत लगे यह जरूरी नहीं है.आप दूसरों से कुछ अलग हैं, तो आप खूबसूरत हैं.

पर बौलीवुड में हीरोइन बनने के लिए तो चेहरे की खूबसूरती को महत्त्व दिया जाता है?

ऐसा कैसे कह सकते हैं? काजोल, परिणीति चोपड़ा ये सभी इतनी बड़ी हीरोइनें कैसे बन गईं? शाहरुख खान, अजय देवगन, आमिर खान ये सब भी खूबसूरत थोड़े ही हैं. फिर भी सफल हीरो हैं.

फिल्म ‘खूबसूरत’ के अपने किरदार को ले कर आप क्या कहेंगी?

मैं इस फिल्म में फिजियोथेरैपिस्ट डाक्टर मिली चक्रवर्ती का किरदार निभाया है. उस की परवरिश बहुत ही खुलेपन में हुई है. यह एक ऐसी लड़की है, जिस का अपने मातापिता से दोस्ताना रिश्ता होता है. मिली का अपनी मां के साथ वह रिश्ता नहीं है, जो निजी जिंदगी में उन की मां का अपनी मां के साथ था. मिली से उस की मां का रिश्ता बहुत अलग है. दरअसल, पीढि़यों का जो अंतर होता है, वह मिली के किरदार में नजर आता है. इस में यह दिखाया गया है कि वर्तमान पीढ़ी अपने मातापिता से हर तरह की बात कर लेती है. यह एक अमेजिंग रिश्ता है.

क्या मिली चक्रवर्ती का किरदार निभाने के लिए आप ने कोई ट्रेनिंग ली?

मैं अपनी हर फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले उस फिल्म के किरदार के लिए जरूरी ट्रेनिंग जरूर लेती हूं. बिना ट्रेनिंग मुझे नहीं लगता कि मैं अच्छा काम कर पाऊंगी. मिली चक्रवर्ती का किरदार निभाने के लिए मैं ने 2 फिजियोथेरैपिस्ट के साथ काम किया. उस के बाद मैं ने स्पोर्ट्स साइंटिस्ट करिश्मा बुलानी से ट्रेनिंग ली. उन्होंने मुझे 2 माह की ट्रेनिंग दी. इस के अलावा मैं ने काफी रिसर्च की.

क्या प्रिंस का किरदार निभाने के लिए कोई भारतीय कलाकार नहीं था, जो पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान को लेना पड़ा?

‘जिंदगी गुलजार है’ जैसे उन के कुछ सीरियल भारत में काफी लोकप्रिय हैं. 30 साल से अधिक उम्र की हर औरत उन की दीवानी है. फिल्म में नयापन लाने के लिए प्रिंस के किरदार के लिए फवाद खान को चुना गया. फवाद खान एक बेहतरीन रोमांटिक कलाकार हैं.

फवाद के साथ काम करते समय किस तरह की सहूलयत रही?

बहुत सहूलत रही. उस में बहुत तमीज है. सैट पर समय से पहुंचता. लड़कियों की तरफ बुरी निगाह से नहीं देखता. स्पौट बौय हो या निर्देशक हर किसी के साथ अच्छा व्यवहार करता. हर किसी से प्यार से बात करता. किसी को बुरा नहीं कहता. बहुत मृदुभाषी है. आजकल ऐसे लड़के मिलते ही कहां हैं.

चर्चा है कि आप ने किसी दक्षिण भारतीय फिल्म में अभिनय करने के लिए 5 करोड़ मांगे?

बकवास. इतने पैसे तो मैं पूरी जिंदगी में नहीं कमाऊंगी. जब मैं किसी फिल्म को न कहती हूं, तो निर्माता अपनी नाक बचाने के लिए कुछ तो कहेगा ही. मैं ने डेट्स न होने की बात कही थी.

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