गृहशोभा विशेष

25 साल से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले अभिनेता शाहरुख खान आज भी करोड़ो लोगों के चहेता कलाकार हैं. उनकी फिल्में अच्छी हो या बुरी हर कोई उसे एक बार देखना पसंद करता है यही वजह है कि 50 की उम्र पार करने के बाद भी वे फिल्में कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने हर तरह की फिल्मों में अभिनय किया है, पर उन्हें रोमांटिक फिल्में अधिक पसंद है. उन्होंने अभिनय की शुरुआत टीवी से की और धीरे-धीरे फिल्मों की ओर बढ़े.

साधारण कद-काठी के शाहरुख को कभी लगा नहीं था कि इतनी बड़ी स्टारडम उन्हें मिलेगी. वे खुद दर्शकों के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने उनके हर फिल्म को अपना प्यार दिया. ‘जब हैरी मेट सेजल’ के प्रमोशन के अवसर पर उनके बांद्रा स्थित आवास ‘मन्नत’ में उनसे मुलाकात हुई. पेश है अंश.

आप अभी भी इतने एनर्जेटिक दिखते हैं. वजह क्या है?

मैं खाना कम खाता हूं और काम अधिक करता हूं, इसलिए फिट रहता हूं. अगर अधिक खाना खाता हूं, तो मोटापा घेर लेगी और मैं काम नहीं कर पाऊंगा.

इस फिल्म में आपको खास क्या लगी कि आप इसे करने के लिए उत्साहित हुए?

हर फिल्म की एक कहानी होती है, जो धीरे-धीरे खुलती है, जिसमें प्यार, एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा, सॉन्ग आदि सब कुछ होता है. जिसे लोग एन्जॉय करते हैं. ये फिल्म कोई इश्यू पर आधरित फिल्म नहीं है. जैसा कि ‘चक दे’ या ‘दंगल’ फिल्में थीं. ये एक सिंपल लव स्टोरी है और मेरे हिसाब से लव स्टोरी से अच्छा कोई मैसेज नहीं है. फिर चाहे पति-पत्नी, लड़का-लड़की, पिता-बेटा, भाई-बहन कोई भी हो सकता है, क्योंकि प्यार ही किसी रिश्ते को जोड़कर रखती है.

आप एक वर्सेटाइल एक्टर हैं, लेकिन आपको किंग ऑफ रोमांस कहा जाता है, क्या आपकी बहुमुखी प्रतिभा किंग ऑफ रोमांस के नीचे दब नहीं जाती? क्या इस बारें में आप कभी सोचते हैं?

ऐसा मैं सोच सकता हूं, पर मैं सोचता नहीं, क्योंकि मुझे मालूम है कि मैं वर्सेटाइल एक्टर हूं. सालों पहले मैं जब अपने दोस्तों के साथ बैठा गप-शप कर रहा था तो पाया कि उस समय तक कुल 4 लव स्टोरी ही मैंने की है. ये सही है कि लव स्टोरी हमेशा सफल होती है. जो जिंदगी भर याद रहती है और मैंने शुरुआत में ऐसी लव स्टोरी की 3-4 फिल्में की है, जो क्लासिक बनीं और लोगों ने मेरा नाम किंग ऑफ रोमांस रख दिया. जबकि मेरी दूसरी फिल्में चक दे, स्वदेश, माय नेम इस खान, डॉन आदि भी चली थी. किंग ऑफ निगेटिव रोल से तो ये पदवी अधिक अच्छी ही है. 60 फिल्मों के रिकॉर्ड में बहुत सालों बाद मैं फिर से लव स्टोरी कर रहा हूं.

आप अपने और गौरी के रिश्ते के बारें में क्या कहना चाहेंगे? क्या विवाह को जरुरी मानते हैं?

हमारा रिश्ता अच्छा है, हमारे बच्चे हैं, जिसकी खुशी हमें मिलती है, लेकिन इसमें सामंजस्य बनाये रखना, एक दूसरे की ‘स्पेस’ को समझने की जरुरत होती है. मेरी जिंदगी बहुत पब्लिक है और इसे मेरी पत्नी और बच्चे समझते हैं और मेरी इज्जत करते हैं. ये अच्छी बात है, क्योंकि उन्हें पता है कि इस काम में ही मुझे खुशी मिलती है. ऐसे में अगर हम दोनों एक साथ थोड़ी देर भी बैठते हैं तो अच्छा महसूस करते हैं. हर किसी के लिए शादी और रिलेशनशिप का अर्थ अलग होता है. जिसमें दुख, खुशी, अनबन सबकुछ होता है. जो इसे जिस रूप में ले, वह उसके लिए सही है. कुछ लोगों को शादी पुराने रीति-रिवाज भी लगता है. मेरे हिसाब से दो लोगों को ऑफिस में दो घंटे साथ बैठने से भी प्यार हो सकता है. इसी को मैंने फिल्म ‘चलते-चलते’ में दिखाने की कोशिश की थी. वो कितना सही या गलत था मैं नहीं जानता, पर हर व्यक्ति अपने हिसाब से ही किसी रिश्ते को देखता है.

आपकी और गौरी में अच्छी सामंजस्य है, लेकिन कोई ऐसी आदत है जो गौरी को पसंद नहीं?

मेरी सिगरेट पीने की आदत, कम सोना, समय पर न खाना, सामान को व्यवस्थित न रखना, किसी जगह पर समय पर न पहुंचना आदि कई आदतें केवल पत्नी को ही नहीं बेटी को भी पसंद नहीं, लेकिन मैं क्या करूं अपनी आदत से मजबूर हूं. मैं वादा करता हूं, फिर भूल जाता हूं. उन्हें काफी शिकायत है, लेकिन अधिक सिरियस नहीं है.

आप पहले इतने कामयाब नहीं थें, लेकिन अब सुपर स्टार हैं, क्या कभी पुराने दिनों को याद करते हैं?

मैं पर्सनल लाइफ में बहुत अकेला रहता हूं. बच्चों, पत्नी और बहन के अलावा मेरी जिंदगी में कोई नहीं है. मुझे अधिक चीजों का शौक नहीं है. अगर मेरा परिवार कहीं बाहर जाता है और मैं काम नहीं कर रहा होता तो अकेला बैठा रहता हूं. ये सही है कि मैं अपने माता-पिता को ‘मिस’ करता हूं, अपने बचपन को कभी-कभी याद कर लेता हूं. इसके अलावा अधिक कुछ भी नहीं याद करता. असल में मैं हर पल में जीता हूं. 25 साल से मैं काम कर रहा हूं, तो यही जिंदगी मुझे अच्छी लगती है. माता-पिता की जगह मुझे बच्चे मिले. यादें यही है कि मैं उस समय खेलता और पढाई करता था. बाकी समय घर में ही बैठा रहता था. इस समय पब्लिक लाइफ में बदलाव आया है, क्योंकि अब लोग पहचानते हैं और वैसा व्यवहार करना पड़ता है, लेकिन पर्सनल लाइफ में मैं पहले जैसा ही हूं.

क्या काम के अलावा कुछ सामाजिक कार्य करने की इच्छा रखते हैं?

मैं समाज के लिए कुछ करते वक्त फोटो खिचवाना पसंद नहीं करता. मैंने अधिक सामाजिक कार्य किया भी नहीं है. ‘लेडीज टॉयलेट’ के लिए कुछ करने की कोशिश की थी, जिसका अभियान चल पड़ा है. मुझे महिलाओं से बहुत लगाव है. उनके लिए कुछ करना चाहता हूं, मेरी एक छोटी सी फाउंडेशन है, जिसके जरिये छोटा-छोटा काम करना चाहता हूं. काम के बाद उसे सबके सामने लाऊंगा, लेकिन तालियां और फोटो के लिए नहीं, बल्कि लोग मुझसे जुड़े ताकि मैं इसे और आगे बढ़ा सकूं. इसके अलावा मैं एसिड अटैक महिलाओं के लिए कुछ करने की इच्छा रखता हूं. मैं उन्हें स्वावलंबी बनाकर नौकरी देना चाहता हूं, ताकि वे अपने पांव पर खड़ी हो सकें. उन्हें मदद पैसे से नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहता हूं, क्योंकि मैं भी ‘सेल्फमेड’ हूं. सहानुभूति से अधिक उन्हें ये अच्छा लगता है कि लोग उन्हें बराबर का दर्जा दें, अपनी बेटी को भी इसमें शामिल करना चाहता हूं.

सुनने में आ रहा है कि आप महाभारत पर कुछ प्रोजेक्ट बनाने वाले हैं, इसमें कितनी सच्चाई है?

ये सही है कि मैं महाभारत पढ़ रहा हूं और इसे समझने की कोशिश कर रहा हूं. अभी कोई प्लान नहीं है, क्योंकि इसे लिखने के लिए एक जानकार लेखक की आवश्यकता है. इसके कई भाग मैं खुद नहीं जानता था, इसमें कही गयी कुछ कहानियां मुझे प्रेरित करती है. मैं इसपर नोट्स बना रहा हूं. बच्चों को भी मैं इसकी कहानियां पढ़ने और सुनने के लिए प्रेरित करता हूं.

आपने स्टारडम को कैसे देखते हैं? क्या कभी इस बात से डरते हैं कि ये खत्म हो जायेगा?

मैं इस बात पर अधिक सोचता नहीं. मैं अपनी दुनिया में रहना पसंद करता हूं. मैं चाहता हूं कि मेरी फिल्में अधिक चलें, केवल पैसे की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि दर्शकों को फिल्म पसंद आये और उसे वे हमेशा याद रखें. जैसा कुछ फिल्मों ने किया. आगे भी मैं ऐसी ही यादगार फिल्में बनाना चाहता हूं. स्टारडम न तो कोई बना सकता है, न ही बिगाड़ सकता है और न ही कायम रख सकता है. जिसे आप कर सकते हो वह है काम, जिसे आप बिगाड़, कायम और बना सकते हैं. उस पर अधिक ध्यान देता हूं. हर फिल्म को मैं चाहता हूं कि दर्शक पसंद करें और इतने महीने की सबकी मेहनत सफल हो. जब मेरी फिल्म नहीं चलती तो अगली फिल्म के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है और अगर फिल्म चल जाय तो उससे बेहतर बनाने की कोशिश चलती है. यही मेरा रूटीन है. इतनी स्टारडम तो मैंने कभी नहीं सोचा था.

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