शक्ति कपूर की बेटी व अभिनेत्री श्रद्धा कपूर निरंतर सफलता की ओर अग्रसर हैं. वैसे ‘रॉक ऑन 2’ और ‘ओ के जानू’ जैसी उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ चुकी हैं, मगर इससे उनके करियर पर कोई असर नहीं हुआ. वह लगातार सफलता की ओर अग्रसर हैं.

इन दिनों वह चेतन भगत के उपन्यास ‘‘हाफ गर्लफ्रेंड’’ पर आधारित इसी नाम की फिल्म में दिल्ली की अमीर लड़की रिया सोमानी का किरदार निभाकर काफी उत्साहित हैं. हाल ही में श्रद्धा कपूर से ‘‘सरिता’’ पत्रिका ने बातचीत की तो श्रद्धा कपूर ने कबूला की निजी जिंदगी में वह भी किसी की हाफ गर्लफ्रेंड रही हैं.

‘‘हाफ गर्लफ्रेंड’’ को कैसे परिभाषित करेंगी?

‘‘हाफ गर्लफ्रेंड’’ को परिभाषित करते हुए श्रद्धा कपूर ने कहा, ‘‘मेरी नजर में इस संसार में हर इंसान कई बार हाफ गर्लफ्रेंड या हाफ ब्वायफ्रेंड होता है. वास्तव में हमारी जिंदगी में तमाम ऐसे रिश्ते होते हैं, जिन्हें हम कोई नाम नहीं दे सकते. फिल्म ‘‘हाफ गर्लफ्रेंड’’ की ही तरह मेरा इस बात में यकीन है कि हमारी जिंदगी में एक वक्त वह भी आता है, जब कोई इंसान हमारे लिए दोस्त से बढ़कर होता है. लेकिन वह असल में प्रेमी नहीं होता है. वह दोस्त व प्रेमी के बीच कहीं होता है.’’

फिल्म ‘‘हाफ गर्लफ्रेंड’’ की टैग लाइन है, ‘‘दोस्त से ज्यादा गर्लफ्रेंड से कम’’. निजी जीवन में इस तरह के रिश्तों को कैसे देखती हैं?

मेरी राय में इस तरह की चीजें आज कल बहुत होने लगी हैं. क्योंकि आज की पीढ़ी किसी भी रिश्ते को लेकर कमिटमेंट नहीं करना चाहती या फिर आधा कमिटमेंट करना चाहती है. मैं भी निजी जिंदगी में ऐसे रिश्ते में थी, जहां मैं किसी की हाफ गर्लफ्रेंड रही हूं. क्योंकि उस वक्त मैं भी अपनी तरफ से आश्वस्त नहीं थी कि मैं कितना कमिटमेंट कर सकती हूं या यूं कह सकते हैं कि तब वक्त ठीक नहीं था. सच कहूं तो मुझे भी नहीं पता कि क्या वजहें थीं.

मेरी राय में आज की तारीख में इस तरह के अनुभव से ढेर सारे लोग गुजरते हैं. इसी के चलते हाफ गर्लफ्रेंड या हाफ ब्वॉयफ्रेंड की सिच्युएशन आ जाती है. इसके पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं. हो सकता है कि लड़का कमिटमेंट करना चाहता हो, पर उसके माता पिता इस रिश्ते के खिलाफ हों या लड़की के माता पिता खिलाफ हों या जाति व धर्म का मसला हो.

आप निजी जिंदगी के अपने रिश्ते को लेकर क्यों श्येर नहीं थी. किस तरह की समस्या थी?

मुझे पता नहीं था कि मुझे अपनी जिंदगी में क्या चाहिए. सच कहूं तो मैं अभी भी उसी को खोज रही हूं. फिल्मों में भी बहुत व्यस्त हूं.

क्या खुद को तलाशना आसान है?

मेरे ख्याल से खुद को तलाशना बहुत मुश्कि होता है. खुद को जानना आसान नहीं होता है. हम सभी इस गलतफहमी में रहते हैं कि हम अपने आपको बहुत अच्छी तरह से जानते व समझते हैं.