निर्माता निर्देशक जोड़ी अब्बास मस्तान का नाम आते ही ‘‘बाजीगर’’,‘‘खिलाड़ी’’, ‘‘रेस’’,‘ ‘सोल्जर’’,‘‘किस किस को प्यार करूं” जैसी कई सफलतम फिल्मों की याद आती है. यह वह अब्बास मस्तान है, जिन्होंने ‘बाजीगर’ से शाहरुख खान, ‘सोल्जर’ से बॉबी देओल, ‘खिलाडी’ से अक्षय कुमार और ‘रेस’ से सैफ अली के करियर को उंचाईयों पर पहुंचाया. मगर जब उन्होंने अपने बेटे मुस्तफा बर्मावाला के अभिनय करियर की शुरूआत के लिए फिल्म ‘‘मशीन’’ बनाई, तो फिल्म बॉक्स आफिस पर चारों खाने चित हो गयी. फिल्म ‘मशीन’ 1300 स्क्रीन्स में प्रदर्शित हुई है, मगर 26 करोड़ की लागत में बनी यह फिल्म दो दिन में डेढ़ करोड़ रूपए भी नहीं कमा पायी. जबकि उपरी सतह पर जो तस्वीर नजर आ रही है, उसे देखते हुए अब्बास मस्तान ने अपनी तरफ से कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी.

उन्होंने फिल्म ‘‘मशीन’’ को जॉर्जिया की खूबसूरत लोकेशनों में फिल्माया. फिल्म व बेटे के प्रचार के बॉलीवुड के बहुत बड़े प्रचारक की सेवाएं ली. एक फिल्म पत्रिका का पूरा एक अंक अपनी फिल्म व अपने बेटे के लिए लाखों रूपए अदाकर सुरक्षित करवाया. इस फिल्म पत्रिका के एक खास अंक के सभी 40 पन्ने मुस्तफा व अब्बास मस्तान को महिमा मंडित करते हुए भरे गए. मुंबई के कुछ अंग्रेजी अखबारों में भी ‘पेड इंटरव्यू’ छपवाए गए. मगर अफसोस की बात यह रही कि इसका एक प्रतिशत का भी फायदा फिल्म ‘‘मशीन’’ या मुस्तफा बर्मावाला को नहीं मिला. और अब इसके लिए पूरी तरह से अब्बास मस्तान को ही दोषी ठहराया जा रहा है.

फिल्म ‘‘मशीन’’ के लिए अब्बास मस्तान स्वयं ही जिम्मेदार हैं. बॉलीवुड के बिचौलिए सवाल उठा रहे हैं कि कई सफल फिल्म निर्देशित कर चुके अब्बास मस्तान ने अपने बेटे के करियर की फिल्म के लिए अति कमजोर कहानी व अति कमजोर पटकथा का चयन कैसे किया? उन्हें तो हर कलाकार को पर्दे पर बेहतरीन तरीके से पेश करने का अनुभव है, फिर वह अपने बेटे मुस्तफा के सपाट चेहरे क्यों नहीं समझ कर उस कमी को छिपाने के रास्ते क्यों नहीं अपनाए? बेटे करियर को संवारने के लिए फिल्म में बड़े कलाकार को जोड़ने से क्यों बचे?

तो दूसरी तरफ अब्बास मस्तान के करीबी तो यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि फिल्म के प्रचार के लिए पानी की तरह धन बहाने के बावजूद वह फिल्म को सही ढंग से प्रचारित क्यों नहीं कर पाए? क्या अब्बास मस्तान ने यह फिल्म किसी सोची समझी रणनीति के तहत बनायी और एक रणनीति के ही तहत अपनी फिल्म के प्रचारक को हिदायत देकर फिल्म को प्रचारित करवाया? फिल्म ‘मशीन’ व मुस्तफा बर्मावाला को लेकर उन अखबारों में कुछ नहीं छपा, जिन अखबारों में छपने से दर्शक मिलते हैं. सर्वविदित है कि मुंबई के चंद अंग्रेजी अखबारों में छपने मात्र से दर्शक नहीं मिलते हैं.

फिल्म के प्रति दर्शकों का ध्यान आकर्शित करने के लिए हिंदी भाषी अखबारों पर ध्यान देना पड़ता है. मगर देश के करीबन तीन दर्जन से ज्यादा हिंदी के बड़े अखबारों में ‘मशीन’ व मुस्तफा को लेकर एक शब्द नहीं छपा. कई बड़ी पत्रिकाओं से भी मुस्तफा को मिलने नहीं दिया गया? इस सच से अब्बास मस्तान अनभिज्ञ हों, यह कौन यकीन करेगा?

बहरहाल, अब लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि अब्बास मस्तान अपने बेटे मुस्तफा के लिए दूसरी फिल्म शुरु करते हैं या बेटे के अभिनय करियर पर ताला लगवाते हैं?