गृहशोभा विशेष

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को पूरी उम्मीद थी कि फिल्म ‘मेरी कौम’ के लिए उन्हें ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कंगना राणावत बाजी मार गईं. इसीलिए प्रियंका ने फिल्म निर्माण में उतरने और फिल्म ‘मैडमजी’ का निर्माण करने से तोबा कर वे अमेरिकन टीवी सीरियल ‘क्वांटिको’ और इंटरनैशनल संगीत जगत में अपनी पैठ बनाने पर ज्यादा जोर दे रही हैं. वैसे वे संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ कर रही हैं. मगर इस फिल्म में प्रियंका रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के बाद तीसरे नंबर पर हैं. उन के लिए सुकून की बात यह है कि वे प्रकाश झा की फिल्म ‘गंगाजल-2’ में मुख्य भूमिका निभा रही हैं.

पेश हैं, प्रियंका से हुई मुलाकात के कुछ खास अंश :

अमेरिकन सीरियल ‘क्वांटिको’ का ट्रेलर बाजार में आ चुका है. किस तरह का रिस्पौंस मिल रहा है?

अच्छा रिस्पौंस मिल रहा है. इस में अमेरिकन नागरिक और एफबीआई एजेंट के रूप में मुझे देख कर लोग यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि क्या यह मैं ही हूं. मगर यह सच है कि फिलहाल मैं बहुत नर्वस हूं. ‘क्वांटिको’ के सिर्फ एक ही ऐपिसोड की शूटिंग की है, जिस का ट्रेलर आप ने देखा होगा. ‘गंगाजल-2’ व ‘बाजीराव मस्तानी’ की शूटिंग पूरी करने के बाद जुलाई माह में मैं अमेरिका जाने वाली हूं. मैं ने फिल्म ‘डौन’ में जो अभिनय किया था, उस की वजह से मुझे अमेरिकन टीवी सीरियल में एफबीआई एजेंट का किरदार निभाने में काफी मदद मिली. जुलाई में हम ‘क्वांटिको’ के 13 ऐपिसोड की शूटिंग करेंगे. टीवी पर इस का प्रसारण सितंबर माह में शुरू होगा. यदि अच्छा रिस्पौंस मिला तो हम बाद में 14 से 28 ऐपिसोड फिल्माएंगे अन्यथा नहीं.

‘बाजीराव मस्तानी’ में आप का किरदार काफी छोटा है?

सभी को पता है कि यह फिल्म बाजीराव व मस्तानी की प्रेम कहानी है. इन दोनों की प्रेम कहानी के बीच में ही काशीबाई का किरदार है, तो यह महत्त्वहीन नहीं हो सकता. काशीबाई का किरदार काफी संजीदा किरदार है. ‘7 खून माफ’ फिल्म के बाद मुझे इस तरह का किरदार निभाने का अवसर मिला है.

‘गंगाजल-2’ में क्या कर रही हैं?

यह फिल्म कुछ वर्ष पहले रिलीज हुई फिल्म ‘गंगाजल’ का सीक्वल है. इस में जो किरदार अजय देवगन ने निभाया था, लगभग वही मैं निभा रही हूं. इस में मैं पुलिस सुपरिटैंडैंट आभा माथुर का किरदार निभा रही हूं, जो बहुत कड़क पुलिस अफसर है. ‘गंगाजल-2’ की कहानी बहुत ही समसामयिक है. इस फिल्म में भ्रष्टाचार, लैंड माफिया जैसे बहुत से मुद्दे हैं, जिन से लोग रिलेट करेंगे. एक पुलिस अफसर का भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना हमेशा न्यायोचित ही होता है. इस वजह से इस फिल्म को ले कर मैं बहुत उत्साहित हूं.

क्या इस किरदार के लिए कोई खास तैयारी की है?

यों तो लेखक व निर्देशक ने पहले से ही बहुत रिसर्च कर रखी थी, फिर भी कई पुलिस अफसरों से मिली हूं. महिला पुलिस अफसरों की जिंदगी कैसी होती है, इसे मैं ने बहुत नजदीक से देखा है. भारत जैसे पुरुषप्रधान समाज में एक महिला पुलिस अफसर होना बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि भारत में लोग महिलाओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं.

आप ने हालिया प्रदर्शित फिल्म ‘दिल धड़कने दो’ में रणवीर सिंह की बहन का किरदार निभा कर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया?

मैं शुरू से इस बात को मानती आई हूं कि इमेज को नहीं बनाना चाहिए. मेरी जिंदगी में बहुत कुछ अपनेआप होता रहा है. सब कुछ आप की कठिन मेहनत पर निर्भर करता है. इसलिए मुझे जो काम मिलता है, मैं उसे बड़ी मेहनत से करती हूं. फिर जब मैं मेहनत करूंगी तो स्वाभाविक तौर पर उस के परिणाम अच्छे ही मिलेंगे. यदि आप मेहनत नहीं करेंगे, सिर्फ तकदीर के भरोसे बैठेंगे, तो कुछ हासिल नहीं होगा.

मगर रणवीर सिंह की बहन का किरदार…?

कोई तकलीफ नहीं, कोई हिचक नहीं. कलाकार का काम है हर तरह का किरदार, हर सहकलाकार के साथ निभाना. फिल्म ‘गुंडे’ में हम गर्लफ्रैंड और बौयफ्रैंड थे, ‘दिल धड़कने दो’ में भाईबहन हैं और फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ में पतिपत्नी के किरदार में नजर आएंगे. रणवीर सिंह बहुत बेहतरीन सहकलाकार हैं.

क्या वजह है कि आप आजकल ऐसे किरदार निभा रही हैं, जिन्हें आमतौर पर हीरोइनें निभाने से डरती हैं?

मेरे साथ शुरू से ही ऐसा रहा है. जब मैं ने फिल्म ‘फैशन’ में अभिनय किया था, उस वक्त लोगों ने कहा था कि एक हीरोइन उस वक्त इस तरह की फिल्म करती है, जब उस का कैरियर खत्म हो रहा हो. जब मैं ने फिल्म ‘एतराज’ की थी, तो लोगों ने कहा कि वैंप बन कर रह जाओगी. लोगों ने कहा कि अब हीरोइन के किरदार नहीं मिलेंगे. मगर मेरी हमेशा कोशिश रही है कि लड़कियों को गंभीरता से लिया जाए. इसीलिए मुझे अनुष्का की फिल्म ‘एनएच10’ या दीपिका की ‘पीकू’ फिल्में पसंद आती हैं. कंगना की ‘तनु वैड्स मनु’, ‘क्वीन’ तथा ‘तनु वैड्स मनु रिटर्न्स’ की मैं प्रशंसक हूं. आप मेरी फिल्म ‘मैरी कौम’ को देखें. अब बौलीवुड में उन फिल्मों को सफलता मिल रही है, जिन में अभिनेत्रियों बौलीवुड की चिरपरिचित अंदाज वाली हीरोइनों से अलग नजर आती हैं. इसी वजह से हम महिला कलाकारों को समसामयिक बना दिया है.

कहा जा रहा है कि कंगना राणावत आप के व दीपिका पादुकोण के लिए खतरा बन चुकी हैं?

सच यह है कि हम हीरोइनें एकदूसरे को सपोर्ट करती हैं. हम एकदूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं मानती हैं. आज का दर्शक भी समझदार है. हम सभी सशक्त किरदार निभा रहे हैं. दर्शक अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं. मुझे गर्व है कि लड़कियां होने के बावजूद हमें इज्जत मिल रही है.

फिल्म ‘मैरी कौम’ से आप को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार की अपेक्षा थी. लेकिन आप को यह अवार्ड नहीं मिल पाया?

अवार्ड न मिलने पर दुख होता है. मगर हमारी फिल्म ‘मैरी कौम’ को कई नैशनल अवार्ड मिले. सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नैशनल अवार्ड ‘क्वीन’ के लिए कंगना को मिला, तो मुझे खुशी ही हुई, क्योंकि वे इस अवार्ड की हकदार थीं. यदि उन्हें भी नहीं मिलता तो ज्यादा बुरा लगता.

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