सैफ अली खान इन दिनों अपकमिंग फिल्म ‘कालकांडी’ की शूटिंग कर रहे हैं. कुछ टाइम पहले ही सैफ का फर्स्ट लुक सामने आया है जिसमें वो काफी वियर्ड लुक में नजर आ रहे हैं इस वजह से सैफ काफी सुर्खियों में हैं. वैसे लुक से सुर्खियां क्रिएट करने की बात करें तो इस मामले में सैफ की मां शर्मिला टैगोर भी पीछे नहीं रहीं. उन्होंने भी अपने बिकिनी लुक से खूब सनसनी फैलाई थी. शर्मिला की साल 1967 में आई फिल्म ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ में बिकिनी और स्विमसूट पहने, जिसके पोस्टर उस दौरान हर जगह छाए रहे थे.

किस वजह से बिकनी पोस्टर को लेकर टेंशन में आ गई थीं शर्मिला

ये बात तब की है जब शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान पटौदी का अफेयर चर्चा में था. मुंबई में जगह-जगह ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ के बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हुए थे जिनमें शर्मिला बिकनी पहने हुए थीं. तभी एक दिन शर्मिला को पता चला कि मंसूर अली खान पटौदी की मां उनसे मिलने मुंबई आ रही हैं.

इस बात को लेकर शर्मिला इतनी टेंशन में आ गईं कि उन्हें नहीं आ रहा था कि वो क्या करें. सूर की मां से मिलने से ज्यादा शर्मिला को इस बात की चिंता कि उनकी मां ने बिकनी वाले होर्डिंग देख लिए तो क्या होगा? कहीं वो उन्हें रिजेक्ट तो नहीं कर देंगी? क्या वो अपने बेटे से शर्मिला की शादी होने देंगी? इन सवालों से शर्मिला बेहद परेशान हो गईं.

शर्मिला को खुद हटवाने पड़े बिकिनी पोस्टर

जहां शर्मिला को कुछ समझ नहीं आ रहा था तो वहीं मंसूर को उनके बिकिनी पोस्टर्स से कोई प्रॉब्लम नहीं थी क्योंकि वो उनके प्रोफेशन की जरूरतों को समझते थे. शर्मिला को जब कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने अपनी उस फिल्म के प्रोड्यूसर को फोन किया और मुंबई की हर जगह से अपनी बिकिनी वाले पोस्टर हटवा दिए.

देखा जाए तो शर्मिला टैगोर ने अपने और मंसूर अली खान के रिश्ते को बचाने की हर संभव कोशिश की और इसमें वो कामयाब भी रहीं. बाद में शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान पटौदी की शादी हो गई. मंसूर की मां को भी शर्मिला काफी पसंद आईं.

हम आपको बता देना चाहते हैं कि शर्मिला का जन्म बंगाली फैमिली में 8 दिसंबर, 1944 को हुआ था. शर्मिला ने अपने करियर की शुरुआत 15 साल की उम्र में बंगाली फिल्म ‘अपूर संसार’ के जरिए साल 1959 में की थी.

5 साल बाद फिल्म ‘कश्मीर की कली’ के जरिए उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री की और जल्द ही ऑडियंस की फेवरेट बन गईं. शर्मिला को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है.  शर्मिला ने अपने फिल्मी करियर में आराधना, दाग, मौसम, अमर प्रेम और चुपके-चुपके जैसी कई यादगार फिल्में दी हैं. 2013 में उन्हें ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था.

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