साल 2006 में छोटे पर्दे की धारावाहिक ‘क्योंकि सांस भी कभी बहू थी’ में लक्ष्य वीरानी के नाम से चर्चित हुए अभिनेता पुलकित सम्राट दिल्ली के हैं. अभिनय की शुरुआत उन्होंने माडलिंग से की. उनका फिल्मी कैरियर फिल्म ‘बिट्टू बौस’ से शुरू हुई जो खास सफल नहीं रही. उन्हें पहचान फिल्म ‘फुकरे’ से मिली, जिसमें उन्होंने ‘हनी’ की भूमिका निभाई.

पुलकित स्वभाव से शांत हैं, पर जो बात उन्हें पसंद नहीं उसपर गुस्सा भी खूब करते हैं. उन्होंने साल 2014 में अपनी गर्लफ्रेंड श्वेता रोहिरा से शादी की, जो साल 2015 में टूट गयी. अभी वे अपने आपको सिंगल कहते हैं. पुलकित फिल्म ‘फुकरे रिटर्न’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं. पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश.

किसी फिल्म की सीक्वल में काम करना कितना मुश्किल होता है?

ऐसी फिल्में करने के बाद अगर फिल्म बौक्स औफिस पर सफल रही, तो सारे कलाकारों को फिर से अपने आप को और अधिक ‘ग्रो’ कर आगे आने में मदद मिलती है. ये सही है कि ऐसे में चुनौती पहले से अधिक बढ़ जाती है और हर कलाकार अपनी बेस्ट देने की कोशिश करता है, लेकिन एक्टिंग प्रोफेशन के लिए मैं इसे अच्छा मानता हूं.

किसी भी चरित्र को करने में आपकी कितनी मेहनत होती है?

किसी भी फिल्म की कहानी पहले से तैयार होती है और निर्देशक का एक विजन होता है. उसमें मैं हर तरीके से पहले चरित्र को समझ कर फिर उसपर मेहनत करता हूं और कोशिश ये रहती है कि हर भूमिका में मैं फ्रेश दिखूं, किसी अभिनय को रिपीट न करूं.

कौमेडी में नेचुरल हंसी को लाना कितना मुश्किल होता है? ऐसी फिल्मों को चुनते समय आप किस बात का ध्यान रखते हैं?

नैचुरल हंसी को लाना मुश्किल होता है, लेकिन अगर साथी कलाकार सही टाइमिंग को पकड़ ले, तो कौमेडी सही होती है और लोग हंसते हैं. इसमें जरा सी भी कमी बोरियत लाती है. मैं जब भी कौमेडी फिल्म की स्क्रिप्ट सुनता हूं, तो मुझे अंत तक अगर हंसी आती है, तो मैं उसे साईन करता हूं.

आप किस तरह की फिल्मों में अभिनय करना पसंद करते हैं?

मैं हर तरह की फिल्मों में काम करना पसंद करता हूं. खासकर कौमेडी हमेशा मन को तरोताजा बनाती है. इसके अलावा मुझे हौरर फिल्में पसंद है. कुछ फिल्मों को मैं बार-बार देखना पसंद करता हूं, जैसे ‘जाने भी दो यारों’, ‘अंदाज अपना अपना’ ये ऐसी फिल्में हैं जो बहुत अलग अंदाज में बनी कौमेडी फिल्में हैं. इसके अलावा ‘हेरा फेरी’, ‘ओय लकी लकी ओय’ भी मैंने कई बार देखा है.

लगातार कौमेडी फिल्में करते रहने से क्या कुछ नयी तरह के अभिनय मिलना मुश्किल नहीं होता?

मैंने केवल कौमेडी ही नहीं, रोमांटिक फिल्में भी की है. एक्शन फिल्में अब करने की इच्छा है. मैं हर तरह की फिल्मों में काम करना चाहता हूं. कुछ अधिक अभिनय करने के बाद ही समझ पाऊंगा कि मैं किसमें फिट बैठता हूं. मुझे अभी बहुत सीखना बाकी है और अपने सिनियर से मैं हमेशा सीखता रहता हूं.

आप दिल्ली के हैं, लेकिन मुंबई में काम करते हैं, दोनों शहरों में क्या अंतर पाते हैं?

गृहशोभा विशेष

दिल्ली में अगर शूटिंग करनी हो, तो बहुत मुश्किल होती है, क्योंकि वहां लोग सुनते नहीं. इसकी वजह यह है कि वहां हर स्थान से कोई नेता जुड़ा है और उनसे शूटिंग के लिए परमिशन लेनी पड़ती है इसलिए उनके जानने वाले को मना करना मुश्किल होता है. मुंबई ऐसा नहीं है, कहीं भी शूटिंग करना आसान होता है.

आप एंग्री यंग मैन के नाम से जाने जाते हैं, इसकी वजह क्या है? आपको इतना गुस्सा क्यों आता है?

लोग मुझे ठीक से जानते नहीं है, इसलिए ऐसा नाम देते हैं. जो बात हुई थी, तब मैंने गुस्सा किया था. अब नहीं करता. झूठ बोलने वाले इंसान को मैं पसंद नहीं करता.

बौलीवुड में तो निर्माता, निर्देशक कुछ कहते हैं और होता कुछ है, कितने ‘चेक’ तक बाउंस हो जाते हैं, ऐसे में आप अपने आप को कैसे सम्भालते हैं?

ये सही है, उनके साथ कई बार कहासुनी हो जाती है, लेकिन जो सही नहीं उसे मैं नहीं मानता. अगर मैं अभिनय में कुछ गलत करता हूं, तो उसे भी मैं मानता हूं.

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