2008 में ‘मिस फ्रैश’ का खिताब जीतने वाली अभिनेत्री तापसी पन्नू ने फिल्मी कैरियर की शुरुआत तेलुगु फिल्म से की. बचपन से उन्हें अभिनेत्री बनने का शौक नहीं था. दिल्ली की रहने वाली तापसी सौफ्टवेयर इंजीनियर हैं. पढ़ाई के दौरान बीचबीच में शौकिया तौर पर मौडलिंग करती थीं. उन की शुरू से कुछ अलग करने की इच्छा थी, लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, क्योंकि मौडलिंग करते हुए ही उन्हें कुछ फिल्मों के औफर भी आ रहे थे, जिन में दक्षिण के अलावा हिंदी फिल्में भी शामिल थीं. साउथ इंडियन फिल्में करने के दौरान ही तापसी को डेविड धवन की फिल्म ‘चश्मेबद्दूर’ में काम करने का मौका मिला. फिल्म औसत रही और तापसी को भी कोई खास पहचान नहीं मिली.

इस के बाद आई फिल्म ‘बेबी’, जिस में तापसी की भूमिका छोटी जरूर थी, मगर दमदार थी. इस में न सिर्फ उन के काम को सराहा गया, बल्कि उन के किरदार को ले कर ‘बेबी’ की प्रीक्वल फिल्म ‘नाम शबाना’ भी बनी. तापसी कहती हैं कि यह उन के लिए बड़ी बात थी. सीक्वल तो कई फिल्मों के बने मगर प्रीक्वल पहली बार बना. फिर उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. फिल्म ‘पिंक’ में सीरियस किरदार ‘जुड़वां टू’ में कौमेडी किरदार जैसे रूप में दर्शकों को अपनी बहुमुखी प्रतिभा से परिचित कराया.

हरदम सीखती हैं तापसी

हमेशा फिल्म के जरीए कोई मैसेज देना पसंद करती हैं. वे कहती हैं, ‘‘मैं ने गिरगिर कर काम करना सीखा है और यह सीख मैं ने फिल्मों में लागू की और सफल रही. मेरा यहां कोई गौडफादर नहीं है, जो मुझे संभाल ले. यह सही है कि बाहर से आने वाले कलाकार को मौका मिलने में मुश्किल होती है और एक हिट फिल्म से आप स्टार नहीं बन सकते. लगातार आप को परदे पर दिखते रहना चाहिए. मैं ने भी इसे ही फौलो किया. कोई भी गलती करने पर आप को दूसरी फिल्म का मिलना मुश्किल होता है. इसलिए सावधानी से कदम बढ़ाने पड़ते हैं.’’

तापसी का मानना है कि भारत की क्षेत्रीय फिल्म इंडस्ट्री की तुलना में हिंदी सिनेमा बहुत बड़ा है. बिना किसी गौडफादर या हिंदी फिल्म में अभिनय किए बिना यहां काम मिलना थोड़ा मुश्किल है. यहां अपनी पहचान बनाने का बस एक ही फार्मूला है कि छोटे से छोटे अवसर को भी भुनाने की कोशिश की जाए यानी छोटे काम में भी अपना 100 प्रतिशत दे कर काबीलियत साबित की जाए.

VIDEO : कलरफुल डॉटेड नेल आर्ट

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