गृहशोभा विशेष

गोलमटोल चेहरा और आंखों में मासूमियत लिए धीरेधीरे चलते हुए जब केविन सामने आए तो देख कर एकबारगी भी यह नहीं लगा कि यह गोलमटोल शरीर वाला लड़का 10 वर्षों से इंडस्ट्री में जमा हुआ है. मुंबई के रहने वाले केविन ने ऐक्टिंग की शुरुआत बतौर चाइल्ड ऐक्टर ऐड फिल्मों से की. इस दौरान पढ़ाई पूरी करने के लिए वे 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ऐक्टिंग से दूर हो गए लेकिन ऐक्टिंग का जनून उन्हें बहुत दिनों तक अभिनय से दूर नहीं रख सका. ग्रेजुएशन करने के बाद ही केविन फिल्मों में काम तलाशने लगे. 2008 में आई पहली डैब्यू फिल्म ‘मुंबई मेरी जान’ से शुरू हुआ उन का फिल्मी सफर आज तक जारी है. कई गुजराती व हिंदी फिल्मों में अपनी अदाकारी के जलवे दिखा चुके केविन इस समय सोनी सब टीवी के कौमेडी शो ‘सात फेरों की हेराफेरी’ में काम कर रहे हैं. पेश हैं हाल ही में उन से हुई बातचीत के अंश :

इंडस्ट्री में ऐक्टिंग के साथ फिटनैस भी जरूरी है, आप कैसे इसे मैनेज करते हैं?

मैं बचपन से ही ऐसा हूं. यही कारण है कि मैं सब से अलग नजर आता हूं, लेकिन मैं ने अपने मोटापे को कभी भी अपनी कमजोरी नहीं माना. इंडस्ट्री में भी मुझे मेरे शरीर को देखते हुए किरदार औफर होते हैं. मुझे विश्वास है कि जैसे ही लोग मेरी ऐक्टिंग देखते हैं उन का ध्यान मेरे शरीर से हट कर मेरी ऐक्टिंग पर आ जाता है, क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में लंबी रेस के लिए शरीर नहीं, अच्छी ऐक्टिंग की जरूरत होती है. इंडस्ट्री में अमजद खान, भारती सिंह, टुनटुन व गुड्डी मारुती जैसे कई कलाकार ऐसे हुए हैं जिन्होंने मोटापे के बावजूद ऐक्टिंग से नाम कमाया.

ऐक्टिंग की फील्ड में ऐंट्री कैसे हुई?

मेरी परवरिश मुंबई में हुई है. जब मैं छोटा था तब बाल कलाकार के तौर पर मैं ने कई ऐड फिल्मों और टीवी शोज में काम किया. इसलिए कैमरा फेस करना मेरे लिए नई बात नहीं थी. लेकिन जब ऐक्टिंग का असर मेरी पढ़ाई पर पढ़ने लगा तब मैं ने 10वीं के बाद ऐक्टिंग छोड़ दी. लेकिन स्कूलकालेज के थिएटर से हमेशा जुड़ा रहा.

ग्रेजुएशन के बाद जब कैरियर की बारी आई तो मैं ने ऐक्टिंग को ही कैरियर बनाने की सोची, क्योंकि मैं इस से बचपन से जुड़ा था. उसी दौरान मैं पृथ्वी थिएटर से जुड़ गया और सत्यदेव दुबे के साथ अपना पहला प्ले ‘खुदा के लिए मत देखो’ किया. थिएटर के साथसाथ मैं फिल्मों के लिए औडिशन भी देने लगा, तभी मुझे फिल्म ‘मुंबई मेरी जान’ मिली. इस फिल्म  के बाद कैरियर की गाड़ी ने रफ्तार पकड़ ली.

फिल्मों में सक्रियता के बावजूद टीवी की शरण में क्यों आना पड़ा?

कोई खास वजह नहीं थी, लेकिन हर कोई चाहता है कि उस के काम को अधिक लोग देखें. टीवी के दर्शकों की संख्या आज काफी ज्यादा है, इसलिए टीवी पर काम कर रहा हूं. एक बात और बताऊं आप को, मैं ने टीवी पर बहुत कम काम किया है. यह मेरा तीसरा शो है. इस से पहले मैं ने टीवी शो ‘सियासत’ और ‘क्या कुसूर अमला का’ किया था. एक वैब सीरीज भी की है.

टीवी पर ज्यादा काम न करने की मेरी एक वजह यह भी है कि मैं सालोंसाल चलने वाले डेलीसोप में काम नहीं कर सकता, क्योंकि एक ही किरदार को सालों तक निभाना मेरे लिए टेढ़ी खीर है.

टाइपकास्ट होने का डर तो नहीं लगता?

डर तो लगा रहता है, लेकिन क्या करें फिल्मों में लोग मुझे उसी फनी लुक में देखना पसंद करते हैं. हालांकि कुछ फिल्मों में मैं ने अपना किरदार चेंज भी किया है. ‘क्रुक’ फिल्म में मेरा किरदार ग्रे शेड का था. ‘क्या कसूर अमला का’ में भी अलग किरदार था, लेकिन सभी में अभी तक मुझे स्लो किरदार ही औफर हुए हैं. मुझे खुद भी लव स्टोरी वाले कैरेक्टर ज्यादा पसंद नहीं हैं, लेकिन एकजैसे रोल औफर होने से टाइपकास्ट होने का डर तो लगा ही रहता है.

थिएटर में किस तरह के किरदार निभाने पसंद हैं?

थिएटर मेरी पहली पसंद है और मैं इस में फुल ऐक्सपैरिमैंट करता हूं. एक प्ले में मैं ने सोल्जर का तो एक में 11 साल के बच्चे का किरदार निभाया है. थिएटर ऐसी जगह है जहां आप को अपनी क्रिएटिविटी दिखाने के हजारों मौके मिलते हैं. यहां पूरी लिबर्टी होती है. मैं एनएसडी में भी परफौर्म कर चुका हूं. यहां ‘जश्ने बचपन’ इवैंट में ‘जंगल बुक’ प्ले किया था. मुझे कौमेडी से ज्यादा सीरियस किरदार निभाना पसंद है, लेकिन मेरे शरीर को देखते हुए ऐसे रोल कम ही औफर होते हैं.

अभिनय के हिसाब से आप को कौन सा मीडियम पसंद है?

फिल्म, टीवी, ऐड, वैब, थिएटर आदि जितने भी ऐक्टिंग मीडियम हैं, सब एकदूसरे से अलग हैं. जब आप थिएटर करते हैं तो आप के काम का फीडबैक तुरंत मिलता है. टीवी और फिल्म में काम करना थोड़ा आसान होता है, क्योंकि यहां आप को काम करने का पर्याप्त मौका मिलता है, लेकिन 30 सैकंड की ऐड फिल्म में आप को अपना 100 परसैंट देना होता है. वह मीडियम भी आसान नहीं है. मेरे हिसाब से सब से टफ मीडियम थिएटर है, जिस में बिना किसी ब्रेक और एडिटिंग के काम करना होता है और यहां सिर्फ आप के काम से आप की पहचान होती है.

आगे कौमेडी ही करनी है या कुछ और आप ने सोचा है?

अच्छे व चुनौतीपूर्ण किरदार मिलें तो मैं उन्हें करने को तैयार हूं. मैं ने पहले भी कहा कि मुझे सीरियस किरदार पसंद हैं, मैं लोगों को रुलाना भी चाहता हूं, हंसाना भी चाहता हूं और गुस्सा भी दिलाना चाहता हूं.

लड़कियों से दूर ही रहता हूं

शर्मीले शांत स्वभाव के केविन को देख कर नहीं लगता कि वह फिल्मों में अपनी ऐक्टिंग से धमाल मचा सकते हैं. गर्लफ्रैंड के बारे में पूछने पर केविन थोड़ा शर्माते हैं और कहते हैं कि मैं गर्लफ्रैंड, रोमांस के मामले में बहुत गरीब हूं. कोशिश तो बहुत की लेकिन मंजिल अभी तक नहीं मिली.

शेखर सुमन से बहुत सीखने को मिला

केविन कहते हैं शो ‘सात फेरों की हेराफेरी’ में शेखर सुमन के साथ काम करने पर बहुत कुछ सीखने को मिला. मुझ से वह बहुत सीनियर हैं, लेकिन कभी भी सैट पर हम लोगों को ऐसा नहीं लगा कि वह बहुत सीनियर हैं. मैं उन से कभी भी डिस्कशन कर लेता हूं. शूटिंग पर वे ही अकेले शख्स हैं जो सब को बांधे रखते हैं.

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