साल 1991 से ‘सौदागर’ फिल्म में कदम रखने वाली अभिनेत्री मनीषा कोईराला से कोई अपरिचित नहीं. फिल्मी बैकग्राउंड से न होने के बावजूद उन्होंने हर तरह की भूमिका निभाकर इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनायीं. नम्र और हंसमुख स्वभाव की मनीषा ने इंडस्ट्री में एक से एक बेहतरीन फिल्में की और कई पुरस्कार भी जीते. उनकी फिल्म ‘अग्नि साक्षी’ और ‘खामोशी’ ने मनीषा को उस दौर की लीड हीरोइनों में शामिल कर लिया था. उन्होंने कई लो बजट की फिल्में भी की और पुरस्कार जीते. मनीषा अभिनेत्री होने के साथ-साथ फिल्म निर्माता भी हैं.

मनीषा की शादी नेपाली व्यवसायी सम्राट दहाल से साल 2010 को हुई थी, लेकिन यह जोड़ी अधिक दिनों तक टिक नहीं सकी और दो साल बाद दोनों ने तलाक ले लिया. साल 2012 में मनीषा ओवरी कैंसर से पीड़ित हो गयी, जिसका इलाज उन्होंने मुंबई और अमेरिका में करवाया और अब एक नई जिंदगी जी रही हैं. अभी वह फिर से पर्दे पर आ रही हैं. फिल्म ‘संजू’ में उन्होंने नर्गिस की भूमिका निभाई है. पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश.

प्र. आप नर्गिस की जीवनशैली से कितनी परिचित हैं और फिल्म के दौरान संजय दत्त से कोई बातचीत हुई?

मैंने उनकी कई फिल्में देखी है और उनके अभिनय से काफी प्रभावित हूं, लेकिन उनकी भूमिका मुझे निभानी पड़ेगी ये पता नहीं था. फिल्म में मुझे एक अभिनेत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक मां की भूमिका निभानी पड़ी. उसके लिए मैंने निर्देशक से काफी चर्चा की और प्रिया दत्त के द्वारा दी गयी एक किताब से मुझे उनके बारे में जानने का मौका मिला. नहीं, मैंने संजय दत्त से अधिक बात नहीं की, मैंने निर्देशक को फोलो किया है.

प्र. आपने बहुत सारे अच्छी-अच्छी फिल्में की है,क्या आप अपनी जर्नी से संतुष्ट हैं?

जब मैं 20 साल की थी, तो मेरा कैरियर ‘पीक’ पर था और अब मेरी दूसरी पारी में भी दर्शकों का सहयोग मिल रहा है. यह मेरे लिए बड़ी बात है. मैं बहुत खुश हूं.

प्र. पहले और आज के निर्देशकों के साथ काम करने में कितना अंतर महसूस करती हैं?

पहले तो लोग अच्छा काम करते ही थे, पर आज के निर्देशकों के साथ काम करने का एक अलग अनुभव है, आज के निर्देशकों के पास कमाल के आइडिया हैं. पहले एक निश्चित दायरे में काम होता था, पर आजकल प्रयोगात्मक फिल्में काफी बन रही हैं. आज टीवी, वेब सिनेमा आदि सब बन रहे हैं. कलाकारों को भी काम करने का खूब मौका मिल रहा है. मेरे हिसाब से अभी इंडस्ट्री का सबसे अच्छा दौर चल रहा है.

प्र. क्या इस उम्र में इतने बड़े बेटे की मां की भूमिका निभाकर आप खुश हैं?

मैं टाइप कास्ट होने से परेशान नहीं होती. अपनी उम्र के हिसाब से भूमिका निभाना चाहती हूं. सुंदर दिखना, कम उम्र का दिखना आदि पर मैं विश्वास नहीं करती, क्योंकि इसे करते हुए आप कब अपनी सीमा पार कर गए हैं, आपको पता नहीं होता और वह आपके शरीर के लिए खतरनाक साबित होता है. मेरे हिसाब से जैसे-जैसे उम्र होती जाये, उसे उसी रूप में स्वीकारते जाएं और वही आपके लिए अच्छा होता है. उम्र को हमेशा ‘ग्रेसफुली’ लेना चाहिए.

प्र. आपने कई अच्छे- अच्छे निर्देशकों के साथ काम किया है, कैसा अनुभव रहा?

हर निर्देशक अपने हिसाब से कहानी कहता है, मुझे अच्छे निर्देशक के साथ काम करने का मौका भी मिला, लेकिन मुझे मणिरत्नम और संजय लीला भंसाली के साथ काम करने का अलग ही अनुभव रहा है. वे कहानी को कविता के रूप में कहते हैं, जो बहुत अच्छा लगता है. इसके अलावा मैंने विनोद चोपड़ा के साथ जब काम किया तो उनसे ही अभिनय भी सीखा है.

प्र. क्या आप अपनी लाइफ पर फिल्म बनाना चाहती हैं?

अभी कहना मुश्किल है, क्योंकि इस बारे में सोचा नहीं है, हालांकि मैं अपनी लाइफ के बारे में किताब लिख रही हूं.

प्र. आप जिंदगी को कैसे देखती हैं?

जिंदगी बहुत ही अच्छी है, हम जिन्दा हैं और स्वस्थ हैं. एक ऐसे प्रोफेशन में काम कर रहे हैं, जिससे हमें मोहब्बत है. मैं बहुत ग्रेटफुल हूं. इसमें मैंने सकारात्मक बातों को अधिक महत्व दिया है और अच्छी बातों को याद रखा है. मैं खुलकर जिंदगी को जी रही हूं.