मूल रूप से अमृतसर, पंजाब की रहने वाली भारती सिंह स्टार वन पर आने वाले ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज सीजन 4’ की सेकेंड रनरअप रहीं, जहां वह लल्ली बन कर आईं थी. बाद में उन्होंने कॉमेडी के कई शोज में काम किया.

सैलिब्रिटी डांस रिऐलिटी शो ‘झलक दिखला जा’ में भी एक प्रतियोगी के तौर पर आईं. पहली महिला स्टैंडअप कौमेडियन के रूप में भारती अपनी जिंदगी को सिंड्रैला की कहानी जैसी मानती हैं.

वे अपनी मां से बहुत अटैच हैं. 2 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था. वे कहती हैं, ‘‘मैंने कभी नहीं जाना कि पापा का प्यार कैसा होता है? उनकी डांट कैसी होती है? इसलिए शादी के बाद यह तय है कि मैं अपने ससुर को बहुत प्यार करूंगी ताकि अपने पापा की कमी पूरी कर सकूं.’’

भारती कलर्स चैनल पर आने वाले शो ‘कॉमेडी नाइट लाइव’ में चिंटू बन कर लोगों को हंसा रही हैं. आइए, जानते हैं उन की जिंदगी के बारे में थोड़ा करीब से:

क्या आप घर में भी इसी तरह जौली मूड में रहती हैं?

बिलकुल, घर में भी मैं जौली मूड में रहती हूं. मैं ही क्या, मुझ से कहीं ज्यादा मेरी मां जौली मूड में रहती हैं. सच तो यह है कि यह क्वालिटी मुझे अपनी मां से ही मिली है. जब मैं घर जाती हूं तो वे खूब मजेदार बातें करती हैं. ऐसी बातें, जो मुझे बहुत पसंद हैं.

घर में सब आप को लल्ली के रूप में पसंद करते हैं या चिंटू के रूप में?

बचपन की चिंटू और लल्ली ही आज भारती बन गई है. सब मुझे हर रूप में पसंद करते हैं. मैं बहुत मस्तीखोर हूं, लेकिन घर में ज्यादा बोलने या मस्ती करने का समय ही नहीं मिलता. ज्यादातर मैं घर वालों को सोता छोड़ कर आती हूं. सुबह 7 बजे घर से निकल जाती हूं और शाम 5 बजे के बाद ही पैकअप होता है. संडे के दिन भी व्यस्त रहती हूं.

कॉलेज के दिनों में कैसी थीं भारती?

मैं कॉलेज में बहुत सीधी-सादी थी. बोलती अधिक थी पर ऍक्टर नहीं थी. राइफल शूटर थी. यह शौक काफी महंगा था. मगर इच्छा यही रहती थी कि मैं शूटिंग में जाऊं. आज मैं शूटिंग करती तो हूं, बस स्टाइल बदल गया है. राइफल शूटिंग के बजाय कॉमेडी शूटिंग करने लगी हूं.

फिर इस क्षेत्र में कैसे आना हुआ?

कॉमेडी के मेरे गुरु कपिल शर्मा, सुदेश लहरी, राजीव ठाकुर वगैरह मेरे कॉलेज में यूथ फैस्टिवल में आते थे. उन्हें मेरी आवाज पसंद आई थी. ‘लाफ्टर चैलेंज सीजन 4’ के समय उनके कहने पर मैंने इंटरव्यू दिया और मेरा चयन हो गया.

कोई ऐसा लमहा जब आप कमजोर पड़ गई हों?

2008 में मैं लाफ्टर चैलेंज में हिस्सा लेने मुंबई आई थी. हमें होटल में ठहराया गया था. मैं अपनी मां के साथ थी. उसी दौरान मां को अल्सर हो गया. उस दिन वे आईसीयू में थीं और मुझे परफॉरमेंस देने जाना था. मुझे बहुत बुरा लग रहा था. तब मां ने मुझ से कहा कि जा और सब को हंसा. मैंने मन को कड़ा किया. शो तो होना ही था. मैं स्टेज पर गई. ध्यान मां की तरफ लगा था. फिर भी दिल से परफॉर्म किया. सब को बहुत हंसाया. मुझे स्टैंडिंग ओवेशन मिला. सब ने मेरी बहुत तारीफ की. हॉस्पिटल आई तो मां की तबीयत भी बेहतर थी.

आप को डांस करना ज्यादा पसंद है या कॉमेडी?

मुझे दोनों ही बहुत पसंद हैं. मैं अमृतसर से हूं. पंजाबी वैसे ही नाचगाना पसंद करते हैं. फिर कॉमेडी तो मेरा पैशन है ही. तभी तो ऐंट्री लेती हूं, तो डांस करते हुए ताकि दोनों इच्छाएं पूरी हो जाएं.

किसी को डेट कर रही हैं?

नहीं, अभी ऐसा कुछ नहीं है. पर मेरा मानना है कि प्यार और शादी करना कहीं से भी गलत नहीं. इसलिए जब प्यार करूंगी तो बिंदास सब को बताऊंगी इस बारे में. जो अफवाहें उड़ी थीं, मुझे बहुत बुरा लगा था. आखिर जिस टीम के साथ आप हमेशा रहती हैं, घर भी आसपास हो तो उस के साथ आनाजाना

तो होगा ही न.

अपने जीवनसाथी में कैसे गुण चाहती हैं? वह जौली नेचर का होना चाहिए या सीरियस?

मुझे चुप रहने वाले शख्स पसंद हैं. जीवनसाथी ऐसा हो जो मेरी सुने, क्योंकि मैं बहुत बोलती हूं. मैं चाहती हूं कि मेरा जीवनसाथी मुझे समझने वाला हो, सपोर्टिव हो. यदि मैं अपनी कमाई परिवार को दूं तो वह कुछ बोले नहीं. मुझे अपने परिवार का ध्यान रखना है. वह मेरे साथ मेरे परिवार को भी सपोर्ट करे.

गृहशोभा पढ़ती हैं?

बिलकुल पढ़ती हूं. बहुत अच्छी और पुरानी पत्रिका है. यदि मुझे कोई नाम देना हो तो मैं इसे पत्रिकाओं का ‘अमिताभ बच्चन’ कहना चाहूंगी. इस में प्रकाशित कहानियां, लेख, पाठकों की समस्याएं, टिप्स वगैरह सब काफी दिलचस्प होते हैं.