गृहशोभा विशेष

दिल्ली के सभ्रांत परिवार में जन्मीं पूजा ने मौडलिंग से अपने कैरियर की शुरुआत की. टीवी धारावाहिक ‘महाभारत’ में द्रौपदी का किरदार निभा रही पूजा स्वभाव से हंसमुख व जिंदादिल हैं. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के कुछ अंश:

ऐक्टिंग की शुरुआत

द्रौपदी की भूमिका मिलना सपने के सच होने जैसा था. हालांकि मैं ने ऐसी कोई भूमिका करने के बारे में पहले कभी नहीं सोचा था, लेकिन थिएटर और परफौर्मिंग आर्ट की तरफ मेरा रुझान शुरू से था. अपने कालेज के दिनों मैं स्पोर्ट्स पर आधारित एक टौक शो के लिए चुन ली गई. उस में परफौर्म करने के बाद मुझे लगा कि शो में मैं बहुत खराब थी, लेकिन टीम में से किसी ने कहा कि एक ऐंकर के तौर पर मैं ने अच्छा काम किया. फिर कुछ ऐंकरिंग, औडिशंस के बाद मुझे बतौर ऐंकर उस में परफौर्म करने के बाद चुन लिया गया. ऐंकरिंग के बाद मैं ने कुछ टीवीसी और रैंप वाक किया. मुझे लगता है कि दिल्ली से मुंबई तक का मेरा सफर आसान रहा. मुझे टैलीविजन जौइन करने में बहुत मुश्किल नहीं हुई. सब कुछ बहुत आसानी से होता गया. मुझे खुशी है कि मुझे ‘महाभारत’ में काम करने का मौका मिला.

मैं द्रौपदी के लंबे केशों से प्रभावित हूं, इसीलिए मैं हर वाश के पहले अपने केशों में तेल लगाती हूं और कंडीशनर का प्रयोग जरूर करती हूं.

अपने किरदार के लिए मुझे लंबे समय तक मेकअप करने की जरूरत होती है, इसलिए यह मेरे लिए जरूरी है कि मैं अपना मेकअप अच्छी तरह उतारूं और क्लींजिंग, टोनिंग और मौइश्चराइजिंग का रोज प्रयोग करूं. मेरा मानना है कि आप का चेहरा आप के व्यक्तित्व का आईना होता है, इसलिए मैं सही खाने और बहुत सारा पानी पीने पर ध्यान देती हूं.

खुशनुमा याद

धारावाहिक ‘महाभारत’ में द्रौपदी की भूमिका पाना मेरी जिंदगी का खुशनुमा पल है. मेरे मातापिता को मुझ पर गर्व है. जब मैं उन के चेहरे पर मुसकान देखती हूं तो वह पल भी मेरे लिए बेहद खुशनुमा और खूबसूरत होता है.

साधारण और जिंदादिल

मैं इंडस्ट्री में नई हूं इसलिए नहीं कह सकती किस के सब से करीब हूं. लेकिन हां, ‘महाभारत’ टीम के कुछ सदस्यों से मेरी दोस्ती हो गई है. मैं बहुत पढ़ाकू हूं और उस दौरान किताबें पढ़ती हूं. इस के अलावा दोस्तों के साथ मस्ती करती हूं और फिल्में भी देखती हूं.

किसी दोस्त या किसी अच्छी फिल्म से अलग अच्छा साहित्य मेरे तनाव को सब से अच्छे तरीके से दूर करता है.                

मुसकान ही असली खूबसूरती

मेरा मानना है कि मुसकराते हुए इंसान को मेकअप की जरूरत नहीं होती. उस की मुसकान ही यह बताती है कि आप कितनी खूबसूरत हैं. मेरे मातापिता को मुझ पर गर्व है. जब मैं उन के चेहरे पर मुसकान देखती हूं तो वह पर मेरे लिए बेहद खूबसूरत होता है.

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