गृहशोभा विशेष

बौलीवुड से जुड़े लोग इस बात की चर्चा करते नजर आ रहे हैं कि किन स्टार्स की फिल्मों ने 2016 में सौ करोड़ रुपए से ज्यादा कमाए. मगर हर कोई इस मसले पर चुप है कि कौन सी फिल्में दर्शकों तक नहीं पहुंच पायी. जब कि हर फिल्मकार चाहता है कि उसकी फिल्म दर्शकों तक पहुंचे, फिर उसे पसंद करना या न करना दर्शकों के हाथ में है. मगर कुछ फिल्में आपसी विवादों या स्टार कलाकारों की अपनी जिद के चलते सिनेमाघर तक नहीं पहुंच पायी. यानी कि इन्हे इनका मुकम्मल जहां नहीं मिल पाया.

मोहल्ला अस्सीः 30 करोड़ कौन दे?

‘चाणक्य’ जैसा बहुचर्चित सीरियल और ‘पिंजर’ जैसी फिल्म निर्देशित कर चुके निर्देशक डॉ.चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ तमाम मशक्कतों के बावजूद दर्शकों तक नहीं पहुंच पायी.

सनी देओल के अभिनय से सजी विनय तिवारी निर्मित यह फिल्म कुछ समय तक निर्माता, निर्देशक व अभिनेता सनी देओल के बीच आपसी विवाद के कारण फंसी रही. उसके बाद 2015 के अंतिम चरण में यह फिल्म इंटरनेट पर लीक हो गयी. 2016 में सनी देओल ने फिल्म को थिएटरों में ले जाने के लिए प्रयास शुरू किए, मगर यह फिल्म नहीं पहुंच सकी. इसकी सबसे बड़ी वजह रही फिल्म के प्रदर्शन में लगने वाला खर्च देने को कोई तैयार नहीं था.

सूत्र बताते हैं कि फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ को दर्शको तक पहुंचाने के लिए करीबन 30 करोड़ रूपए चाहिए, मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह राशि कौन दे? इसके लिए कोई स्टूडियो भी तैयार नहीं है. बतौर अभिनेता सनी देओल की हालत इतनी पतली है कि इस फिल्म में कोई भी स्टूडियो पैसा नहीं लगाना चाहता. उधर फिल्म में इतनी गाली गलौज है कि सेंसर बोर्ड भी इसमें काफी कैंची चलाना चाहती है.

बैंक चोरः रितेश देशमुख का अड़ियल रूख

‘यशराज फिल्मस’ निर्मित फिल्म ‘बैंक चोर’में रितेश देशमुख और विवेक ओबेरॉय की अहम भूमिकाएं हैं. यह फिल्म 2015 में ही पूरी हो गयी थी. लेकिन रितेश देशमुख के अड़ियल रवैऐ के चलते यह फिल्म प्रदर्शित नहीं हो पा रही है. वास्तव में फिल्म के प्रदर्शन से पहले फिल्म का प्रचार भी करना जरुरी है, मगर रितेश देशमुख फिल्म के प्रचार के लिए समय नहीं दे रहे हैं.

सूत्रों के अनुसार रितेश परिवार में किसी के बीमार होने और उसके लिए समय देने की बात कहकर ‘बैंक चोर’ के प्रमोशन के लिए समय नही दे रहे हैं. मगर रितेश 2016 में ही फिल्म ‘बैंजो’ को प्रमोट कर चुके हैं.

कुछ सूत्र दावा कर रहे है कि हिंदी फिल्में में अपने करियर की हालत पतली देख वह निराश हैं, जबकि मराठी फिल्मों में वह काफी अच्छा काम कर रहे हैं. इसलिए इन दिनों वह अपनी होम प्रोडक्शन की मराठी फिल्म पर ध्यान दे रहे हैं. जबकि एक सूत्र का दावा है कि ‘बैंजो’ के असफल होने के बाद ‘यशराज फिल्मस’ को अब उस वक्त का इंतजार है जब रितेश की कोई फिल्म सफल हो, तब वह इस फिल्म को प्रदर्शित करना चाहते हैं.

उधर इस फिल्म के प्रदर्षित न होने से विवेक ओबेरॉय परेशान हैं. विवेक ओबेरॉय को फिल्म ‘बैंक चोर’ से काफी उम्मीदे हैं. वह बतौर निर्माता भी फिल्म शुरू करना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि फिल्म ‘बैंक चोर’ के प्रदर्शन से उन्हें फायदा होगा. पर रितेश फिल्म प्रमोट करने के लिए तैयार ही नहीं हैं.

टीना और लोलोः सनी लियोन का खत्म होता करियर

सनी लियोन और करिश्मा तमन्ना के अभिनय से सजी कम बजट की फिल्म ‘टीना और लोलो’ को खरीददार नही मिल रहा है. इसकी मूल वजह है सनी लियोन का खत्म होता करियर. सनी लियोन की ‘सिंह इज ब्लिंग’, ‘मस्तीजादे’, ‘वन नाइट स्टैंड’, ‘फुड्डू’ के बॉक्स ऑफिस पर बुरी तह मात खाने के बाद अब कोई भी वितरक या स्टूडियो उन फिल्मों में पैसा नहीं लगाना चाहता, जिनमे सनी लियोनी हैं.

किसी तरह फिल्म ‘बेईमान लव’ के फिल्मकार राजीव चौधरी ने कमीशन के आधार पर इसे प्रदर्शित किया था. पर उन्होंने भी अपनी जेब से पैसा गंवाया. उसके बाद से सनी लियोन की ‘टीना और लोलो’ के प्रदर्शन पर हमेशा के लिए सवालिया निशान लग गया है तथा अब कोई भी फिल्मकार सनी लियोन को लेकर फिल्म नहीं बनाना चाहता. अब वह बड़े बजट की फिल्मों में सिर्फ डांस नंबर कर रही हैं.

कैबरेः पूजा और भूषण में मतभेद

पूजा भट्ट और भूषण कुमार द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित अति बोल्ड फिल्म ‘कैबरे’ के निर्देशक कौस्तुभ नारायण नियोगी हैं. फिल्म में रिचा चड्ढा व गुलशन देवैय्या की अहम भूमिकाएं हैं. इस फिल्म का प्रदर्शन पूजा भट्ट और भूषण कुमार के बीच आपसी विवाद के चलते नहीं हो पा रहा है. इसके प्रदर्शन की दो बार तारीखें तय हुई, मगर दोनों बार प्रदर्शन टल गया.

मॉडर्न देवदासः पैसे की कमी

‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘चमेली’ सहित कई चर्चित फिल्मों के सर्जक सुधीर मिश्रा की किसी भी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल नहीं मचाया. इसी के चलते अब उनकी नई फिल्म ‘मॉडर्न देवदास’ प्रदर्शित नहीं हो पा रही है. सुधीर मिश्रा इसे अपनी अति महत्वाकांक्षी फिल्म बताते हैं. वह इस फिल्म का नाम 2-3 बार बदल चुके हैं. सुधीर मिश्रा ने 10 करोड़ रूपए खर्च कर फिल्म का निर्माण तो कर लिया है, मगर अब इसे प्रदर्षित करने के लिए उन्हे 8 करोड़ रूपए की जरुरत है, मगर कोई भी वितरक या स्टूडियो उनकी इस फिल्म पर एक रुपया भी नहीं लगाना चाहता.

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