सीरियल ‘‘रिश्तों का बाजीगर’’ में पति पत्नी के किरदार में नजर आ चुके वत्सल सेठ और इशिता दत्ता अब निजी जिंदगी में भी पति पत्नी बन चुके हैं. मगर इशिता दत्ता सेठ लगातार फिल्मों में अभिनय कर रही हैं. उनकी मानव भल्ला निर्देशित नई फिल्म ‘‘लश्तम पश्तम’’ दस अगस्त को प्रदर्शित होगी, जो कि दिवंगत अभिनेता ओम पुरी के अभिनय से सजी अंतिम फिल्म है..पर इशिता अपने वैवाहिक जीवन से काफी खुश हैं. उनकी राय में फिल्मों में दिखाए जाने वाले प्रेम व निजी जिंदगी के प्रेम में काफी अंतर होता है.

एक खास मुलाकात के दौरान इशिता दत्ता सेठ ने शादी के बाद जीवन में आए बदलाव की चर्चा करते हुए कहा-‘‘दो चीजें बदली. पहला सरनेम बदला और दूसरा घर का पता बदल गया. इसके अलावा कोई बदलाव नहीं आया. मैं हमेशा अपने माता पिता के साथ रही हूं. अकेले रही नहीं, इसलिए मुझे अकेले रहना पसंद नहीं है.’’

वह आगे कहती हैं- ‘‘शादी के बाद ससुराल में भी मुझे सपोर्ट मिल रहा है, जब मैं घर से बाहर काम करने निकलती हूं, तो घर पर काम करने की जिम्मेदारी मेरे पति वत्सल सेठ ले लेते हैं. सास ससुर भी लेते हैं. मेरे सास ससुर हमारी बिल्डिंग में उपर मंजिल पर रहते हैं. पर हमारा बहुत ध्यान रखते हैं. अभी मैं यहां आपसे बात करने आयी हूं, तो उन्होंने मुझे मैसेज किया कि कहां हो और उन्होंने मेरी तस्वीर मांगी. जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर डालते हुए लिखा कि, ‘मेरी बहू मीडिया से बात करने गयी है.’ तो वह भी मेरे काम में रूचि लेते है.’’

शादी के बाद प्यार के मायने की चर्चा करते हुए इशिता ने कहा- ‘‘फिल्मों में जो प्यार दिखाया जाता है, वह वास्तव में प्यार नहीं है. जिंदगी में प्यार के मायने होते हैं आपसी समझदारी और शादी को निभाने की समझ. वैवाहिक जीवन हो या कोई भी रिश्ता हो, उसे सफल बनाने के लिए समझौते करने पड़ते हैं. समझौते करना गलत नहीं है. अभी मेरी शादी को छह माह हुए हैं. ज्यादा कुछ बोल नहीं सकती. मेरे पति वत्सल सेठ कहते हैं- ‘कई बार पति पत्नी दोनों की गलती नहीं होती है, फिर भी हालात बिगड़ते हैं. ऐसे में दोनों में से किसी एक को सौरी बोल देना चाहिए.’ तो मैंने अपने पति वत्सल सेठ से सौरी बोलना सीख लिया है.

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