गृहशोभा विशेष

समय के साथसाथ न केवल फैशन बदलता है बल्कि उस को पेश करने का अंदाज भी बदल जाता है. कुछ साल पहले फैशनपरस्त लोगों की पहली पसंद बुटीक हुआ करता था, लेकिन अब बड़ेबड़े डिजाइनरों ने अपने डिजाइनर स्टूडियो खोल लिए हैं जहां हर कोई अपनी पसंद की ड्रैस डिजाइन कराना चाहता है. यह कोशिश भी रहती है कि उस का डिजाइन, कट्स और कलर कहीं और न मिल सके. ऐसे में बड़े डिजाइनर स्टूडियो अपने ब्रैंड की कीमत वसूल करते हैं, जिस से ड्रैस की कीमत बढ़ जाती है. दिल्ली ’निफ्ट’ से फैशन डिजाइनिंग सीखने के बाद लखनऊ निवासी दीपिका चोपड़ा ने अपना खुद का डिजाइनर स्टूडियो खोलने का सपना देखा.

डिजाइनर स्टूडियो की शुरुआत कोई आसान काम नहीं था. इस के लिए दीपिका ने सब से पहले अपनी डिजाइन की ड्रैसेज की प्रदर्शनी लगाने का फैसला किया. इस के लिए उस ने समर सीजन का चुनाव किया. दीपिका ने समर ड्रैसेज की प्रदर्शनी लखनऊ में लगाई. इस में उस ने फैब्रिक के रूप में कौटन का उपयोग किया और कूल दिखने वाले कलर्स का प्रयोग किया. नैट और शिफौन का जरूरत के हिसाब से प्रयोग कर कुछ नए डिजाइन की ड्रैसेज तैयार कीं. दीपिका ने इस के लिए युवतियों और टीनएज गर्ल्स को सामने रख कर काम किया. उसे यह नहीं पता था कि लोग कैसे उस की प्रदर्शनी से प्रभावित होंगे. इस के बाद भी उसे अपनी ड्रैस डिजाइनिंग पर पूरा भरोसा था. इस प्रदर्शनी को लोगों ने न केवल सराहा बल्कि खूब खरीदारी भी की. इस से दीपिका का हौसला बढ़ा.

दीपिका कहती हैं, ’’प्रदर्शनी लगाने के बाद मुझे पता चल गया कि मेरी बनाई ड्रैसेज लोग पसंद कर रहे हैं और मुझे लगा कि अब अपना डिजाइनर स्टूडियो खोलने का वक्त आ गया है. इस के लिए पूंजी की जरूरत भी थी. सब से मुश्किल काम जगह को तलाश करना भी था. मेरे लिए आसान बात यह थी कि मेरे घर में एक हिस्सा ऐसा था, जहां मैं अपना डिजाइनर स्टूडियो खोल सकती थी. मेरे घर की लोकेशन भी महानगर में थी, जहां तक लोगों को पहुंचना आसान था. मैं ने अपने घर वालों से बात की और मुझे घर में ही डिजाइनर स्टूडियो खोलने की अनुमति मिल गई.’’

दीपिका के लिए मुश्किल काम अपने डिजाइन किए कपड़ों की सिलाई करना था. अगर सिलाई अच्छी न हो तो अच्छे से अच्छा कपड़ा और अच्छे से अच्छा डिजाइन भी कोई खास प्रभाव नहीं डालता. इस के लिए दीपिका ने अच्छी सिलाई करने वाले कारीगरों का चुनाव किया और उन्हें कुछ दिन टिप्स दिए.

दीपिका ने यह पता करना शुरू किया कि किस तरह का कपड़ा किस बाजार में सस्ता और अच्छा मिलता है. दिल्ली, जयपुर, कोलकाता और मुंबई के बाजारों को उस ने देखा व समझा. इस तरह से दीपिका ने अपना डिजाइनर स्टूडियो ‘आल्यूर’ खोलने की पूरी तैयारी कर ली.

दीपिका कहती है, ’’प्रदर्शनी में जिन ड्रैसेज को हम रखते थे, वह इंडियन और वैस्टर्न ड्रैस का फ्यूजन होता था. इस में सलवारकुरते को स्टाइलिश बनाने के लिए जैकेट को जोड़ा, इसे युवाओं ने खूब पसंद किया. साड़ी को डिजाइनर लुक देने के लिए उस में नैट और कढ़ाई का बेहतर प्रयोग किया. डिजाइनर स्टूडियो में मेरा फोकस ब्राइडल ड्रैस पर था. हम ने इसी तरह से इस को तैयार भी किया था. जरदौजी, पुराना रेशम वर्क और मुकैश का सहारा ले कर कुछ नई ड्रैसेज तैयार कीं. ब्राइडल ड्रैस का थोड़ा ग्लैमरस लुक भी दिया. मेरा बनाया अनारकली सूट लोगों को बहुत अच्छा लगा.’’

दीपिका को शादी में केवल दुलहन की ड्रैस ही तैयार करने को नहीं मिली बल्कि लड़की की मां, बहन और उस की सहेलियों की ड्रैस तैयार करने का भी मौका मिला. दीपिका कहती है, ’’आज शादी का समारोह ड्रैस के हिसाब से भी खास होने लगा है. अब लोग दुलहन की ड्रैस के साथ मैच करते कलर और अलग डिजाइन की ड्रैस पहनना चाहते हैं. ऐसे में एक ही जगह ड्रैस तैयार होने से उन की इच्छा पूरी करना संभव हो जाता है. ड्रैस दुलहन से पूरी तरह से मैच भी नहीं करती और एक जैसी भी दिखती रहती है. इसे ’वैडिंग ट्रूजो’ के नाम से जाना जाता है. अब दुलहन के साथ के लोग भी अपनी पसंद की ड्रैस पहनते हैं, जिस से फोटोग्राफी में बेहतर लुक आ सके.’’

दीपिका कहती है,’’देखा जाए तो पहले यह काम मुश्किल था. इस के लिए पैसा भी ज्यादा खर्च करना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. बड़े डिजाइनरों के भारी कीमत वाली ड्रैसेज के मुकाबले काफी कम कीमत में ड्रैस मिल जाती है. इसलिए इस को महंगा नहीं कहा जा सकता है. हमारे पास दुबई, यूएसए और यूके के ग्राहक भी हैं. वे अब वहां बस गए हैं. विदेशों में भी जब कोई ऐसा कार्यक्रम होता है, तो यह लोग इंडियन साड़ी और लहंगा जरूर पहनना चाहते हैं. वे लोग हम से ऐसे कपड़े डिजाइन कराते हैं. कई बार तो ऐसा होता है कि लोग बड़े डिजाइनर या फिर किसी फिल्मी स्टार की ड्रैस को दिखा कर कहते हैं कि ऐसी ड्रैस तैयार करवा दो. तब उन्हें समझाना पड़ता है कि जो दूसरों पर अच्छा लग रहा है जरूरी नहीं कि आप पर भी अच्छा लगे.’’ 

अपने काम से संतुष्टि के लिए दीपिका कहती है, ’’मुझे इस बात की खुशी है कि मैं ने किसी कंपनी में नौकरी करने के बजाय अपना डिजाइनर स्टूडियो खोला. 3 साल में मुझे अच्छा काम मिलने लगा है. जैसेजैसे लोगों की फैशन के प्रति सोच और नजरिया बदल रहा है, इस बिजनैस के अवसर भी बढ़ रहे हैं. आप देखें तो बड़ेबड़े ब्रैंड छोटेछोटे शहरों की ओर भाग रहे हैं. इन के स्टोर में लोगों की जरूरत के हिसाब से बहुतकुछ तैयार नहीं हो पा रहा है. मुझे लगता है, फैशन वही है जिसे हम आरामदायक तरीके से पहन सकें. शायद यही कारण है कि वैस्टर्न डिजाइन तैयार करने वालों को भी अब इंडियन लुक का ध्यान रखना पड़ रहा है.’’

दीपिका का मानना है कि इंडियन साड़ी, सलवारसूट और लहंगे में बहुत सारे बदलाव हो रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे. इन इंडियन ड्रैसों को पहनने का क्रेज कम नहीं हो रहा है. बड़ी से बड़ी पार्टी में भी इंडियन साड़ी का अलग लुक चर्चा में रहता है. ड्रैस की कीमत पर दीपिका का कहना है कि ड्रैस की कीमत तय करते समय हम उस के फैब्रिक, स्टिचिंग और डिजाइनिंग का ध्यान रखते हैं. कीमत उतनी होती है, जितनी खरीदते समय ज्यादा न लगे. इस बिजनैस में भी पब्लिसिटी का अपना महत्त्व है. इस के बाद भी जब ग्राहक खुश हो कर जाता है, तो अपने दूसरे कस्टमर को भी लाता है, हां, लेकिन ऐसे काम करने से पहले इस से जुड़ी जानकारी और पढ़ाई करना भी बेहद जरूरी होता है.

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