ग्लोबलाइजेशन की वजह से आज फैशन की दुनिया काफी आगे निकल गई है. आज हर कोई जानता है कि उसे कब कौन सा परिधान पहनना है. इसी बात को ध्यान में रख कर फैशन शो का आयोजन किया जाता है. इन में फैशन डिजाइनर तरहतरह के कपड़े डिजाइन कर मौडलों द्वारा प्रदर्शित करवाते हैं. वे कोशिश करते हैं कि उन के द्वारा तैयार किए गए कपड़े उपयोगिता की दृष्टि से ही ठीक नहीं, बल्कि दिखें भी अच्छे. इस बार लैक्मे फैशन वीक समर रिसोर्ट का 15वां आयोजन था. इस में राघवेंद्र राठौर, सब्यसाची मुखर्जी, अनीता डोंगरे, श्रुति संचेती, दिव्या सेठ, मयंक आनंद, श्रद्धा निगम, गौरांग, सौमित्र मंडल आदि करीब दर्जन भर डिजाइनरों ने अपन कपड़े अलगअलग ढंग से पेश किए.

कढ़ाई का अद्भुत संगम

इस अवसर पर दिव्या सेठ ने ‘सफारी सुलताना’ पर्यावरण फ्रैंडली फैब्रिक से रौयल टच दिया, जिस में कलमकारी, हथकरघा वस्त्रों पर कढ़ाई का अद्भुत संगम रहा. उन के फ्लौवरी कलर लोगों को बेहद पसंद आए. ढीला कुरता, पाजामा, पलाजो पैंट, लौंग कुरता, स्कार्फ सभी नए लुक में थे. ‘इंगलिश गार्डन’ के नाम से रैंप पर अपना कलैक्शन उतारने वाले कोलकाता के डिजाइनर सौमित्र मंडल कहते हैं कि उन्होंने प्रकृति को प्रमुख केंद्र बनाया, जो मौसम के साथ बदलता रहता है. इस में उन्होंने पैरिस और न्यूयार्क के बगीचों को ध्यान में रखा जहां दूरदूर तक एक ही रंग के फूल दिखाई देते हैं. इस के अलावा उन्होंने भारत की संस्कृति और परंपरा को भी अलग अंदाज में पेश किया. इस कलैक्शन का फैब्रिक खादी है. उन के अनुसार लहंगा, साड़ी, ब्लाउज, अनारकली, शेरवानी आदि वस्त्र कभी भी पहने जा सकते हैं.

डिजाइनर श्रुति संचेती का ‘नौमेदिस्तान’ संग्रह फ्रीफ्लोइंग दर्शाता है. दरअसल, आज की औरतें हर जगह जाती हैं और ऐसे में उन के कपड़े भी उसी हिसाब के होने चाहिए ताकि वे उन्हें आराम से पहन सकें. श्रुति कहती हैं कि भारत में हमेशा वार्म कलर पहने जाते हैं. इस की वजह यहां का रंगरूप है. इसी वजह से उन्होंने ब्लौक प्रिंट को भी स्टाइलिश और कंटंप्रेरी रूप दिया है, जिस में पीले, लाल, औरेंज कलर अधिक हैं. फ्लोइंग स्कर्ट, बैल्टेड साड़ी, ऐंब्रौयडरी युक्त ब्लाउज, पलाजो पैंट आदि को महिलाएं किसी भी समय पहन सकती हैं.

डिजाइनर गौरांग के कलैक्शन में जामदानी में कढ़ाई को अधिक महत्त्व दिया गया, जिस में फूलकारी और चिकनकारी अधिक है. सलवारसूट से ले कर घाघराचोली आदि सभी वस्त्रों को अलग पहचान दी. फैशन डिजाइनर अनाविला मिश्रा, शोन रांघवा, राहुल और शिखा ने भी सौ प्रतिशत और्गेनिक फैब्रिक को कलरफुल तरीके से पेश किया. हर डिजाइनर ने इस बात का ध्यान रखा कि डिजाइन किए वस्त्रों को हर कोई पहन सके.

चौराहा कलैक्शन

श्रद्धा और मयंक ने अपने ‘चौराहा कलैक्शन’ से सभी को मोहित कर लिया. ‘चौराहा कलैक्शन’ के बारे में विचार कैसे आया, पूछने पर मयंक बताते हैं कि मुंबई में जब हम किसी चौराहे पर गाड़ी रोकते हैं तो वहां खड़ी महिलाएं कभी साड़ी को दुपट्टा तो कभी दुपट्टे को साड़ी, बच्चे का झूला, परदा आदि बना लेती हैं. फिर भी वे खुश रहती हैं. इस तरह एक साड़ी पुरानी होने पर दुपट्टे, परदे, पायदान आदि कई रूपों में प्रयोग की जा सकती है. यह अवधारणा मुझे चौराहे पर मिली थी, इसलिए इस का नाम ‘चौराहा कलैक्शन’ रखा. श्रद्धा और मयंक का कहना है कि फैशन कंफर्टेबल होना चाहिए. कपड़े पहनने के बाद अपनेआप को आईने में जरूर देखें, क्योंकि कई बार लोग ऐसे कपड़े पहनते हैं, जो या तो तंग होते हैं या फिर अधिक ढीले जो उन्हें चलनेफिरने में मुश्किल खड़ी करते हैं.

लैक्मे फैशन वीक के अवसर पर लैक्मे इनोवेशन की प्रमुख पूर्णिमा लांबा बताती हैं, ‘‘मैं पिछले 15 सालों से इस शो से जुड़ी हुई हूं. इस साल का शो काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि मैं इसे नया रूप देना चाहती थी. पहले और अब में काफी अंतर आ गया है. पहले डिजाइनर ढूंढ़ने पड़ते थे लेकिन अब इतने डिजाइनरों के नाम आते हैं कि चुनना मुश्किल हो जाता है. इस बार जबौंग में भी बहुत अच्छेअच्छे डिजाइनर आए. ऐसे शो के जरीए खरीदार और दर्शक दोनों लाभान्वित होते हैं.’’