नागेश कुकनूर की फिल्म ‘बौलीवुड कॉलिंग’ से डेब्यू करने वाली अभिनेत्री पेरिजाद जोराबियन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फिल्म ‘जौगर्स पार्क’ से कामयाबी मिली. दरअसल, बचपन से ही स्टेज परफौर्मैंस का शौक रखने वाली पेरिजाद ने न्यूयौर्क में एमबीए की पढ़ाई खत्म करने के बाद अफ्रीकन डांस सीखा. 12 साल बैले किया. थिएटर में थोड़े दिनों तक काम किया.

उन्हें जहां भी मौका मिलता स्टेज पर अवश्य परफौर्म करतीं. तब फिल्मों के बारे में कभी सोचा भी नहीं था. पर पेरिजाद ने जब फिल्म में काम करना शुरू किया, तो उन्हें परिवार का पूरा सहयोग मिला. धीरे धीरे उन्होंने कई फिल्में कर डालीं.

अलग रास्ता

हालांकि वे सिर्फ अनुभव लेना चाहती थीं. पर एक के बाद एक फिल्में करती गईं, तो पिता के पोल्ट्री फार्म के व्यवसाय में उन की उपस्थिति कम होने लगी. फिर एक दिन पिता ने साफ साफ उनकी इच्छा जाननी चाही कि उन्हें करना क्या है. तब पेरिजाद भी तय कर चुकी थीं कि वे क्या करेंगी.

अत: वे ऐक्टिंग छोड़ बिजनैस में आ गईं. जब वे एन. चंद्रन की फिल्म ‘ये है मेरा इंडिया’ की शूटिंग कर रही थीं, उसी दौरान रियल ऐस्टेट व्यवसायी बमन रुस्तम ईरानी से एक इवेंट के दौरान मुलाकात हुई. फिर प्यार हुआ और फिर शादी. तब पेरिजाद ने तय किया कि वे पहले परिवार को बढ़ाएंगी, फिर काम. वे 2 बच्चों बेटी अजहा और बेटे जयान की मां बनीं.

परिवार का श्रेय

आज पेरिजाद ‘जोराबियन चिकन’ की ओनर और डायरैक्टर हैं. यहां तक पहुंचने का श्रेय वे अपने मातापिता और पति को देती हैं, जिन्होंने उन का पूरा पूरा साथ दिया.

व्यवसाय में आप को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

पेरिजाद कहती हैं, ‘‘यह सही है कि ‘पोल्ट्री’ का व्यवसाय मेल डौमिनेट है. मैं जब यहां आई तो मैं ही एक लड़की थी. पर बाद में मैं ने कई लड़कियां रखीं ताकि उन्हें काम मिले और मुझे काम करने में आसानी हो. मैं महिलाओं को शक्तिशाली बनाने में विश्वास रखती हूं. मेरे पिता ने मुझ में और मेरे भाई में कोई फर्क नहीं किया. मेरा भाई पोल्ट्री फार्म हाउस संभालता है. मातापिता के हिसाब से मेरी और उस की काबिलीयत बराबर की है. टीम में सारे लड़के हैं. वे किसी महिला द्वारा कही गई बात को अधिक नहीं मानते थे. अत: मैंने तय किया कि उन का सहयोग पाने के लिए चीखने चिल्लाने की जगह धैर्य से काम लेना होगा.”

‘‘मैं ने अपना सम्मान जबरदस्ती नहीं, बल्कि प्यार से पाया है, जो बहुत मुश्किल था. मेरा ब्रैंड 5 साल पुराना हो चुका है और मैं खुश हूं कि कुछ हद तक इस में मुझे सफलता मिली है. मैं इस में चिकन की रिटेल लाइन को देखती हूं. पहले मेरे पापा होलसेल मार्केट को देखते थे जो मुंबई और पुणे तक सीमित थी, लेकिन धीरे धीरे इस में कंपीटिशन बढ़ने लगा, तो मैंने ही सलाह दी कि रिटेल बेचना आज बहुत जरूरी है, क्योंकि जो लोग होटल में खाना खाते हैं उन्हें कौन सा चिकन दिया जा रहा है पता नहीं होता. ऐसे में ब्रैंड स्थापित नहीं हो सकता. आज रिटेल की डिमांड है. तब हमारी बहुत अच्छी ग्रोथ हुई. मुंबई, पुणे, दिल्ली, भोपाल, बैंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, सूरत आदि सभी जगहों पर इस की काफी डिमांड है.’’

खुद करती हैं देखभाल

पेरिजाद बताती हैं, ‘‘मेरे पास अंडों से ले कर चिकन बनने तक का पूरा प्रोसैस है, जिसे हम अपनी देखरेख में करते हैं. अच्छा दाना, अच्छी देखभाल, बेहतर साफसफाई से मुरगेमुरगियां उत्तम क्वालिटी की होती हैं. इन्हें किसी प्रकार का इंजैक्शन दे कर बड़ा नहीं किया जाता. चिकन की कई रैसिपीज जैसे शामी कबाब, सीख कबाब आदि को महिलाएं, पुरुष व यूथ सभी चंद मिनटों में बना सकते हैं. सामान हम हमेशा डिमांड से थोड़ी कम मात्रा में बनाते हैं ताकि बचे नहीं.’’

परिवार के साथ काम संभालने में परेशानी नहीं होती?

पेरिजाद बताती हैं, ‘‘मेरी टीम बहुत अच्छी है. घर पर जो मेरा सपोर्ट सिस्टम है वह भी बहुत अच्छा है. सुबह उठ कर थोड़ा वर्कआउट करती हूं. फिर औफिस और शाम को घर पहुंच कर बच्चों की पढ़ाई देखती हूं.’’

अब फिल्मों में आने की इच्छा नहीं होती?

‘‘अभी मेरे बच्चे छोटे हैं. फिर भी अगर अच्छी फिल्म मिलेगी, तो मैं अवश्य करना चाहूंगी.’’