गृहशोभा विशेष

बचत का हर व्यक्ति के जीवन में होना बहुत जरूरी है. जितना भी आप कमाएं उस का कुछ भाग बचत के रूप में जरूर रखें. अगर ऐसा आप कमाते वक्त नहीं सोचते तो आगे चल कर दिनोंदिन बढ़ती महंगाई की मार आप को अवश्य झेलनी पड़ेगी. एक उम्र के बाद काम करना वश में नहीं होता, जबकि बढ़ती उम्र की वजह से बीमारी और अच्छे खानपान वगैरह के खर्च बढ़ते जाते हैं. ऐसे में जितनी जल्दी आप रिटायरमैंट से पहले सेविंग के बारे में सोचेंगे, उतनी ही बड़ी आप की बचत होगी. जब आप रिटायरमैंट के कगार पर होंगे तो भले ही बाजार की कीमतों की अपेक्षा आप की बचत कम दिखे, पर अपनी जरूरतों को सीमित दायरे में रख कर और अच्छी प्लानिंग कर के आप एक अच्छी जिंदगी गुजार सकेंगे. आज के दौर में यह बहुत जरूरी है कि अपनी रिटायरमैंट से पहले सेविंग में विविधता लाई जाए. लेकिन यह कैसे करें, इस के बारे में मुंबई के फाइनैंशियल प्लानर धवल कक्कड़ से बातचीत हुई.

उन्होंने बताया कि सब से पहले आप अपनी उम्र, जरूरतों, आय और बैकग्राउंड पर ध्यान दें. ये 4 कारक प्रमुख हैं. अगर आप के पास घर है तो ‘हाई रिस्क हाई रिटर्न’ पर आप जा सकते हैं. अगर घर लेना है, शादी करनी है तो मार्केट रिस्क हमेशा कम लें, क्योंकि बाजार भाव हमेशा चढ़ता और उतरता रहता है, जिस में पैसा खोने का डर लगा रहता है.

7 साल की सेविंग सब से आदर्श मानी जाती है. लेकिन अगर आप के रिटायरमैंट में देर है तो जल्दी पैसा बनाने की बात सोचनी चाहिए. प्रौपर्टी और सोने में इन्वैस्टमैंट अच्छा होता है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के चढ़नेउतरने पर निर्भर रहने वाली स्कीम की अपेक्षा अधिक लाभ देता है. किसी भी इन्वैस्टमैंट को करते समय उस की अवधि अवश्य देख लें. अगर मंदी का समय हो तो ‘बायर’ बनें और तेजी हो तो ‘सैलर’. इस से आप को एक अच्छी रकम हाथ लगेगी, जो भविष्य में काम आएगी. स्टाक और बांड्स मेें रिटायरमैंट

सेविंग करना भी अच्छा होता है. उस में पैसे खोने का डर रहता है, पर अगर आप का ध्यान रोज मार्केट की तरफ रहे तो ऐसा नहीं होता. म्यूचुअल फंड में ‘सिप’ यानी ‘सिस्टेमैटिक इन्वैस्टमैंट प्लान’ लें. इस के लिए अच्छे फाइनैंशियल एडवाइजर की सलाह लें. भारत में करीब 100 म्यूचुअल फंड कंपनियां हैं जिन में से केवल 10 ही ऐसी हैं जहां आप का पैसा सुरक्षित रह सकता है.

हमेशा ‘टर्म प्लान’ में इन्वैस्ट करें ताकि अगर आप पर कोई आपदा आए तो परिवारजनों को आप की बचत का लाभ मिल सके. लेकिन आप कितना व्यय करेंगे और कितना बचाएंगे इस की योजना इस प्रकार बनाएं- अगर आप की उम्र 20 से 30 वर्ष हो तो अपनी आय का 20% सालाना आप बचत कर सकते हैं.

35 साल की उम्र होने पर 15 से 20%, 45 से 50 वर्ष की उम्र होने पर 10 से 15% और 50 वर्ष के ऊपर होने पर 10% अपनी आय की सालाना बचत कर सकते हैं. गोल्ड फंड या गोल्ड ऐक्सचेंज क्रैडिट फंड में पैसा डालें. अपनी बचत का 99% भी आप सोने की खरीद में डाल सकते हैं. इस में रिस्क नहीं होता, इस का लाभ अधिक मिलता है.

सरकार की ऋण पालिसी में पैसा डालें. ‘गवर्नमेंट सिक्यूरिटीज’ में पैसा डालना हमेशा लाभदायक रहता है, क्योंकि यह रिस्क फ्री रहता है और बाजार भाव के उतारचढ़ाव का असर इस पर नहीं पड़ता. प्लान अवश्य करना चाहिए. ऐसी पालिसी के धारक बनें जिस का भविष्य में आप को पूरा लाभ मिले. अपनी आमदनी को हमेशा ‘व्हाइटमनी’ में रखें. ‘ब्लैकमनी’ कभी न रखें.

वित्तीय प्लानिंग में अपनी आय और संपत्ति का वसीयतनामा पहले तैयार करें, जिस में पावर औफ एटार्नी जरूर बनाएं. नहीं तो संपत्ति और पैसे को ले कर परिवार में झगड़े होने लगते हैं. हर 5 साल बाद अपने इन्वैस्टमैंट की जांचपरख अवश्य करें, इस से बाजार भाव के अनुसार आप अपने फाइनैंस की प्लानिंग फिर से कर पाएंगे.

इस के आगे धवल कक्कड़ कहते हैं कि आज के युवाओं को इस बारे में अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आज के युवा 30 से 40 हजार रुपए प्रतिमाह कमाते हैं पर उन्हें शौक पूरे करने की अधिक धुन रहती है. वे पैसे खर्च अधिक करते हैं. जबकि आज से 20-30 वर्षों बाद जब हमारे देश का और अधिक विकास हो चुका होगा तब महंगाई और अधिक होगी. खर्चा 5 गुना अधिक बढ़ेगा. ऐसे में शुरू से बचत न करने पर और अधिक परेशानी आएगी.

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