बाजार में यूं तो तमाम टैक्स सेविंग विकल्प मौजूद हैं, लेकिन एक निवेशक के तौर पर यह देखना चाहिए कि ऐसे कौन से विकल्प हैं जो न सिर्फ आपकी टैक्स बचाने में मदद करेंगे बल्कि वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में भी मददगार साबित होंगे. हम अपनी इस खबर में आपको ऐसे सात निवेश विकल्पों के बारे में जानकारी दे रहे जो आपकी इन दोनों जरूरतों को पूरा कर सकते हैं.

इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस): ईएलएसएस म्युचुअल फंड में निवेश कर आप टैक्स बचाने के साथ ही अपनी पूंजी को भी बढ़ा सकती हैं. इसके साथ ही आप इसके जरिए अपने लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों को भी हासिल कर सकती हैं. इसके तहत तीन वर्ष का लौक इन पीरियड होता है. इसमें रिटर्न बाजार पर आधारित होते हैं और हर स्कीम का अलग रिटर्न होता है. इस स्कीम को एसेट क्लास के आधार पर डिजाइन किया गया है. इसलिए निवेशक को इसमें निवेश करने से पहले एडवाइजर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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बैंक की फिक्स्ड डिपौजिट: पांच वर्षीय एफडी टैक्स सेविंग के लिहाज से काफी बेहतर होती है. इसके अलवा यह (बैंक एफडी) सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न भी देती है. हालांकि इसपर मिलने वाला ब्याज कर योग्य होता है. लेकिन फिर भी यह सेविंग एकाउंट से बेहतर होता है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ): अगर आप रिटायरमेंट के लिए फंड जमा करना चाहती हैं तो पीपीएफ एक बेहतर विकल्प है. पीपीएफ में निवेश करने से एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट (ई-ई-ई) का लाभ मिलता है. इसका लौक इन पीरियड सबसे ज्यादा होता है जो कि 15 वर्ष का है. साथ ही यह एक सुरक्षित विकल्प भी है. कोई भी अदालत पीपीएफ खाते को जब्त नहीं कर सकती. इसपर मिलने वाला रिटर्न तय होता है और तिमाही आधार पर बदलता भी रहता है.

लाइफ इंश्योरेंस: यह मुख्य रूप से परिवार को आर्थिक संकट से बचाने के लिए खरीदा जाता है. निवेशक सेक्शन 80सी और सेक्शन 10 (10)डी के तहत टैक्स बचा सकते हैं. हां मैच्योरिटी बेनिफिट भी आयकर के छूट दायरे में आते हैं. यूलिप जैसा प्रोडक्ट सुरक्षा, निवेश में विकास और वित्त लक्ष्यों को प्राप्त करने में मददगार होता है.

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नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस): यह लंपसम और रिटायरमेंट के बाद नियमित आय के लिए बेहतर विकल्प है. इसके तहत निवेशक सेक्शन 80सीसीडी (1बी) के अंतर्गत 50,000 रुपये के निवेश पर अतिरिक्त लाभ मिलता है. मसलन, कोई भी योग्य व्यक्ति एनपीएस खाते में दो लाख रुपये तक का निवेश कर 61800 रुपये (सेस चार्ज समेत) का टैक्स के रूप में बचा सकता है.

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट: इस स्कीम में किया गया निवेश कर कटौती के दायरे में आता है. इसमें निवेश की कोई सीमा नहीं है. साथ ही सर्टिफिकेट को कोलेटरल के रूप में रखकर बैंक से लोन लिया जा सकता है.

सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (एससीएसएस): यह टैक्स बचाने के लिहाज से वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक बेहतर स्कीम है. यानी 60 साल की उम्र में रिटायर होने पर इसका फायदा लिया जा सकता है. लेकिन अगर आप इस उम्र से पहले रिटायरमेंट लेते हैं यानी कि वीआरएस लेते हैं तो आपको ऐसा फैसला लेने के एक महीने के भीतर अपना खाता खुलवाना होगा. ऐसा करने के बाद भी आप इन रिटायरमेंट से जुड़े लाभों को प्राप्त कर पाएंगे. इसकी मैच्योरिटी अवधि 5 साल की है. हालांकि जरूरत पड़ने पर इसे अतिरिक्त 3 सालों के लिए बढ़ाया भी जा सकता है.

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