गृहशोभा विशेष

सब्जियों की हर घर में सुबहशाम दोनों वक्त जरूरत पड़ती है. इन का दाम भी बढ़ता रहता है. ऐसे में यदि इन्हें खरीदते समय सावधानी न बरती जाए तो न इन्हें बनाने में मजा आएगा और न ही खाने में. आप के पैसे बरबाद होंगे वह अलग. इसलिए सब्जी खरीदते समय इन बातों पर गौर फरमाना न भूलें:

– कई दुकानदार ऊंचे प्लेटफौर्म पर सब्जियां सजा कर रखते हैं और वे सब्जी छांटने नहीं देते. ऐसे में उन विक्रेताओं से सब्जी खरीदें जो जमीन पर बैठ कर या फिर ठेले पर सब्जी बेच रहे हों और छांटने देते हों. छांट कर लेने से सड़ीगली या खराब सब्जी की आशंका नहीं रहेगी.

– कुछ विक्रेता पत्तेदार सब्जियों का वजन बढ़ाने के लिए दिनभर उन पर पानी छिड़कते रहते हैं. पूछने पर कहेंगे कि पत्ते मुरझा न जाएं, इसलिए पानी का छिड़काव करते हैं, जबकि उन का असली मकसद सब्जी का भार बढ़ाना होता है.

– सब्जी खरीदते समय तोल पर भी नजर रखें. कुछ सब्जी बेचने वाले कम तोलते हैं. इलैक्ट्रौनिक कांटे वाले से ही सब्जी लें या फिर जहां बांट का इस्तेमाल होता हो उस तराजू पर तुलवाएं. बांट की जगह पत्थर के टुकड़े से तोलने वाले बेईमानी करते हैं. उन के तराजू को भी चैक कर लें कि दोनों पलड़े समान तो हैं.

– सब्जी खरीदते समय एक ही दुकान से सारी सब्जियां न खरीदें. जहां सब्जी अच्छी व ताजी हो, वहीं से खरीदें. इस से आप का कुछ समय तो अधिक लगेगा, लेकिन खरीदने के बाद आप को पछतावा नहीं होगा.

– सब्जी वाला भी जानता है कि ग्राहक मोलभाव करते हैं, इसलिए पहले ही ज्यादा भाव बताता है. आप को भाव तय कर के ही सब्जी खरीदनी चाहिए. दुकानदार हर ग्राहक से अलगअलग दाम वसूलता है. यह ग्राहक की चतुराई है कि वह भाव कम कराए. हां, कुछ दुकानदार ऐसे भी होते हैं जिन के यहां मोलभाव नहीं होता. सभी के लिए एक ही भाव रहता है. वहां से खरीदने में ठगे जाने की बात नहीं होगी. वैसे बुद्धिमानी इसी में है कि 2-4 दुकानों पर जा कर भाव पूछ लिया जाए.

– कुछ महिलाएं जब सब्जी खरीदने जाती हैं, तो कार से नीचे तक नहीं उतरतीं. न तो वे सब्जी की क्वालिटी देखती हैं और न ही कीमत. बस कार में बैठीबैठी ही सब्जियों का और्डर दे देती हैं.

– फूलगोभी खरीदते समय ध्यान रहे कि वह एकदम सफेद और सख्त हो. छितरी हुई गोभी अच्छी नहीं होती. यह भी देख लें कि उस में कीड़े तो नहीं लगे हैं. उस की खुशबू भी अच्छी होनी चाहिए. गंदे पानी की फूलगोभी में दुर्गंध आती है.

– पत्तागोभी या बंदगोभी खरीदते समय देख लें कि वह हरी हो. उसे दबा कर देखें. वह कठोर होनी चाहिए न कि पोली. अच्छी पत्तागोेभी आकार में छोटी, मगर वजन में भारी होती है जबकि पोलीगोभी आकार में बड़ी और वजन में कम होती है. गोभी में छेद नहीं होना चाहिए. छेद होने का मतलब भीतर कीड़े होना है.

– ब्रोकली एक तरह की फूलगोभी ही है, जिस का रंग हरा होता है. उसे खरीदते समय फूलगोभी जैसी सावधानी बरतनी चाहिए.

– लौकी लेनी हो तो बहुत पतली या बहुत मोटी न लें. मध्यम आकार की सीधी या हलकी मुड़ी लौकी लें. पूरी लौकी ऊपर से हरी हो. उस का कोई हिस्सा सफेद या पीला नजर नहीं आना चाहिए. अधिक पकी लौकी के बीज कड़े होते हैं और वह मुलायम भी नहीं निकलती. ताजा लौकी पर हलके रोएं भी होते हैं और उस का डंठल भी हरा होता है.

– गिलकी खरीदते समय उस के किनारे देखें. ताजा गिलकी के किनारे पर फूल दिखेंगे. ताजा गिलकी पर हलके रोएं होते हैं. वह मुलायम भी होती है. यदि गिलकी पर काले दागधब्बे हैं तो इस का मतलब वह बासी है. गिलकी में छेद नहीं होने चाहिए और अधिक पतली या अधिक मोटी भी न लें.

– तुरई खरीदते समय उस का एक किनारा तोड़ कर चख लें, क्योंकि उस के कड़वी निकलने की आशंका रहती है. बिना चखे यदि आप ने खरीदी और सब्जी बनाई, तो एक भी तुरई कड़वी होने पर पूरी सब्जी कड़वी हो जाएगी. तुरई थोड़ी गूदे वाली यानी मोटी लें. एकदम पतली या बहुत मोटी तुरई अच्छी नहीं रहती.

– ग्वारफली छोटी, मुलायम तथा हरी होनी चाहिए. कड़क या बीजों वाली ग्वारफली न खरीदें. फलियों को मोड़ कर देखें. यदि आसानी से मुड़ जाएं तो ताजा हैं और मोड़ने पर टूटने लगें तो वे बासी हैं.

– चवला फली कई किस्मों की आती है. यदि केवल दाने की सब्जी बनानी हो तो भरे हुए दाने वाली फली चुनें. यदि उसे छिलके सहित काट कर बनाना हो तो नर्म या पतले छिलके वाली फली लें. दोनों ही स्थिति में उन का ताजा होना बहुत जरूरी है.

– परवल खरीदते समय यह ध्यान रखें कि उन्हें भरवां बनाना है या कटवा कर. यदि भरवां बनाना हो तो मध्यम आकार के परवल खरीदें अन्यथा बड़े आकार के भी चल सकते हैं. उन के बीज अधिक पके नहीं होने चाहिए.

– तिंदूरी भी परवल जैसी दिखती है पर आकार में उस से छोटी होती है तथा भीतर से ठोस. हरी तथा कड़क तिंदूरी ही खरीदें और वह ऊपर से लाल न हो.

– भरवां टिंडे बनाने हों तो एकजैसे मध्यम या छोटे आकार के खरीदें. यदि काट कर बनाने हों तो बड़े टिंडे खरीदें. वे ऊपर से हरे होने चाहिए तथा रोएंदार होने चाहिए. यदि वे चिकने हैं तो भीतर से कड़क निकलेंगे. यदि टिंडे अधिक पके होंगे तो खाते समय उन के बीज मुंह में आएंगे.

– बैगन कई प्रकार के आते हैं. लंबे, गोल, हरे आदि. यदि भरवां बैगन बनाने हों तो गोल और छोटे आकार के खरीदें. यदि भरता बनाना हो तो गोल व बड़े आकार के बैगन खरीदें. काट कर सब्जी बनानी हो तो लंबे आकार के बैगन खरीदें. बैगन चिकने व चमकदार हों. भीतर से मुलायम तथा कम से कम बीज वाले हों. आड़ेतिरछे या मुड़े बैगन न लें. यह देख लें कि उन में छेद न हों वरना भीतर कीड़े हो सकते हैं. ताजे बैगन के किनारे और डंठल हरे होंगे.

आप इस लेख को सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं