गृहशोभा विशेष

स्वास्थ्य का मसला हो या खानेपीने की चीजों की चर्चा, आजकल सुपरफूड शब्द काफी सुनने को मिलता है. आखिर यह सुपरफूड क्या है? क्या यह कोई ऐसा फूड है, जो सभी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उसी तरह हल कर देता है, जैसे किसी फिल्म में सुपरमैन तमाम समस्याओं को हल करता है?

दरअसल, सुपरफूड कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है, लेकिन जैसेजैसे सामान्य भोज्यपदार्थों के विशिष्ट गुण पता लगने लगे हैं, वैसेवैसे कुछ विशेषज्ञ उन्हें सुपर की श्रेणी में रखने लगे हैं. इन पदार्थों को सुपरफूड इसलिए कहा जाने लगा है, क्योंकि जरूरी पोषक तत्त्वों के अलावा उन में ऐंटीऔक्सीडैंट होते हैं, जो हमें जवां बनाए रखते हैं और कैंसर जैसे गंभीर रोगों से बचाते हैं. उन में हैल्दी फैट होते हैं ताकि हृदयरोग से बचाव हो सके. उन में फाइबर होते हैं ताकि डायबिटीज और पेट की गड़बड़ी परेशान न करे. उन में फाइटोकैमिकल्स होते हैं, जो हमें रोग नहीं लगने देते.

यहां प्रस्तुत हैं, कुछ प्रमुख सुपरफूड और उन की विशेषताएं. ये सुपरफूड की ज्यादातर सूचियों में शामिल हैं और हमारे देश में आसानी से उपलब्ध भी हैं.

ब्राउन राइस

ये सफेद चावल का अनरिफाइंड रूप होते हैं. इन में प्रोटीन, थिएमाइन, कैल्सियम, मैग्नीशियम, सेलेनियम, पोटैशियम और फाइबर पाए जाते हैं. डायबिटीज का खतरा कम करने के लिए ब्राउन राइस बढि़या हैं. इन में ग्लाइसेमिक रेट बहुत कम होता है और ये ब्लडशुगर को नियंत्रण में रखते हैं. इन में मौजूद सेलेनियम कैंसर, हाई कोलैस्ट्रौल दिल और हड्डियों की दिक्कत कम करता है. फाइबर से भरपूर ये चावल देर तक हमारा पेट भरा रखते हैं, जिस से ये वजन घटाने में भी सहायक हैं. आंतों के कैंसर का खतरा कम करते हैं, पथरी में भी फायदेमंद हैं. विशेषज्ञ इन्हें बेर और अन्य फलों के साथ खाने की सलाह देते हैं ताकि इन के ऐंटीऔक्सीडैंट गुणों का शरीर को पूरा फायदा मिल सके.

मसूर, मूंग और अन्य दालें

दालों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, फाइबर, फौस्फोरस और अनेक मिनरल्स पाए जाते हैं. अरहर की दाल में विटामिन ए और बी होते हैं और यह खून, कफ और पित्त की गड़बडि़यों को ठीक करती है. उरद की दाल कब्ज दूर करती है और शक्ति भी देती है. इसे पीस कर फोड़ाफुंसी में भी लगाया जाता है. मूंग की दाल में फाइबर होते हैं. यह आसानी से पचती है, इसलिए मरीजों के लिए फायदेमंद होती है. इस का हलवा काफी शक्ति देता है. यह आंखों के लिए भी बढि़या है. राजमा प्रोटीन का भंडार है. इस में आयरन और विटामिन बी-9 विशेष रूप से पाया जाता है. मसूर की दाल रक्त को समृद्ध करती है. यह पेट के लिए भी बहुत सही रहती है. चना हमें कब्ज, डायबिटीज, पीलिया और खून की कमी से नजात दिलाने में सहायक है. चने का आटा बालों और त्वचा के लिए भी लाभकारी है.

अलसी का बीज और तेल

यह ओमेगा-3 फैट्स, डाइटरी फाइबर, पोटैशियम और अनेक पोषक तत्त्वों का घर है. ओमेगा-3 फैट्स चूंकि हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं के जरूरी तत्त्व होते हैं, इसलिए अलसी का बीज और तेल एक तरह से हमें संपूर्ण स्वास्थ्य देने का काम करता है. पाचनतंत्र को अच्छा करने के साथसाथ यह हाई ब्लडप्रैशर और हाई कोलैस्ट्रौल को भी कम करता है. यह हार्ट अटैक, डायबिटीज और कैंसर का खतरा कम करता है. बालों, त्वचा के दोस्त और आंखों में सूखेपन की समस्या को दूर करता है. यह मेनोपौज में भी राहत पहुंचाता है. शरीर में वसा को जलाता है.

ग्रीन टी

ग्रीन टी कैंसर और त्वचा कैंसर से लड़ने में सक्षम माना जाता है. इस में मौजूद ऐंटीऔक्सीडैंट विटामिन सी और विटामिन ई से भी बहुत ज्यादा बेहतर पाए गए हैं. यह हृदय की कोशिकाओंकी रक्षा करती है और कोलैस्ट्रौल को कम करती है. इस का पौलीफिनोल नाम का ऐंटीऔक्सीडैंट बढ़ती उम्र पर लगाम लगाता है. वजन घटाने और मैटाबोलिक दर को बढ़ाने में सहायक है. पाया गया है कि ग्रीन टी एक दिन में शरीर की 70 कैलोरी कम कर देती है. यह हड्डियों को मजबूत करती है और आर्थ्राइटिस का खतरा कम करती है. ब्लडशुगर के स्तर को बढ़ने से रोक कर यह डायबिटीज में भी बहुत फायदा करती है. यह लिवर से भी नुकसानदायक तत्त्वों को बाहर करती है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह एचआईवी के वायरस को शरीर में फैलने से रोकती है. ग्रीन टी से भीगी रुई को कान में डालने से कान का इन्फैक्शन भी दूर होता है. यह दांतों में मौजूद बैक्टीरिया को भी मारती है यानी 1 कप चाय में गुण ही गुण.

ओट्स

ओट्स में मुख्य रूप से जौ, अन्य अनाज और उन के दलिया आते हैं. ओट्स प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, मैगनीज और विटामिन बी से भरपूर होते हैं. ये हड्डियों का विकास करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. ये बहुत जल्दी हमारा पेट भर देते हैं और इन्हें खा कर काफी देर तक भूख नहीं लगती. ओट्स में सब से ज्यादा घुलनशील फाइबर होते हैं, जिस से ये बुरे कोलैस्ट्रौल को कम करते हैं. इन्हीं फाइबरों की वजह से ओट्स डायबिटीज में भी बहुत राहत देते हैं और पाचनतंत्र को दुरुस्त रखते हैं. ये त्वचा के बहुत अच्छे दोस्त हैं. विभिन्न फेसपैक में इन का इस्तेमाल होता है. ओट्स में मौजूद लिगनेन नामक तत्त्व कैंसर और हृदयरोग का खतरा कम करता है.

गेहूं का अंकुर (व्हीट जर्म)

इसे पोषक तत्त्वों का गोदाम भी कहा जाता है. इस में वसा नाममात्र की होती है और कोलैस्ट्रौल होता ही नहीं. कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फौलिक ऐसिड, फाइबर, विटामिन और मिनरल की भरमार होती है. यह फौलिक ऐसिड का सर्वश्रेष्ठ भंडार माना जाता है इसलिए गर्भधारण कर रही महिलाओं के लिए बहुत ही लाभकारी है. फौलिक ऐसिड दिल की बीमारी, हड्डी टूटने जैसी दिक्कतों का खतरा भी टालने का काम करता है. यह दिमाग को भी दुरुस्त रखता है. इस में एक विशेष किस्म का ऐंटीऔक्सीडैंट एरगोथियोनिआइन होता है, जो पकाने पर भी नष्ट नहीं होता. यह शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है.

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