गृहशोभा विशेष

 

मेरी आयु 33 वर्ष है. 3 हफ्ते पहले मेरा सिर दरवाजे से टकरा गया था और मुझे गंभीर चोट लगी थी. अब गरदन में भी दर्द होने लगा है. क्या इस से मुझे चिंतित होने की जरूरत है?

चोट का असर कई बार कुछ हफ्तों तक बना रहता है. सिर जब किसी भारी वस्तु से झटके से टकराता है, तो गरदन पर भी उस चोट का असर पड़ता है, जिसे गरदन की मोच कहा जाता है. इस में गरदन के सौफ्ट टिशू में मामूली इंजरी हो जाती है. अपनी गरदन को थोड़ा आराम दें. उस पर दबाव डालना या झटका न देना ही बेहतर होगा. अगर दर्द बराबर बना हुआ है तो डाक्टर को दिखाएं.

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मेरी उम्र 55 साल है और मेरे दोनों घुटनों में रिप्लेसमैंट की सलाह दी गई है. क्या एक बार में दोनों रिप्लेसमैंट कराना बेहतर होगा या बारीबारी से? एक बार ही दोनों सर्जरी कराना जोखिमपूर्ण तो नहीं होगा?

जौइंट रिप्लेसमैंट सर्जरी में जोड़ों की कटिंग और हीलिंग की जाती है. इस में मरीज को ठीक होने तथा अपने पैरों पर खड़े होने में कुछ दिन लग जाते हैं. इस में ऐनेस्थीसिया कराने और अस्पताल में रहने की भी जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि हम एकसाथ दोनों घुटनों का ट्रांसप्लांट कराने की सलाह देते हैं ताकि एक ही प्रक्रिया अपनाने के लिए 2 बार सर्जरी कराने के झंझट से बचा जा सके.

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मेरी उम्र 22 वर्ष है. मुझे गरदन में बारबार दर्द होता है. इस से मुझे कम से कम 1 सप्ताह तक तकलीफ होती है. क्या ऐसा मेरे लगातार कंप्यूटर पर काम करने के कारण होता है? बताएं, क्या करूं?

गरदन के दर्द के कई कारण हो सकते हैं, मसलन सौफ्ट इंजरी, सर्वाइकल स्पौंडिलाइटिस या मोच आदि. लेकिन गलत मुद्रा और गरदन झुका कर लगातार कंप्यूटर या किसी अन्य इलैक्ट्रौनिक डिवाइस पर आंखें गड़ाए रखने के कारण भी युवाओं में आजकल गरदन के दर्द की समस्या आम हो गई है. आप को अपनी मुद्रा सही करनी होगी. ऐसी कुरसी और मेज का इस्तेमाल करना होगा जो आप की गरदन और कंप्यूटर स्क्रीन के बीच समानांतर ऊंचाई बनाती हों. साथ ही, काम के दौरान बे्रक लेते रहें. थोड़ी चहलकदमी करें, अपनी गरदन घुमाएं और थोड़ा स्ट्रैचआउट कर लें. अगर इस के बाद भी समस्या बनी रहे तो डाक्टर से संपर्क करें.

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मैं 18 वर्षीय बास्केटबौल खिलाड़ी हूं. पिछले महीने बास्केटबौल खेलते हुए मैं तेजी से भागने के दौरान एक खिलाड़ी से टकरा गया था. हालांकि मैं तुरंत अपने पैरों पर खड़ा हो गया, लेकिन मेरी गरदन अब तक ठीक नहीं हो पाई है. जब मैं उसे घुमाता हूं तो दर्द महसूस होता है और सिर भी भारी लगता है. मुझे आराम करने की सलाह दी गई है. कोई चिंता की बात तो नहीं है?

लगता है, आप गरदन में मोच की एक खास समस्या से पीडि़त हैं, जिस में गरदन की नसें और लिगामैंट्स चोटिल होते हैं. ये नसें और लिगामैंट्स सौफ्ट टिशू होते हैं, जो गरदन की हड्डियों को जोड़ते हैं. तेज और अचानक के झटके से ये चोटिल हो सकते हैं. आप को ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है. गरदन को पर्याप्त आराम दें और डाक्टर की सलाह पर चलें. जरूरत पड़ने पर गरदन को सपोर्ट देने वाले कौलर का इस्तेमाल करें. इस तरह की इंजरी समय के साथ खुद ठीक हो जाती है.

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मेरी उम्र 35 वर्ष है. पिछले 5 वर्षों से डिप्रैशन में रहने के कारण मेरा वजन बहुत बढ़ गया है. 75 किलोग्राम से बढ़ कर 90 किलोग्राम हो गया है. डाक्टर बताते हैं कि स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बड़ी समस्या बन सकती है. क्या अत्यधिक वजन के कारण मेरे घुटने भी प्रभावित हो सकते हैं?

हां. बढ़ते वजन का मतलब है कि उसी अनुपात में घुटनों के जोड़ों पर दबाव बढ़ना. आखिर हमारे घुटनों और टांगों को ही पूरी जिंदगी हमारे शरीर का वजन ढोना पड़ता है. बढ़ती उम्र में घुटनों में किसी न किसी तरीके से घिसाव आने लगता है. साथ ही यदि शरीर का वजन भी बढ़ता है, तो घुटनों में घिसाव और तेजी से होने लगता है. अत: जब तक घुटने काम करते रहते हैं, अच्छी तरह वर्कआउट करें. घुटनों की परेशानी बढ़ने से पहले ही अपने वजन को कम करने की कोशिश करें.

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मेरी उम्र 59 साल है. मेरे घुटनों में घिसाव बढ़ रहा है. इसे रोकने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

बढ़ती उम्र में घुटनों में घिसाव का बढ़ना स्वाभाविक है. कुछ लोगों को इस से ज्यादा तकलीफ होती है. यदि घुटनों के बढ़ते नुकसान को रोकना है तो वजन पर नियंत्रण रखना सब से जरूरी है. लिहाजा, स्वस्थ खानपान रखें और यथासंभव व्यायाम करें. प्रतिदिन कम से कम 30-40 मिनट सैर करें, हलकेफुलके व्यायाम करें और समयसमय पर फिजियोथेरैपिस्ट से मिलते रहें. लेकिन जब टहलना भी मुश्किल हो जाए तो घुटने के प्रत्यारोपण पर विचार करें.

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मेरी उम्र 45 साल है. हाल ही में रजोनिवृत्ति हुई है. मुझे अपनी हड्डियों की सेहत को ले कर चिंता है. मुझे औस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

रजोनिवृत्ति के बाद ही नहीं, हड्डियों की सेहत का पूरी जिंदगी खयाल रखना चाहिए. 35 साल की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होने लगती हैं. रजोनिवृत्ति महिलाओं में यह प्रक्रिया ज्यादा तेजी से होती है. ढलती उम्र में यह फ्रैक्चर का कारण बनता है. लिहाजा पर्याप्त कैल्सियम युक्त भोजन करें. हर 3-4 साल के अंतराल पर अपनी हड्डियों की ताकत परखने के लिए बोन डैंसिटी जांच कराती रहें. जरूरत पड़ने पर कैल्यिम और विटामिन डी सप्लिमैंट लेने के बारे में भी डाक्टर से सलाह लें.

– डा. राजीव के. शर्मा इंद्रप्रस्थ अपोलो हौस्पिटल, नई दिल्ली

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