ग्रीन टी अपने स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध होती जा रही है. ग्रीन टी के प्रयोग से विभिन्न बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है. यहां हम बता रहे हैं कि ग्रीन टी कौनकौन सी बीमारी में किसकिस तरह सहायक होती है और उस में कौनकौन से लाभदायक तत्त्व होते हैं.

कैंसर

इस के अंदर पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट कैंसर का जोखिम को कम करने के लिए विटामिन सी के मुकाबले 25 गुणा और विटामिन बी के मुकाबले 100 गुना ज्यादा प्रभावकारी होते हैं. ये ऐंटीऔक्सीडैंट आप के शरीर के सैल्स को डैमेज होने से बचाए रखते हैं, जिस से कैंसर से बचाव होता है.

हृदयरोग

ग्रीन टी कोलेस्ट्रौल के स्तर को कम कर के हृदयरोगों और स्ट्रोक्स से होने वाले जोखिम को भी कम करने में सहायक है. यहां तक कि हार्टअटैक के बाद मृत पड़े हार्ट सैल्स को रिकवर कर दूसरे हार्ट सैल्स के संरक्षण में भी मदद करती है.

ऐंटीएजिंग

ग्रीन टी में पोलीफिनोल्स नामक ऐंटीऔक्सीडैंट होते हैं, जो फ्री रैडिकल्स से लड़ने की क्षमता रखते हैं. इस का अर्थ यह है कि ग्रीन टी बढ़ती उम्र से लड़ने में सहायक होती है और आप को ज्यादा समय तक जवां बनाए रखती है.

वेट लौस

शरीर से फैट बर्न कर के वजन को नियंत्रित करने में भी ग्रीन टी सहायक होती है. यह ऐक्स्ट्रा फैट को बर्न करने में भी मदद करती है और मैटाबोलिक रेट को प्राकृतिक तरीके से बढ़ाती है. यह एक दिन में शरीर से 70 कैलोरी तक बर्न करने की क्षमता रखती है.

त्वचा

ग्रीन टी में पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट त्वचा को फ्री रैडिकल्स के हानिकारक दुष्प्रभावों से भी संरक्षित रखते हैं. त्वचा पर आई झुर्रियों और ढलती उम्र में त्वचा पर होने वाले प्रभाव इन्हीं फ्री रैडिकल्स के कारण उत्पन्न होते हैं.

आर्थराइटिस

ह्यूमेटायड आर्थराइटिस के जोखिम को भी ग्रीन टी कम करती है और इस के दुष्प्रभावों से बचाव करती है. यह शरीर के ऐंजाइम्स को ब्लाक कर के कार्टिलेज को संरक्षित रखती है. ये ऐंजाइम कार्टिलेज को कमजोर बना कर उन्हें नष्ट करते हैं.

बोंस (हड्डियां)

ग्रीन टी का फ्लूअराइड नामक तत्त्व हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है. यदि आप प्रतिदिन ग्रीन टी पीते हैं, तो यह आप के शरीर में हड्डियों की डैंसिटी (स्थिरता) को बरकरार रखती है.

कोलेस्ट्रौल

यह कोलेस्ट्रौल के स्तर को कम करने में सहायक है. यह बुरे कोलेस्ट्रौल के स्तर को कम कर के अच्छेबुरे कोलेस्ट्रौल के अनुपात को भी नियंत्रित करती है.

ओबेसिटी

फैट सैल्स में ग्लूकोज की बढ़ती सक्रियता को रोक कर ओबेसिटी पर भी ग्रीन टी नियंत्रण रखती है.

डायबिटीज

ग्रीन टी लिपिड प्रोफाइल को बेहतर बनाती है. ग्लूकोज मैटाबोलिज्म रेट में शुगर लैवल को बढ़ने से रोकता है और शरीर के मेटाबोलिक रेट को भी नियंत्रित करता है.

अलजाइमर

ग्रीन टी आप की मैमोरी को बढ़ाने में भी मदद करती है. हालांकि यह अलजाइमर से बचाव नहीं करती, लेकिन यह ब्रेन में मौजूद एसेटिलकोलिन नामक तत्त्व की सक्रियता को कम करने में मदद करती है. यह तत्त्व ही अलजाइमर होने के मुख्य कारण बनता है.

पार्किंसन

ग्रीन टी में पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट मस्तिष्क में होने वाले सैल डैमेज से बचाव में मदद करती है. यह डैमेज पार्किंसन होने की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाता है.

लीवर डिजीज

रिसर्च से पता चलता है कि ग्रीन टी शरीर की फैटी लीवर में मौजूद हानिकारक फ्री रैडिकल्स को नष्ट कर देती है. यह लीवर फेल होने के कारणों से बचाव कर के ट्रांसप्लांट के जोखिम को भी कम करती है.

हाई ब्लडप्रैशर

यह हाई ब्लडप्रैशर से बचाव में मदद करती है. ग्रीन टी पी कर ब्लडप्रैशर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. यह एंगोएटेनसिन पर दबाव बनाए रखती है, जिस से ब्लडप्रैशर पर नियंत्रण बना रहता है.

फूड पौइजनिंग

इस में पाया जाने वाला कैटेचिन नामक तत्त्व शरीर के उन बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है, जो फूड पौइजनिंग की वजह बनते हैं. साथ ही, यह उन टौक्ंिसस को भी नष्ट करती है, जो इन बैक्टीरिया के कारण पनपते हैं.

ब्लड शुगर

यों तो बढ़ती उम्र के साथ शरीर में ब्लड शुगर लैवल बढ़ने की प्रवृत्ति होती है, लेकिन ग्रीन टी में पाए जाने वाले पौलीफिनोल्स ब्लड शुगर लैवल को कम करने में मदद करते हैं.

इम्यूनिटी

ग्रीन टी में मौजूद पोलीफिनोल्स और फ्लेवनौइड्स शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

कोल्ड और फ्लू

इस में मौजूद विटामिन सी सामान्य कोल्ड और फ्लू से लड़ने में मदद और शरीर को अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है.

अस्थमा

ग्रीन टी मसल्स को रिलैक्स करती है, इस से अस्थमा अटैक की तीव्रता में भी कमी आती है.

ईयर इन्फैक्शन

ग्रीन टी कानों में होने वाले इन्फैक्शन से भी बचाव करती है. रुई के फाहे को ग्रीन टी में भिगो कर उस से संक्रमित कान की सफाई करें. यह गंदगी को भी साफ कर देगा और कीटाणु भी नहीं पनपने देगा.

हरपीज

ग्रीन टी हरपीज के विशेष ट्रीटमैंट टौपिकल इंटरफेरन ट्रीटमैंट के प्रभाव को और अधिक बढ़ाने में मदद करती है. इस ट्रीटमैंट से पहले यह संक्रमित हिस्से पर दबाव या प्रभाव बनाती है और उस के बाद उस क्षेत्र के आसपास की त्वचा को ड्राई छोड़ देती है, जिस से ट्रीटमैंट का असर ज्यादा होता है और ट्रीटमैंट में भी सहूलियत रहती है.

सांसों की दुर्गंध

ग्रीन टी कई तरह के ऐसे वायरस और बैक्टीरिया को भी खत्म करती है, जो कई तरह की डैंटल प्रौब्लम्स का कारण होते हैं. साथ ही उन बैक्टीरिया को भी पनपने से रोकती है, जो सांस में दुर्गंध पैदा करते हैं.

स्ट्रैस

ग्रीन टी एंग्जाइटी और स्ट्रैस से मुक्ति में सहायक होती है. इसलिए ग्रीन टी से स्ट्रैस पर नियंत्रण पाया जा सकता है.

ऐलर्जी

ग्रीन टी में मौजूद ईजीसीजी किसी भी तरह की स्किन ऐलर्जी से मुक्ति में सहायक है. इसलिए यदि आप को ऐलर्जी है, तो ग्रीन टी आप के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.

एचआईवी

जापान के वैज्ञानिकों ने पाया है कि ग्रीन टी शरीर के हैल्दी इम्यून सैल्स को आपस में इकट्ठा कर के एचआईवी संक्रमण को रोक सकती है.q

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