गृहशोभा विशेष

मैं 26 साल की युवती हूं. मेरा 2 महीने बाद विवाह होने वाला है. मेरा मासिकचक्र बिलकुल नियमित है. गिनती करने पर मुझे लगता है कि जिस महीने मेरा विवाह होने वाला है उस महीने मासिकधर्म और विवाह की तारीख एकदूसरे से मिल जाएं. क्या कोई ऐसा उपाय है जिस से मासिकधर्म पहले या बाद में हो?

आप बहुत आसानी से मासिकधर्म को आगेपीछे कर सकती हैं और यह निर्णय आप अभी से ले लें तो बेहतर होगा. अपनी फैमिली डाक्टर से मिल कर आप अभी से गर्भनिरोधक कौंट्रासेप्टिव पिल्स लेना शुरू कर दें.

इन का नियम बिलकुल सरल है. जिस तारीख को आप पीरियड्स शुरू होने की इच्छा रखती हैं, उस से 3-4 दिन पहले कौंट्रासेप्टिव पिल्स बंद कर दें. पीरियड्स के 5वें दिन से दोबारा कौंट्रासेप्टिव पिल्स लेना शुरू कर दें. आमतौर पर ये पिल्स अगले 21 दिनों तक लेनी होती हैं. पर विशेष स्थितियों में जब पीरियड्स अधिक दिन तक विलंबित करने होते हैं तो कौंट्रासेप्टिव पिल्स अधिक दिनों तक भी जारी रखी जा सकती हैं. उन्हें बंद करने के 3-4 दिनों बाद पीरियड्स आ जाता है. इस हिसाब से डाक्टर से चर्चा कर आप मासिकधर्म जितने दिन चाहें, उतने दिन आगे खिसका सकती हैं.

कौंट्रासेप्टिव पिल्स लेने से आप विवाह के शुरू के दिनों में गर्भवती होने से भी बची रहेंगी. पर यह ध्यान रखें कि कौंट्रासेप्टिव पिल्स शुरू करने से पहले फैमिली डाक्टर से एक बार सलाह जरूर ले लें.

जिन स्त्रियों को मिरगी, माइगे्रन, डायबिटीज या हाई ब्लडप्रैशर हो या फिर जो धूम्रपान करती हों, जिन्हें मासिक ठीक से न होता हो, जिन के खून में कोलैस्ट्रौल अधिक मात्रा में हों, जिन्हें पहले कभी खून का थक्का बना हो, उन्हें कौंट्रासेप्टिव पिल्स नहीं दी जातीं.

मेरी मां की उम्र 62 साल है. उन्हें हड्डियों में दर्द रहता है. जांच, एक्सरे कर के डाक्टर ने बताया है कि उन्हें औस्टियोपोरोसिस है. उन की हड्डियां कमजोर हो गई हैं. मां डाक्टर की बताई दवा ले रही हैं पर मैं खुद को ले कर चिंतित हूं कि कहीं यह रोग मुझे भी तो नहीं हो जाएगा? क्या मैं अपने बचाव के लिए कुछ उपाय कर सकती हूं?

हां, क्यों नहीं. आप की मां के डाक्टर ने यह बात ठीक ही बताई है कि औस्टियोपोरोसिस में हड्डियां अंदर ही अंदर कमजोर हो जाती हैं. नतीजतन छोटी सी चोट भी उन पर भारी पड़ सकती है और वे चटक सकती हैं. ऐसे लोग जो खानपान, रहनसहन और आचारव्यवहार के प्रति लापरवाही बरतते हैं या कुछ खास दवा लेने के लिए मजबूर होते हैं, उन में जवानी पार होने के बाद हड्डियों की ताकत घटती जाती है. मगर कोई अपने स्वास्थ्य के प्रति समय से चेत जाए, तो हड्डियों को कमजोर होने से बचा सकता है. इस के लिए निम्नलिखित बातों को गांठ बांध लेना जरूरी है:

चुस्त रहें, तंदुरुस्त रहें: आप जितना चलतेफिरते हैं, शारीरिक मेहनत करते हैं, व्यायाम करते हैं आप की हड्डियां उतनी ही मजबूत बनी रहती हैं. जिन लोगों का पूरा दिन बैठेबैठे बीतता है उन की हड्डियां 40 की उम्र से ही कमजोर होनी शुरू हो जाती हैं. लेकिन शारीरिक भागदौड़ करने वालों की हड्डियां बुढ़ापे में भी ताकत नहीं गवांतीं. अगर आप का स्वास्थ्य अनुमति देता रहे तो जब तक यह जीवन है, व्यायाम को अपनी नित्यचर्या का अंग बनाए रखें. रोज 30-40 मिनट की सैर हड्डियों को युवा बनाए रखने का सब से सरल उपाय है.

पर्याप्त कैल्सियम लें: हड्डियों के निर्माण और पोषण के लिए कैल्सियम जरूरी पोषक तत्त्व है. वयस्क स्त्री और पुरुष के लिए नित्य 500-600 मिलीग्राम कैल्सियम जरूरी है. बुढ़ापा आने पर कैल्सियम की यह दैनिक जरूरत बढ़ कर 1,000 मिलीग्राम हो जाती है.

दूध और दूध से बने पदार्थ जैसे दही, छेना, पनीर, मक्खन कैल्सियम के सब से अच्छे स्रोत हैं. आधा लिटर दूध में 600 मिलीग्राम कैल्सियम होता है. शरीफा, खजूर, खुबानी, किशमिश, हरी पत्तेदार सब्जियां, अनाज, पेयजल और मछली में भी कैल्सियम अच्छी मात्रा में होता है. आहार से कैल्सियम की भरपाई न हो पाए तो डाक्टर से सलाह ले कर कैल्सियम की गोलियां भी ली जा सकती हैं.

शरीर में विडामिन डी का भंडार बनाए रखें: शरीर में विटामिन डी का पर्याप्त भंडार होना भी हड्डियों के निर्माण और पोषण के लिए जरूरी है. अगर शरीर में विटामिन डी की कमी हो तो कैल्सियम के जज्ब होने में अड़चन आ जाती है. चाय और कौफी का कम सेवन करें: चाय, कौफी और ठंडे पेय अधिक पीने से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. मदिरा और धूम्रपान से दूर रहें: मद्यपान और धूम्रपान करने वालों की हड्डियां भी जल्दी ताकत गवां बैठती हैं.

कुछ दवाएं भी दोषी हो सकती हैं: कुछ दवाएं भी हड्डियों की मजबूती कम करती हैं. इन में कार्टिकोस्टीरौयड सब से महत्त्वपूर्ण है. दूसरी दवा हिपेरिन है, जो रक्तजमावरोधक है और कुछ खास हृदयरोगियों को दी जाती है. इस दवा के प्रयोग से बचा तो नहीं जा सकता, पर इसे रोज ले रहे हैं तो सावधान अवश्य हो जाएं.

कुछ बीमारियां भी हड्डियों में सेंध लगाती हैं: कोई लंबी बीमारी जैसे रूमेटाएड गठिया, मिरगी, डायबिटीज, दमा, क्रौनिक ब्रौंकाइटिस और खास हारमोनल विकार तथा उन में दी जाने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव से भी हड्डियां छोटी उम्र में ही कमजोर होने लगती हैं.

इन बीमारियों के होने पर जीवन में अनुशासन रख कर हड्डियों की मजबूती कायम रखी जा सकती है. नियमित सैर करें. खानपान का भी ध्यान रखें. किसी गलत लत में न पड़ें.

-डा. यतीश अग्रवाल

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