‘मेरी जिम जाने की दिल से चाहत है, लेकिन क्या करूं समय ही नहीं मिलता,’ यह बात कुछ लोगों से अकसर सुनने को मिलती है. फिटनैस के लिए आज का युवावर्ग जितना जागरूक और सजग है, उतना ही दूसरा वर्ग भी हो जाए और काम के झमेले, काम के तनाव वगैरह में से अपनेआप पर ध्यान देने के लिए समय निकाले तो अपनी चाहत पूरी न होने और अपने स्वास्थ्य व फिटनैस को ले कर पछतावा नहीं रहेगा.

शरीर प्रकृति की एक सुंदर, परिपूर्ण रचना है. यह शरीर जितना चलताफिरता है उतना ही मजबूत, हट्टाकट्टा और लचीला बना रहता है. इस शरीर को अच्छे आहार और व्यायाम का जोड़ दे कर प्रकृति का दिया हुआ लचीलापन व हट्टाकट्टापन जिंदगी भर संभाला जाता है. सहज रूप से करीना के जीरो फिगर और सिक्स पैक एब्स का आकर्षण हर एक को होता है, लेकिन उस के लिए कितने लोग मेहनत करने को तैयार होते हैं? सभी लोग इस के पीछे भागें यह जरूरी नहीं है, लेकिन अपने शरीर की सुडौलता बनाए रखने और जिंदगी भर स्वस्थ रहने के लिए अपनी व्यस्त जीवनशैली से थोड़ा समय अपने लिए निकालने में क्या मुश्किल है?

‘अपनीअपनी डफली अपनाअपना राग’ यह कहावत व्यायाम के लिए भी खरी उतरती है. जबकि व्यायाम की रूपरेखा इंसान के स्वास्थ्य, जीवनपद्धति, व्यवसाय व उम्र इन सभी चीजों को ध्यान में रख कर तय करनी पड़ती है. किसी एक इंसान के द्वारा किया जाने वाला व्यायाम दूसरे व्यक्ति को भी सूट करेगा ऐसा नहीं है. अच्छी नहीं लगने वाली तनाव, कष्ट या क्लेशदायक गतिविधि को हम व्यायाम नहीं कह सके हैं. लेकिन योग, रनिंग, वेट ट्रेनिंग, स्विमिंग, कोई खेल खेलना या डांस करना इन में से कोई भी व्यायाम हमें जिंदगी भर स्वस्थ रख सकता है.

व्यायाम के तत्त्व

व्यायाम करते समय 5 चीजें ध्यान में रखनी चाहिए:

शरीर का खिंचाव बढ़ाना: व्यायाम के सभी तत्त्वों में यह सब से महत्त्वपूर्ण तत्त्व है. व्यायाम करते वक्त हम शरीर को जो खिंचाव देते हैं, वह हमारी आम गतिविधियों के खिंचाव से ज्यादा होना चाहिए. धीरेधीरे उस की गति बढ़ानी चाहिए.

मांग के अनुसार निर्माण करना: यह व्यायाम का बहुत ही महत्त्वपूर्ण तत्त्व है. अपना शरीर व उस के अवयव हम जैसी मांग करें वैसे काम करने लगते हैं. खुद को हालात से जोड़ने लगते हैं. उसी तरह व्यायाम के लिए भी बौडी उस के अनुकूल करनी पड़ती है. जैसे, अगर वेट ट्रेनिंग करनी है तो शुरुआत वार्मअप वेट ट्रेनिंग से करनी पड़ती है. मतलब यह कि प्रमुख व्यायाम में जो स्नायु काम करने वाले हैं वही स्नायु पहले व्यायाम के लिए तैयार करने होते हैं.

शरीर में कमजोरी न आने देना: अच्छी तरह व्यायाम करने के बाद शरीर में कमजोरी नहीं आने देना चाहिए वरना शरीर सक्षम नहीं रहता है. ऐसा न हो इस के लिए सही आहार, ज्यादा पानी व नींद की जरूरत होती है.

निरंतरता: व्यायाम में निरंतरता बनाए रखना जरूरी होता है, अन्यथा सब बेकार हो जाता है. व्यायाम नियमित रूप से नहीं करेंगे तो स्नायु व्यायाम के बारे में भूल जाएंगे. इस का सभी तत्त्वों पर नकारात्मक प्रभाव होता है.

व्यायाम में वैविध्य रखना: लगातार एक ही तरह के व्यायाम की शरीर को आदत हो जाती है तो भी उस का सकारात्मक परिणाम दिखना बंद हो जाता है. इसलिए व्यायाम में वैविध्य रख कर उस का सुव्यवस्थित नियोजन कर व्यायाम विशेषज्ञ के मार्गदर्शन के अनुसार व्यायाम करना चाहिए.

कौन सा व्यायाम करें

हर एक के शरीर का स्ट्रक्चर और जरूरतें अलगअलग होती हैं. उन के अनुसार ही व्यायाम चुनना चाहिए. इस के लिए प्रशिक्षक की मदद लेनी चाहिए. व्यायाम का प्रकार,समय,

परिवर्तन आदि प्रशिक्षक की सलाह ले कर तय करना चहिए.

व्यायाम के लिए उपयुक्त टिप्स

– व्यायाम का प्रकार कोई भी हो व्यायाम के मूलभूत तत्त्वों का पालन करना चाहिए.

– कौन सा व्यायाम करना है यह विशेषज्ञ के मार्गदर्शन के बाद ही तय करना चाहिए.

– व्यायाम तकलीफ देने वाला न हो कर आनंददायी होना चाहिए.

– तालमेल बैठाने वाला व्यायाम करें, लेकिन उसे नियमित रूप से करें.

– हर दिन के व्यायाम का समय निश्चित करें और उसी समय का पालन करें.

– व्यायाम करना अपनी जीवनशैली बनाएं.

– व्यायाम से पहले कुछ हलका खाएं. जैसे, सलाद, फल या ड्राईफ्रूट.

– खाने के 3-4 घंटे बाद व्यायाम करें.

– व्यायाम के परिधान आकर्षक होने के साथ सूती और आरामदायी होने चाहिए.

– मौसम के अनुसार कपड़ों में बदलाव करें. ठंडी हवा में ऊपर से जैकेट पहनें.

– व्यायाम करते वक्त पसीना पोंछने के लिए पास में नैपकिन रखें.

– इस बात को समझें कि व्यायाम की शुरुआत में बदनदर्द होता है, लेकिन बाद में फायदा ही फायदा होता है.

– व्यायाम करते वक्त मन को तरोताजा व सोच सकारात्मक रखें.

चलती रहें दौड़ती रहें

चलना व्यायाम के रूप में इस्तेमाल करना चाहती हैं तो इन टिप्स पर ध्यान दें:

– चलते वक्त श्वसन क्रिया पर नियंत्रण रखें. दीर्घ श्वसन क्रिया से हृदय का भी व्यायाम होता है.

– व्यायाम बिना खर्चे का है, लेकिन शूज पर अच्छे पैसे खर्च करें और सही माप के शूज का चुनाव करें.

– मोजे सूती इस्तेमाल करें.

– आज के संघर्ष भरे जीवन में व्यायाम के लिए कोई भी समय अच्छा ही है, लेकिन चलने के लिए सुबह के समय का चुनाव करें, क्योंकि उस वक्त हवा में धूलमिट्टी, धुएं आदि का प्रभाव कम होता है.

दौड़ना एक परिपूर्ण व्यायाम

वजन कम होना, शारीरिक क्षमता बढ़ना आदि दौड़ने के महत्त्वपूर्ण फायदे हैं. इस के अलावा और भी कई फायदे दौड़ने से शरीर को होते हैं:

निरोगी हृदय: दौड़ने से हृदय के स्नायुयों को अच्छा फायदा होता है. हृदय की गति बढ़ती है. इस से स्नायुओं की ताकत बढ़ती है.

वजन कम होना: वजन कम करने के लिए दौड़ना एक सुंदर व्यायाम है. एक साधारण व्यक्ति दौड़ते वक्त लगभग 1 हजार कैलोरीज जलाता है. इस से वजन कम हो जाता है.

हड्डी की क्षमता बढ़ाना: व्यायाम न करने से हड्डियां कमजोर होती हैं. लेकिन नियमित रूप से दौड़ने से व्यायाम न करने पर भी हड्डियों की क्षमता बढ़ती है.

श्वसन क्रिया में सुधार: दौड़ने से श्वसन क्रिया में सुधार होता है. श्वसन को मदद करने वाले स्नायुओं की ताकत और श्वसन क्षमता बढ़ती है.

वसा कम होना: जल्दी दौड़ने के लिए ऊर्जा लगती है, जिस के लिए शरीर में जमे हुए फैट्स का ज्वलन होता है. इस में वेट कम हो कर शरीर सुडौल बनता है.

मानसिक तनाव से मुक्ति: नियमित दौड़ने से तनाव से दूर रहने में भी मदद मिलती है. इस से सकारात्मक मानसिकता तैयार होती है. दिन भर फ्रैश रहने के लिए मदद मिलती है और थकावट नहीं होती.

अच्छी नींद आना: दौड़ने पर पूरे शरीर को व्यायाम मिलने से अच्छी नींद आती है.

प्रसन्न रहना: दौड़ने से शरीर में बदलाव होते हैं. इस से इंसान प्रसन्न रहता है.

बीमारी से दूर रहना: नियमित रूप से दौड़ने से स्ट्रोक, रक्तचाप, डायबिटीज जैसी बीमारियों से दूर रहना संभव होता है.

– अली शेख, फिटनैस विशेषज्ञ