गृहशोभा विशेष

गहरी और अच्छी नींद के लिए क्या आप मैडिसिन बौक्स में स्लीपिंग पिल्स ढूंढ़ रही हैं या करवट बदल रही हैं या टांगों के बीच तकिया दबाए रखने की कोशिश में हैं? छोडि़ए इन सब बातों को. केवल अपनी रसोई में झांकिए. उसी में आप की गहरी नींद का सामान छिपा है. डाक्टरों का कहना है कि हलका, नर्म और गरम खाएं तो रात में नींद अच्छी आती है. इस के कुछ नुसखे ये हैं-

केला खाने की आदत डालें

केला एक बहुत बड़ी स्लीपिंग पिल है. केले में पाई जाने वाली पोटैशियम की प्रचुर मात्रा मांसपेशियों की ऐंठन को आराम देने और गहरी नींद की ओर धकेलने में सहायक होती है. बस फिर सोच क्या रहे हैं, कोशिश तो कर के देखिए.

मां की कही बात याद करें

मां गरम दूध में शहद डाल कर, बच्चे को सोने से पहले पीने के लिए कहती है ताकि अच्छी और गहरी नींद आ सके. आप के साथ भी ऐसा हुआ जरूर होगा. इस बात के पीछे वैज्ञानिक तथ्य भी होते हैं. दरअसल, दूध में ट्राइप्टोफेन तत्त्व होने के कारण ही ऐसा नहीं होता, बल्कि शहद मिले गरम दूध में प्रोटीन और थोड़ी सी वसा होने के कारण दूध आप का पेट भराभरा रहने का एहसास देता है. आप को तसल्ली रहती है और भूख से नींद नहीं उड़ती. इसलिए अच्छे एहसास के साथ और शांतचित्त हो कर शहद मिला गरम दूध पी कर सोएं तो नींद खुदबखुद आ जाएगी.

जल्दी करें रात का भोजन

बुजुर्ग हों, डाइटीशियन या फिर डाक्टर, सभी का मत है कि रात का खाना जल्दी खाएं. देर रात में भोजन करने की आदत न डालें, क्योंकि सोने से पहले खाने पर हमारी पाचनतंत्र प्रणाली सक्रिय हो उठती है. जाहिर है, भोजन पचने में वक्त लगता है, जिस से आप की नींद बारबार टूटती है. याद रखें पाचन क्रिया को अपना कार्य, यदि आप लेटे हैं या सो रहे हैं, करना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता. इसलिए पेट की कोई न कोई शिकायत, जैसे गैस बनना, अपच हो जाना, अकसर देर रात खाने से हो जाती है. इसलिए प्रकृति के विरुद्ध न जाएं.

समय के पाबंद बनें

चिकित्सकों का मानना है कि हमारे शरीर में सिरकाडियन सिस्टम है जिस से हमारे शरीर की भीतरी घड़ी हमें नियंत्रित करती है ताकि हमारा शरीर सुचारु रूप से चलता रहे. आप ने अकसर सुना होगा कि हमारे कई बुजुर्ग एक निश्चित समय पर ही खाते हैं. यदि उन के खाने का समय थोड़ा सा भी इधरउधर हो जाए, तो उन्हें नींद नहीं आती. ये सब सिरकाडियन सिस्टम के कारण ही होता है. वक्त पर खाने से पलकें खुदबखुद बोझिल होने लगती हैं, जबकि बेवक्त खाने से कई बीमारियां शरीर को घेर लेती हैं. आज की जीवनशैली में दफ्तरों, कार्यालयों में भी लंच व डिनर का समय एकदम फिक्स रहता है. लंबी आयु, स्वस्थ शरीर, शांति और तनावमुक्त जीवन अच्छे खानपान और पाबंद समय से खाने पर ही संभव है.

दूध और ओटमील लें

नींद का एक नुसखा यह भी है कि भारी व तला हुआ भोजन सोने से पहले न लें. यदि ओटमील और दूध लें तो बेहतर होगा. दूध में होने वाला प्रोटीन ओटमील के कार्ब्स को हजम करने में मदद करता है, जिस से सीरोटोनीन नामक हारमोन पैदा होता है और यह हारमोन नींद लाने में सहायक है. इसलिए ओटमील युक्त दूध का सेवन एक तरह से स्लीपिंग पिल का काम करता है.

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