रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो तो हम आसानी से विभिन्न बीमारियों की गिरफ्त में आ सकते हैं. आवश्यक है कि हमारा शरीर अंदरूनी तौर पर इतना मजबूत हो कि इन बीमारियों का स्वयं मुकाबला कर सके. बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर होती है. मां के गर्भ में ये मां की रोग प्रतिरोधक क्षमता के सहारे जीवित रहते हैं. जन्म के बाद इन के शरीर में गुड इंटैस्टिनल बैक्टीरिया की संख्या काफी कम होती है. जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु बेहद आवश्यक है. विटामिन ए.सी.ई, किरैटोनौएड्स, बायोफ्लेवोनौएड्स, ओमेगा फैटी ऐसिड्स आदि से भरपूर खाद्यपदार्थ हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार होते हैं.

क्या खाएं

सर्दियों के मौसम में कई सब्जियां आसानी से मिल जाती हैं, जो एंटीऔक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं जैसे ब्रोकोली, गाजर, आंवला आदि. ये हमारे इम्यून सिस्टम को सुदृढ़ बनाती हैं.

हट जाता है बैन

सर्दियों में शहद, दालचीनी, मछली, अंडे आदि लें. मछली में भरपूर प्रोटीन के साथसाथ भरपूर विटामिन डी होता है. बच्चों को सप्ताह में 4-5 अंडे खिलाने चाहिए. ओमेगा-3 फैटी ऐसिड्स से भरपूर अखरोट को चाहे बच्चों को ऐसे ही खिलाएं या फिर किसी हैल्दी स्नैक या डैजर्ट के ऊपर टौपिंग के रूप में. विटामिन सी युक्त फल जैसे संतरा, मौसमी, अनन्नास, कीवी आदि नियमित खाने से आप का बच्चा कम बीमार पड़ेगा. बच्चों को औरेंज जूस में गाजर, चुकंदर अनन्नास या सेब का जूस मिला कर पिलाएं, क्योंकि उन्हें गाजर व चुकंदर का स्वाद कम भाता है. मसालों में विशेष रूप से दालचीनी व कालीमिर्च इम्यून सिस्टम को दृढ़ करते हैं. इन्हें किसी सलाद, जूस, दही आदि पर टौपिंग के रूप में इस्तेमाल करें. विटामिन बी के लिए गेहूं से बनी ब्रेड घर में लाएं. इन के अलावा ओट्स, ब्राउन राइस, स्वीट कौर्न आदि भी बच्चों को पसंद आ सकते हैं.  यदि किसी कारण बच्चों को एंटीबायोटिक दवा देनी पड़ी हो तो उस का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि ऐसी दवाओं से शरीर में मौजूद गुड बैक्टीरिया नष्ट होते हैं. बाजार में मौजूद किसी भी हैल्थ ड्रिंक या फूड सप्लीमैंट की न्यूट्रिशनल वैल्यू व उस में मौजूद तत्त्वों के बारे में पता करें. जिस में अधिक से अधिक एंटीऔक्सीडेंट्स मौजूद हों, वही सप्लीमैंट खरीदें. ताकि  आप का बच्चा बने अंदर से मजबूत.

  • और एक बात, बचपन का मतलब है मस्ती और हुड़दंग. अत: बच्चे को खुल कर खुली हवा में खेलने दें, क्योंकि जबजब आप का बच्चा भागता दौड़ता है तो उस के फेफड़े सक्रिय होते हैं और उन में विकसित होने की प्रक्रिया शुरू होती है
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