गृहशोभा विशेष

गहरी और अच्छी नींद बच्चे, जवान, बूढ़े सभी के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. रात भर गहरी नींद सोने वाले दिन भर तरोताजा रहते हैं. ऐसे लोगों का न केवल मन प्रसन्न रहता है, बल्कि शरीर में स्फूर्ति भी रहती है. कई रोगों से भी छुटकारा मिलता है. जो लोग रात को ठीक से नहीं सो पाते, वे दिन भर सुस्त और चिड़चिड़े से रहते हैं. एकाग्रता में कमी की वजह से उन की कार्यक्षमता पर भी कुप्रभाव पड़ता है. असमय ही उन के चेहरे पर झुर्रियां, झांइयां पड़ने लगती हैं.

अध्ययनों से यह सिद्ध हो गया है कि जो गहरी नींद नहीं सोते हैं, उन के शरीर में रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता गहरी नींद सोने वालों की अपेक्षा अत्यधिक कम होती है. जिन लोगों को रात में ठीक से नींद नहीं आती है या जो अनिद्रा रोग के शिकार होते हैं, वे दूसरी तरह की गंभीर समस्याओं से भी जूझते हैं. ऐसे लोगों का शरीर इंसुलिन नामक हारमोन के प्रति कम संवेदनशील होता है और वे आगे चल कर मोटापा, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीडि़त होते हैं.

गहरी नींद के फायदे

हैल्दी आर्ट : अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि हार्टअटैक तथा स्ट्रोक की घटनाएं एकदम सवेरे ज्यादा होती हैं, क्योंकि रक्तचाप का सीधा संबंध सोने के तरीकों तथा रक्तनलिकाओं से जुड़ा है. कम देर सोने से रक्तचाप के साथसाथ रक्त में कोलैस्ट्रौल की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो हार्टअटैक तथा स्ट्रोक दोनों के लिए रिस्क फैक्टर है. आप का हार्ट तभी स्वस्थ रहेगा जब आप रोज 7 से 9 घंटे अच्छी नींद सोते हैं.

कैंसर से बचाव : नाइट शिफ्ट में काम करने वालों में ब्रैस्ट तथा छोटी आंत का कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस का सीधा संबंध मिलैटोनिन के स्राव से है. लाइट की वजह से इस का स्राव कम हो जाता है. मिलैटोनिन नींद में सहायता ही नहीं करता, बल्कि कैंसर से भी बचाता है. यह हारमोन ट्यूमर को बढ़ने से रोकता है. इसलिए यह निश्चय कर लें कि आप के बैडरूम में रात को पूरी तरह अंधेरा रहता है या नहीं, ताकि आप का शरीर पर्याप्त मात्रा में मिलैटोनिन का स्राव कर सके.

स्ट्रैस को कम करना : जब आप गहरी नींद नहीं सोते, तो आप का शरीर स्ट्रैस की स्थिति में पहुंच जाता है, जो उच्च रक्तचाप का कारण बनता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में शरीर में स्ट्रैस हारमोन का बनना बढ़ जाता है. ये दोनों स्थितियां हार्टअटैक तथा हार्टस्ट्रोक को आमंत्रित करती हैं. स्ट्रैस हारमोन नींद में बाधा पहुंचाने में सहायता करता है. इसलिए रिलैक्सेशन तकनीक को जानें ताकि स्ट्रैस के प्रभाव को कम किया जा सके. इस से नींद की समस्या दूर होने में सहायता मिलेगी.

स्ट्रैस हारमोन शरीर में सूजन के स्तर को बढ़ाता है, जो हार्ट डिजीज, कैंसर तथा डायबिटीज के लिए रिस्क फैक्टर का काम करता है. जो रात भर गहरी नींद सोते हैं, उन में इन की संभावना नहीं होती.

सक्रियता में वृद्धि : रात भर गहरी नींद के बाद सुबह जब उठते हैं तो मन काफी प्रसन्न तथा स्फूर्तिदायक होता है. दिन भर चुस्त तथा ऊर्जावान बने रहने के बाद शाम को जब सोने जाते हैं तो अच्छी नींद आती है.

वजन का घटना : शोधकर्ताओं के अनुसार जो लोग 7 घंटे से कम सोते हैं, उन के मोटापे के शिकार होने की संभावना होती है. नींद की कमी का प्रभाव भूख को नियंत्रित करने वाले हारमोनों घ्रेलिन तथा लैप्टिन पर पड़ता है, जो नींद की कमी की वजह से असंतुलित हो जाते हैं. अत: यदि आप अपना वजन नियंत्रित करना चाहते हैं, तो रात को गहरी नींद जरूर सोएं.

आखिर नींद क्यों नहीं आती

एक आंकड़े के अनुसार दुनिया भर में 30 से 50% लोग सामान्यतया 1 बार नींद न आने की समस्या का शिकार जरूर होते हैं. इन में 10% अनिद्रा जैसे पुराने रोग से पीडि़त होते हैं. पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इस का शिकार ज्यादा होती हैं. अनिद्रा के मुख्यत: निम्न लोग शिकार होते हैं :

– शराबी तथा और कोई नशा करने वाले.

– मानसिक रोगी.

– स्ट्रैस, चिंता और अवसाद से ग्रस्त रहने वाले.

– शिफ्ट ड्यूटी में काम करने वाले.

– कलहयुक्त माहौल में रहने वाले.

– जिन के बैडरूम का तापमान अत्यधिक गरम या फिर ठंडा रहता है.

– बेरोजगार, परीक्षा की तैयारी करने वाले, तलाकशुदा आदि.

– दर्द, बुखार, खांसी, डायरिया, हृदयरोग, सांस की बीमारी से ग्रस्त रहने वाले.

नींद न आने पर क्या करें

जब 3-4 सप्ताह तक नींद न आए तब डाक्टर की सलाह जरूर लें. यदि इस की वजह से किसी की रूटीन लाइफ प्रभावित होती है, तो इस से पहले भी सलाह ली जा सकती है. यहां यह स्पष्ट कर दें कि अनिद्रा एक लक्षण है, जो कोई शारीरिक या मानसिक बीमारी होने की ओर इंगित करता है.

सामान्यतया कुछ दिनों तक अकारण नींद न आने की शिकायत कई लोगों को होती है. इस के लिए इलाज कराने की जरूरत नहीं पड़ती. कुछ दिनों बाद स्वत: नींद आने लगती है. हां, वे लोग जो काफी समय से इस समस्या से जूझ रहे हों उन्हें कई तरह की दवाओं के सेवन की जरूरत पड़ती है.

जम कर कैसे सोएं

बैडरूम केवल सोने के लिए : बैडरूम का प्रयोग केवल सोने और सैक्स के लिए करें. पढ़ने, इंटरनैट सर्फ करने या टीवी देखने के लिए नहीं. यदि बिस्तर पर लेटने के 15 मिनट के दौरान नींद न आए तो बैड छोड़ दें और दोबारा तब तक बैड पर न जाएं जब तक नींद न आने लगे. इस बीच टीवी देखें या फिर कोई किताब आदि पढ़ें.

नियम बनाएं : बैड पर जाने और उठने का समय तय कर लें. यदि आप इस का पालन नियमित रूप से करेंगे तो इस से आप को नियत समय पर जल्दी नींद आएगी और दूसरे दिन आप ज्यादा फ्रैश नजर आएंगे. न लेट सोएं और न ही लेट जागें. छुट्टी के दिन भी ऐसा न करें.

नियमित ऐक्सरसाइज करें : डेली ऐक्सरसाइज एकदम सुबह ही करने की कोशिश करें. इस से न केवल नींद हाइजीन में वृद्धि होगी, बल्कि आप पूरी तरह स्वस्थ भी रहेंगे. सोने से पहले ऐक्सरसाइज या थका देने वाला काम न करें. इस से सोते समय परेशानी होगी.

सुबह की धूप का सेवन करें : सुबह की धूप के नियमित सेवन से मिलैटोनिन नामक हारमोन के निर्माण में वृद्धि होती है, जो गहरी नींद में सहायक होता है. इसलिए सुबह थोड़ी देर धूप का सेवन जरूर करें.

दोपहर के बाद चायकौफी से बचें : कई लोग कैफीन के प्रति संवेदनशील होने के कारण चायकौफी दोपहर के बाद नहीं पीते. यदि आप को भी नींद में परेशानी होती है, तो आप भी छोड़ दें.

शांत वातावरण और सही तापमान हो : आप का बैडरूम पूरी तरह शांत यानी कोलाहल से दूर हो तथा उस का तापमान भी सामान्य होना चाहिए यानी न ज्यादा गरम, न ज्यादा ठंडा.

रिलैक्सेशन तकनीक का सहारा लें : सोने के पहले मैडिटेशन आदि से मन हलका और रिलैक्स होता है और सोते समय गहरी नींद आती है.

डाक्टर का सहयोग लें : यदि लाइफस्टाइल में परिवर्तन लाने के बावजूद आप रात में अच्छी और गहरी नींद नहीं सो पाते हैं तो डाक्टर से सहायता लें. हो सकता है कि आप स्लीप डिसऔर्डर नामक बीमारी से गुजर रहे हों. इस के लिए डाक्टर आप को कुछ दवाएं देंगे, जिन के सेवन के बाद आप गहरी और अच्छी नींद सोने लगेंगे.

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