गृहशोभा विशेष

आज के दौर में हर माता-पिता को यह चिंता सताती है कि उसका बच्चा खाने से सही पोषण पा रहा है या नहीं. अधिकतर माएं इस अपराधबोध से ग्रसित हो जाती है और क्या करें सोचती रहती है. इस बारें में न्यूट्रिशनिस्ट और डायेटेटिक  डा. एलेन केंडी कहती हैं कि बच्चों में पहले 2 साल ब्रेन ग्रोथ होता है इस समय बच्चे के खान पान पर अधिक ध्यान देना पड़ता है. इस समय बच्चो के साथ उनके माता-पिता को भी खाने या साथ देने की जरुरत होती है ताकि वे इस प्रोसेस को समझ सकें. बच्चे बहुत चूजी होते हैं, लेकिन न्यूट्रिशन फूड का खास ध्यान इस समय रखना पड़ता है. अच्छे खाने की आदतें बच्चे को बचपन से ही सिखाना पड़ता है. इसके लिए उनके साथ माता-पिता को क्वालिटी टाइम बिताना जरुरी होता है.

पीडियाश्योर की इस इवेंट में आई अभिनेत्री लारा दत्ता कहती है कि मां बनने के बाद मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गयी. पहले बेटी फिर पति और पूरा परिवार और अंत में मैं खुद हूं. मेरी कोशिश ये होती है कि मैं बच्चे को सही पोषण वाले भोजन दूं और ये सिलसिला एक मां का बच्चे के साथ पूरी उम्र तक जुड़ा होता है. मेरी बेटी भी इसे फोलो करती है उसे जो भी खाना मैं देती हूं वह उसे खाती है. मेरे बच्चे की परवरिश में महेश का भी बहुत हाथ रहा है. शुरू से उन्होंने उसके डाइपर बदले है उसे जो भी जरुरत होती थी, वे हमेशा मेरे साथ रहे. मेरे पति और बेटी दोनों ही मिठाई अधिक पसंद करते हैं लेकिन मैं अपने हिसाब से उन्हें खाने देती हूं.

इसके आगे लारा कहती है कि खाना खाते समय मैंने बचपन में कभी टीवी नहीं देखा और वही नियम मैंने बच्चे के साथ भी रखा है. अगर टीवी देखना है, तो खाना खत्म करने के बाद या पहले देखें, वह भी सिर्फ आधा घंटा समय ही उसे दिया है, क्योंकि इससे बच्चा खाने के महत्व और स्वाद को नहीं समझ पाता. अधिकतर बच्चे टीवी देखकर खाते हुए ओवर ईटिंग करते हैं और जो भी खाना उसके शरीर में जा रहा है, उसका सही उपयोग नहीं होता. जब मैं मां बनी तो सभी ने बच्चे को लेकर अलग-अलग राय दी, लेकिन हर बच्चा अलग होता है और उसकी जरूरतों को मां को ही समझना पड़ता है. जब मेरी बेटी को मैंने सौलिड खाना दिया, तो वह उसे भी अच्छी तरह खाती थी, इससे मुझे कोई मुश्किल नहीं हुई. आज भी सायरा को जो भी फूड मैं देती हूं वह उसे खा लेती है ये आदत मैंने बचपन से उसमें डाला है, कई बार ऐसा होता है कि बच्चा वह फूड नहीं खाना चाहता, जिसे आप खिलाना चाहती हो, ऐसे में मां को स्मार्ट बनकर उसे अलग तरीके से देना चाहिए ताकि बच्चा उसे देखकर खा लें. मेरी बेटी कुछ खाने से मना करती है, तो मेरा एप्रोच ऐसा रहता है कि जो भी बना है, उसे ही खाना है और वह खाती भी है. एक मां अपने बच्चे को अच्छी तरह समझती है और उसे ये भी समझ में आता है कि उसका बच्चा क्या और कैसे खायेगा.

टेनिस प्लेयर महेश भूपति कहते हैं कि सायरा हमेशा बहुत एक्टिव है. वह डांस के साथ-साथ टेनिस भी खेलती है और उसके हेल्थ का ख्याल लारा रखती है. 6 साल की उम्र में वह सप्ताह में 5 दिन टेनिस खेलती हैं. उसे तैरना और जिम्नास्टिक आता है. उसके मसल्स भी विकसित हो चुके हैं और वह मुझे हराने की इच्छा रखती है, जो अच्छी बात है.

बालरोग विशेषज्ञ डा. इंदु खोसला कहती हैं कि जन्म के दो साल तक बच्चे की ग्रोथ जल्दी होने की वजह से उसकी एक्टिविटी बढ़ जाती है ऐसे में मां को सही पोषण वाले खाद्य पदार्थ देने की जरुरत होती है. इसके बाद प्री एडोलेसन ऐज में भी उनकी मानसिक और शारीरिक ग्रोथ जल्दी होती है. जो 35 साल तक चलता रहता है. बच्चों को सही फूड हैबिट के लिए निम्न बातें ध्यान में रखनी चाहिए,

  • बच्चा माता-पिता के खाने को खाना चाहता है, इसलिए उसके खाने के समय वे भी साथ खाएं,
  • जैसा खाना उन्हें परोसा जाता है, वैसा ही बच्चे को परोसें,
  • अगर बच्चा कुछ खास फल या सब्जी को खाना पसंद नहीं करता, तो उसे अलग तरीके से उनसे परिचित करवाएं,
  • खाने में विटामिन,मिनरल्स आदि का समावेश करें,
  • पहले उसके रंग, सुगंध फिर उसके स्वाद को विकसित करने की जरुरत होती है,
  • एक टेस्ट को बच्चे में विकसित करने में 8 से 25 प्रयास करने की आवशयकता होती है,
  • बच्चे को किसी भी फूड को खाने के लिए दबाव न डालें,
  • उसे अपना खाना खुद चुनने दे,
  • खाना खाते हुए कभी भी टीवी देखने के लिए प्रेरित न करें,
  • जब बच्चा अधिक भूखा हो, उस समय आप गुड हेल्दी खाने से परिचय करवायें,
  • बच्चे के साथ बड़ों के जैसे बातचीत करें.

 

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