आमतौर पर देखा जाता है कि चालीस की उम्र के बाद से महिलाओं में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. 40 की उम्र ऐसा पड़ाव है, जब स्त्री के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. इस उम्र में मेनोपौज के बाद कुछ समस्याएं, जैसे चिड़चिड़ापन, थकान, वजन बढना, लगातार खाते रहने की चाहत आदि हो सकती हैं. हालांकि यह समस्या सभी स्त्रियों में एक समान नहीं होती.

कई महिलाओं को लगता है कि वह बिल्कुल स्वस्थ हैं पर वह वाकई में पूरी तरह से स्वस्थ हो यह जरूरी नहीं है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी हेल्थ को क्रौस चेक करें और डाक्टर से परामर्श लें. इसी के साथ ही रूटीन चेकअप कराती रहें और अपने खानपान और फिटनेस का भी विशेष खयाल रखें.

आइये जानें 40 की उम्र के बाद होने वाली समस्याओं और उनसे बचने के उपायों के बारें में-

ब्लड प्रेशर

इस उम्र में ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है. जब स्त्रियां अपने खानपान पर ध्यान नहीं देतीं तो बीपी बढऩे की पूरी संभावना होती है. यदि आपको लगे कि आपका ब्लड प्रेशर सामान्य है, तब भी नियमित रूप से इसकी जांच करानी चाहिए.

डाइट : इस उम्र में ओमेगा-थ्री फैटी एसिड से युक्त आहार का सेवन रक्तचाप को नियंत्रित करने के साथ हृदय की अनियमित गति को भी ठीक करने में मददगार है.

फिटनेस : एक शोध के अनुसार सिल्वर योग ब्लड प्रेशर की समस्या को कम करता है. अगर आप किसी भी कारण योग नहीं कर पा रही हैं तो सुबह कम से कम 45 मिनट टहलें.  टहलते समय ध्यान रखें कि पहले 10 सामान्य गति से और अगले 20 मिनट तेज गति से चलें और फिर अपनी गति को मध्यम कर 10 मिनट तक चलें. रोजाना 40-45 मिनट ऐसा करें. अगर आप सुबह टहल नहीं पा रही हैं तो रात को डिनर के 30 मिनट बाद टहले.

कोलेस्ट्रौल

ब्लड प्रेशर के साथ-साथ स्त्रियों में कोलेस्ट्रौल की भी समस्या हो जाती है. इसलिए महिलाओं को हर पांच साल में कोलेस्ट्रौल की जांच जरूर करानी चाहिए. एक शोध में पाया गया है कि कभी-कभी एचडीएल या अच्छा कोलेस्ट्रौल भी टाइप-1 मधुमेह से पीडि़त महिलाओं के हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है.

डाइट : उच्च फाइबर खाद्य पदार्थ जैसे दलिया, जौ, गेहूं, फल और सब्जियों का सेवन करें. यह रक्त में कोलेस्ट्रौल कम करने में मदद करता है.

फिटनेस : हफ्ते में पांच दिन 30 से 40 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज करें और अपने लिपिड प्रोफाइल को मौनिटर करें.

डायबिटीज

डायबिटीज अपने आप में एक गंभीर समस्या है. सही समय पर इसका पता न चलने पर हृदय रोग, किडनी व आंखों से संबंधित समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है. इसलिए स्त्रियों को साल में कम से कम एक बार डायबिटीज की जांच अवश्य करानी चाहिए.

डाइट : डायबिटीज में फाइबर डाइट शुगर लेवल को नियंत्रित करता है. इसलिए गेहूं, ब्राउन राइस या व्हीट ब्रेड आदि को अपनी डाइट में शामिल करें, साथ ही ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें. इसके अलावा उच्च प्रोटीन डाइट लें और खूब पानी पिएं.

फिटनेस : व्यायाम करने से शरीर में रक्तसंचार सुचारु रूप से होता है. इससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है, मेटाबौलिज्म संतुलित रहता है और मधुमेह का खतरा कम होता है. वैसे मधुमेह के मरीजों को कई तरह के व्यायाम करने चाहिए. कभी योग करें, कभी कार्डियो और कभी वेट लिफ्टिंग. हमेशा एक तरह से एक्सरसाइज न करें.

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