मोटापा आधुनिक सभ्यता की देन है. कुछ दशकों पूर्व तक भारतीय कुपोषण के शिकार थे, जबकि मोटापा केवल विकसित देशों में पाया जाता था. किंतु आज भारत में कुपोषण व मोटापा दोनों ही हैं. 2014 के ब्रितानी चिकित्सा जर्नल के अनुसार जहां 1975 में भारत मोटापे में 19वें स्थान पर था, वहीं 2014 में महिलाओं के लिए तीसरे तथा पुरुषों के लिए 5वें स्थान पर पहुंच चुका था. भौतिक सुखसुविधाओं में फंस कर लोग खानपान, रहनसहन की गलत आदतों के कारण मोटापे से ग्रस्त हो रहे हैं, जिस की वजह से लाइफस्टाइल डिजीज अर्थात उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदयरोग, घुटनों की समस्या, पैरों में दर्द, महिलाओं में मासिकधर्म और बांझपन संबंधी परेशानियां हो रही हैं.

न्यूजीलैंड के औक्लैंड तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, दुनिया की करीब 76% आबादी मोटापे की शिकार है. केवल 14% आबादी ऐसी है जिस का वजन सामान्य है.

मोटापा कौन कम नहीं करना चाहता और कई बार लोग इसी चक्कर में कई झांसों में भी फंस जाते हैं. बसों, औटो में लगे इश्तिहार कि वजन कम करना चाहते हैं तो संपर्क करें, केवल लोगों को भ्रमित करते हैं. फिर शल्य चिकित्सा द्वारा भी वजन कम करने पर क्या गारंटी है कि वजन दोबारा नहीं बढ़ेगा.

यदि अपना खानपान, रहनसहन नहीं बदला तो अवश्य दोबारा मोटा होने में देर नहीं लगेगी. मगर घबराइए नहीं, मोटापा कम करना उतना कठिन भी नहीं है.

डा. एस के गर्ग मोटापे से बचे रहने के लिए निम्न सलाह देते हैं:

खूब पीएं पानी : एक वैबसाइट के अनुसार जो लोग ज्यादा पानी पीते हैं वे अपना वजन दूसरों के मुकाबले जल्दी कम कर लेते हैं. इस का कारण यह है कि पानी से पेट भर जाता है, जिस से भूख कम लगती है और खाना कम खाया जाता है.

थोड़ीथोड़ी देर में खाते रहें : एकसाथ बहुत अधिक खाने के बजाय, दिन भर थोड़ाथोड़ा खाते रहें. ऐसा करने से दिन भर शारीरिक शक्ति बनी रहती है. सीधे शब्दों में कहें तो जब भूख लगे तब खाना खाएं और जब पेट भर जाए तब रुक जाएं.

अपने शरीर की सुनें : हम में से अधिकतर लोग बाहरी संकेतों के अनुसार खाना शुरू या पूरा करते हैं, जैसे हमारी थाली में खाना बचा तो नहीं या अन्य लोगों ने खाना खत्म किया या फिर दफ्तर में लंच टाइम हो गया. इस की जगह आंतरिक संकेतों पर ध्यान दीजिए. यह समझिए कि आप को भूख लगी है या नहीं और स्वाद में अधिक खाने से बचें. बड़ेबूढ़े स्वास्थ्य की कुंजी पेट ठूंस खाने को नहीं, अपितु थोड़ा सा भूखा रहने को बताते हैं.

भावुक खाने से बचें : जब हम अधिक भावुक या खुश हों, परेशान हों या दुखी, तब हम आमतौर पर अधिक खाने लगते हैं. यह हमारे मन का अपनी स्थिति से आंख चुराने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका होता है. दफ्तर में कार्यभार की डैडलाइन निकट हो या घर में बच्चों के अनुशासन को ले कर कोई समस्या, अकसर अपनी मानसिक परेशानी का हल हम खाने में ढूंढ़ने लगते हैं. भूख हो या नहीं, कुछ खाने का मन करने लगता है. इस से बचें, क्योंकि खाने से आप की समस्या का हल नहीं निकलेगा उलटा समस्या बढ़ेगी.

ट्रिगर फूड को कहें न : कुछ खाने के पदार्थ ऐसे होते हैं जिन्हें खाते हुए हमारे हाथ रुक ही नहीं पाते हैं. चिप्स का पैकेट खोला तो जब तक वह खत्म नहीं हो जाता. हमारा मुंह चलता रहेगा. ऐसा ही हमारे साथ पेस्ट्री, पास्ता, डोनट, चौकलेट आदि खाते समय होता है. ऐसे खानों में रिफाइंड तेल, नमक और चीनी की मात्रा अधिक होने से ये हमारे शरीर में ब्लड शुगर का अनुपात बिगाड़ देते हैं. आप ऐसे खानों को जितनी जल्दी अपनी डाइट से बाहर कर दें उतना ही लाभप्रद रहेगा.

पोर्शन कंट्रोल : सैलिब्रिटी डाइटीशियन, रुजुता दिवेकर की देखरेख में वजन कम करती अभिनेत्री करीना कपूर कहती हैं कि सब कुछ खाओ, मगर सही मात्रा में. डाक्टर गर्ग के अनुसार चाहे आम या चीकू जैसे बेहद मीठे फल खाएं, किंतु यदि अपने खाने की मात्रा को नियंत्रित रखें तो नुकसान नहीं होगा. इसलिए यदि आप अपना वजन सही रखना चाहते हैं तो अपनी थाली में खाने की मात्रा भी सही रखें. स्वादस्वाद में अत्यधिक न खा बैठें.

सफेद भोजन से तोबा : अकसर सफेद रंग को शांति, अच्छाई से जोड़ कर देखा जाता है. किंतु भोजन में यह इस के विपरीत है. सफेद रंग के खाने को अपनी थाली से निकाल दें. मसलन, सफेद चावल की जगह भूरे चावल खाना स्वास्थ्यवर्धक है. सफेद ब्रैड, पास्ता, नूडल, मैदे से बनी चीजें और चीनी सभी हमारी सेहत को खराब करने में अहम भूमिका निभाते हैं. कारण, इन्हें प्रोसैस करते समय अधिकतर पोशक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं और बच जाती है अधिक मात्रा में कैलोरी. अत: इन की जगह चुनिए जई, साबूत अनाज, दलिया, फलियां, ब्राउन ब्रैड, ब्राउन चावल, मावा आदि.

तैलीय भोज्यपदार्थ को कहें न : फास्ट फूड, फ्राइज, डोनट, चिप्स, आलू के चिप्स जैसे तैलीय व्यंजनों को अपने खाने से बाहर करें.

1 बड़े चम्मच तेल में 120 कैलोरी होती है. अधिक तैलीय खाने से शरीर में आलस भरता है. इस की जगह भुना, उबला, भाप में पकाया, बिना तेल के पकाया हुआ या कच्चा भोजन करना उचित है.

मीठा कम खाएं: मिठाई, आइसक्रीम, कैंडी, चौकलेट, केक, जैली या डोनट आदि में चीनी होने के कारण ये हमारे शरीर में शुगर पैदा करते हैं, जोकि एक तरफ तो पेट भरती है और दूसरी तरफ अधिक खाने की इच्छा पैदा करती है. इस से बेहतर है कि आप मीठे में स्वस्थ विकल्प लें जैसे खरबूज, तरबूज आदि फल. इन में प्राकृतिक मीठापन होता है.

हैल्दी स्नैक्स खाएं : जब हलकीफुलकी भूख लगे तब हैल्दी स्नैक्स खाएं जैसे फल, सलाद, मुरमुरा, घर में बनाया नमकीन, भुने चने, भुनी मूंगफली आदि. यदि आप नौकरीपेशा हैं, तो दफ्तर में ऐसा सामान अपने पास रखें ताकि भूख लगने पर आप बिस्कुट या चौकलेट आदि की ओर हाथ न बढ़ाएं.

कम खाएं

डबलरोटी, अंडे, मछली, चिकन, दालें, मावा, दूध तथा दूध से बनी चीजें.

खूब खाएं

हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, अन्य सब्जियां, सलाद, पानी.

कभीकभार खाएं

मिठाई, अत्यधिक मीठे फल जैसे आम, चीकू, केला, हलवाई के यहां बने स्नैक्स, चीज, केक, चौकलेट, आइसक्रीम, बिस्कुट, तैलीय पकवान, मक्खन, फास्ट फूड और सौफ्ट ड्रिंक.

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